Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَعَاذَ اللَّهِ: हम अल्लाह की पनाह माँगते हैं, अल्लाह की शरण में आते हैं।
- مَتَاعَنَا: हमारा सामान (यहाँ अर्थ: वह पैमाना/प्याला जिससे वे नापते थे)।
- لَظَالِمُونَ: तो हम निश्चय ही अत्याचारी होंगे।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के भाइयों ने उनसे अनुरोध किया कि उनके छोटे भाई (बिन्यामीन) के बदले उनमें से किसी एक को रोक लिया जाए, तो यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने इस प्रस्ताव को सख़्ती से अस्वीकार करते हुए कहा: "अल्लाह की पनाह! हम ऐसा कभी नहीं कर सकते।" उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी निर्दोष व्यक्ति को किसी अपराधी के बदले में नहीं पकड़ सकते। उन्होंने यह भी बारीकी से कहा कि हम केवल उसी व्यक्ति को रोकेंगे जिसके पास अपना सामान (पैमाना) पाया है — उन्होंने यह नहीं कहा कि "जिसने चोरी की" क्योंकि वे झूठ बोलने से बचना चाहते थे। उन्होंने आगे कहा: "यदि हम आपकी बात मानकर किसी बेगुनाह को पकड़ लें और असली दोषी को छोड़ दें, तो हम निश्चय ही अत्याचारी और ज़ालिम होंगे।" यह उनका उत्तर उनके न्याय, ईमानदारी और अल्लाह के प्रति गहरे डर को दर्शाता है।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- न्याय और ईमानदारी की महानता: यह आयत सिखाती है कि एक मुसलमान को हर हालत में न्याय करना चाहिए, चाहे सामने अपने ही लोग क्यों न हों। किसी निर्दोष को सज़ा देना या किसी दोषी को बचाना अत्याचार है।
- अल्लाह की पनाह माँगने की शिक्षा: जब भी कोई व्यक्ति गलत काम करने के दबाव में आए, तो उसे तुरंत अल्लाह की पनाह माँगनी चाहिए और उससे बचना चाहिए।
- सच्चाई का पालन: यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने जानबूझकर ऐसा शब्द इस्तेमाल किया जो सच्चाई पर आधारित था — "जिसके पास हमने अपना सामान पाया" — क्योंकि उन्होंने झूठ बोलने से परहेज़ किया। यह हमें सिखाता है कि मुसलमान को हर स्थिति में सच बोलना चाहिए, चाहे बात कितनी भी नाज़ुक क्यों न हो।
- ज़िम्मेदारी का एहसास: एक शासक या अधिकारी को अपनी ज़िम्मेदारी का एहसास होना चाहिए कि वह किसी बेगुनाह पर ज़ुल्म न करे, क्योंकि अल्लाह के सामने हर व्यक्ति को अपने कर्मों का हिसाब देना होगा।
- इस्लाम की सुंदरता: यह आयत इस्लाम के न्याय और समानता के उसूल को उजागर करती है, जो हर इंसान के अधिकारों की रक्षा करता है — चाहे वह अमीर हो या गरीब, बड़ा हो या छोटा। यही इस्लाम की रौशनी है जो अंधेरे में रास्ता दिखाती है।
📜 आयत 77-81 — सूरा यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 79
सूरा यूसुफ आयत 79 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्योंकि हम आपको बहुत नेको कार बुर्जुग़ समझते हैं यूसुफ…सूरा आयत 79/111 — सूरा यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूसुफ सुनें, सूरा यूसुफ अनुवाद, सूरा यूसुफ mp3, सूरा यूसुफ pdf. आयत 77–81. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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