यूसुफ · 87/111
अनुवाद उच्चारण — यूसुफ
يَا بَنِيَّ اذْهَبُوا فَتَحَسَّسُوا مِن يُوسُفَ وَأَخِيهِ وَلَا تَيْأَسُوا مِن رَّوْحِ اللَّهِ ۖ إِنَّهُ لَا يَيْأَسُ مِن رَّوْحِ اللَّهِ إِلَّا الْقَوْمُ الْكَافِرُونَ ۝٨٧
Yaa baniyyaz haboo fatahassasoo miny Yoosufa wa akheehi wa laa tai`asoo mir rawhil laahi innahoo laa yai`asu mir rawhil laahi illal qawmul kaafiroon
📖 हिंदी अर्थ
ऐ मेरी फरज़न्द (एक बार फिर मिस्र) जाओ और यूसुफ और उसके भाई को (जिस तरह बने) ढूँढ के ले आओ और ख़ुदा की रहमत से ना उम्मीद न हो क्योंकि ख़ुदा की रहमत से काफिर लोगो के सिवा और कोई ना उम्मीद नहीं हुआ करता

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَتَحَسَّسُوا: खोज-बीन करो, छान-बीन करके पता लगाओ।
  • رَوْحِ اللَّهِ: अल्लाह की रहमत, उसकी ओर से राहत और सहूलत।
  • لَا تَيْأَسُوا: निराश मत हो, उम्मीद मत छोड़ो।

तफ़सीर (व्याख्या):

हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) ने अपने बेटों से कहा: "मेरे प्यारे बेटों! तुम फिर से मिस्र जाओ और यूसुफ़ और उसके भाई (बिन्यामीन) की खोज-बीन करो। उनके बारे में कोई भी जानकारी या निशान मिले, उसे तलाश करो। और अल्लाह की रहमत से कभी निराश मत होना।"

फिर उन्होंने समझाया कि अल्लाह की रहमत और उसकी मदद का दामन कभी नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि अल्लाह ही है जो मुसीबतों को दूर करता है और बंदों की तकलीफें कम करता है। उसकी रहमत से निराश होना केवल उन्हीं लोगों का काम है जो अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति) को नहीं मानते और उस पर ईमान नहीं रखते। ऐसे लोग ही उसकी रहमत से मायूस होते हैं, क्योंकि वे अल्लाह की असीम शक्ति और उसके एहसानों से अनजान होते हैं।

यहाँ "रोह" से मुराद अल्लाह की रहमत और उसकी ओर से राहत है, जो वह अपने बंदों पर करता है। हज़रत याक़ूब ने अपने बेटों को यह सिखाया कि मुसीबत में भी अल्लाह की रहमत से उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए, क्योंकि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर (सक्षम) है और वह किसी भी वक़्त हालात बदल सकता है।

फ़ायदे (सबक):

  1. मुसीबत और तकलीफ़ के वक़्त भी अल्लाह की रहमत से उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। यह ईमान की निशानी है कि इंसान अल्लाह पर भरोसा रखे और उसकी मदद का इंतज़ार करे।
  2. निराशा और मायूसी कुफ़्र (अल्लाह पर ईमान न लाने) की ओर ले जाती है, इसलिए मोमिन को हमेशा अल्लाह की रहमत से उम्मीद रखनी चाहिए।
  3. हज़रत याक़ूब का यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि बुज़ुर्गों की नसीहत और उनका मार्गदर्शन कितना अहम है। उन्होंने अपने बेटों को कभी हिम्मत न हारने की तालीम दी।
  4. अल्लाह की रहमत असीम है, और वह हर मुश्किल के बाद आसानी पैदा करता है। इसलिए इंसान को हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और उसकी रहमत से उम्मीद नहीं खोनी चाहिए।
  5. यह आयत हमें सिखाती है कि कोशिश और तलाश (खोज) करना भी अल्लाह पर भरोसे का हिस्सा है। इंसान को सिर्फ़ दुआ ही नहीं करनी चाहिए, बल्कि अपनी तरफ़ से भी पूरी कोशिश करनी चाहिए।


