अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَأَسَرَّهَا: यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने उस बात को अपने मन में छिपा लिया।
- شَرٌّ مَّكَانًا: तुम लोगों का स्थान/दर्जा बहुत बुरा है, अर्थात तुम बहुत बुरे हो।
- تَصِفُونَ: तुम जो कुछ कहते/बयान करते हो (झूठ और बदनामी)।
विस्तृत तफ़सीर:
जब यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने अपने भाई बिन्यामीन के कटोरे (प्याले) को उसके सामान से निकलवाया, तो उनके भाइयों ने यह देखकर कहा: "अगर यह (बिन्यामीन) चोरी करता है, तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं, क्योंकि इसका सगा भाई (यूसुफ़) भी पहले चोरी कर चुका है।" उनका इशारा यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) की ओर था, और वे उन पर झूठा आरोप लगा रहे थे।
यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने यह बात सुनी, लेकिन उन्होंने अपने दिल में उस बात को छिपा लिया और उनके सामने उसे प्रकट नहीं किया। उन्होंने अपने मन में कहा: "तुम लोग स्वयं बुरे हो और तुम्हारा दर्जा बहुत नीचा है, क्योंकि तुमने अपने भाई (यूसुफ़) के साथ जो किया, वह कहीं बड़ा अपराध था।" और फिर उन्होंने कहा: "अल्लाह उस बात को खूब जानता है जो तुम लोग कह रहे हो (झूठ और बदनामी)।" यानी अल्लाह तुम्हारे झूठ और बदनामी से पूरी तरह अवगत है, और वही सच्चा न्याय करने वाला है।
यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने यह बात अपने मन में कही, ज़ुबान पर नहीं लाई, क्योंकि उन्होंने धैर्य और सहनशीलता से काम लिया और अपने भाइयों के साथ कठोरता नहीं की।
फ़ायदे (उपदेश):
- धैर्य और सहनशीलता: यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने अपने भाइयों की बात सुनकर भी उन्हें जवाब नहीं दिया और अपने मन में बात रख ली। यह हमें सिखाता है कि जब हम पर झूठे आरोप लगाए जाएँ, तो हमें धैर्य रखना चाहिए और अल्लाह पर भरोसा करना चाहिए।
- अल्लाह ही सच्चा न्याय करने वाला है: जब लोग हमारे बारे में बुरा कहें, तो हमें याद रखना चाहिए कि अल्लाह सब कुछ जानता है और वही सच्चा न्याय करेगा। हमें अपनी पाकीज़गी (पवित्रता) साबित करने के लिए झगड़ने की ज़रूरत नहीं, बल्कि अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए।
- बदनामी और झूठ से बचना: यह आयत हमें सिखाती है कि किसी पर झूठा आरोप लगाना बहुत बड़ा पाप है। हमें हमेशा सच बोलना चाहिए और दूसरों की बदनामी से बचना चाहिए।
- अल्लाह की निगरानी का एहसास: जब हमें यह यकीन हो जाए कि अल्लाह हमारे हर काम और हर बात को देख रहा है, तो हम कभी गलत काम नहीं करेंगे और न ही दूसरों के बारे में बुरा बोलेंगे।
- क्षमा और दरगुज़र: यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने अपने भाइयों के साथ नरमी बरती और उन्हें तुरंत सज़ा नहीं दी। यह हमें सिखाता है कि दूसरों की गलतियों को माफ करना और उनके साथ अच्छा व्यवहार करना इस्लाम की शिक्षा है।
📜 आयत 75-79 — यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 77
सूरा यूसुफ आयत 77 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ग़रज़) इब्ने यामीन रोक लिए गए तो ये लोग कहने…सूरा आयत 77/111 — यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूसुफ सुनें, यूसुफ अनुवाद, यूसुफ mp3, यूसुफ pdf. आयत 75–79. हिंदी अर्थ: اردو.
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Wednesday, August 19, 2026
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