📜 आयत 85-89 — यूसुफ

85قَالُوا تَاللَّهِ تَفْتَأُ تَذْكُرُ يُوسُفَ حَتَّىٰ تَكُونَ حَرَضًا أَوْ تَكُونَ مِنَ الْهَالِكِينَ
(ये देखकर उनके बेटे) कहने लगे कि आप तो हमेशा यूसुफ को याद ही करते रहिएगा यहाँ तक कि बीमार हो जाएगा या जान ही दे दीजिएगा
86قَالَ إِنَّمَا أَشْكُو بَثِّي وَحُزْنِي إِلَى اللَّهِ وَأَعْلَمُ مِنَ اللَّهِ مَا لَا تَعْلَمُونَ
याक़ूब ने कहा (मै तुमसे कुछ नहीं कहता) मैं तो अपनी बेक़रारी व रंज की शिकायत ख़ुदा ही से करता हूँ और ख़ुदा की तरफ से जो बातें मै जानता हूँ तुम नहीं जानते हो
87يَا بَنِيَّ اذْهَبُوا فَتَحَسَّسُوا مِن يُوسُفَ وَأَخِيهِ وَلَا تَيْأَسُوا مِن رَّوْحِ اللَّهِ ۖ إِنَّهُ لَا يَيْأَسُ مِن رَّوْحِ اللَّهِ إِلَّا الْقَوْمُ الْكَافِرُونَ
ऐ मेरी फरज़न्द (एक बार फिर मिस्र) जाओ और यूसुफ और उसके भाई को (जिस तरह बने) ढूँढ के ले आओ और ख़ुदा की रहमत से ना उम्मीद न हो क्योंकि ख़ुदा की रहमत से काफिर लोगो के सिवा और कोई ना उम्मीद नहीं हुआ करता
88فَلَمَّا دَخَلُوا عَلَيْهِ قَالُوا يَا أَيُّهَا الْعَزِيزُ مَسَّنَا وَأَهْلَنَا الضُّرُّ وَجِئْنَا بِبِضَاعَةٍ مُّزْجَاةٍ فَأَوْفِ لَنَا الْكَيْلَ وَتَصَدَّقْ عَلَيْنَا ۖ إِنَّ اللَّهَ يَجْزِي الْمُتَصَدِّقِينَ
फिर जब ये लोग यूसुफ के पास गए तो (बहुत गिड़गिड़ाकर) अर्ज़ की कि ऐ अज़ीज़ हमको और हमारे (सारे) कुनबे को कहत की वजह से बड़ी तकलीफ हो रही है और हम कुछ थोड़ी सी पूंजी लेकर आए हैं तो हम को (उसके ऐवज़ पर पूरा ग़ल्ला दिलवा दीजिए और (क़ीमत ही पर नहीं) हम को (अपना) सदक़ा खैरात दीजिए इसमें तो शक़ नहीं कि ख़ुदा सदक़ा ख़ैरात देने वालों को जजाए ख़ैर देता है
89قَالَ هَلْ عَلِمْتُم مَّا فَعَلْتُم بِيُوسُفَ وَأَخِيهِ إِذْ أَنتُمْ جَاهِلُونَ
(अब तो यूसुफ से न रहा गया) कहा तुम्हें कुछ मालूम है कि जब तुम जाहिल हो रहे थे तो तुम ने यूसुफ और उसके भाई के साथ क्या क्या सुलूक किए
यूसुफकुरान सूची
111आयत
मक्कीRevelation
87आयत

अनुवाद — यूसुफ 87

सूरा यूसुफ आयत 87 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ मेरी फरज़न्द (एक बार फिर मिस्र) जाओ और यूसुफ…

सूरा आयत 87/111 — यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूसुफ सुनें, यूसुफ अनुवाद, यूसुफ mp3, यूसुफ pdf. आयत 85–89. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए