Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَتَحَسَّسُوا: खोज-बीन करो, छान-बीन करके पता लगाओ।
- رَوْحِ اللَّهِ: अल्लाह की रहमत, उसकी ओर से राहत और सहूलत।
- لَا تَيْأَسُوا: निराश मत हो, उम्मीद मत छोड़ो।
तफ़सीर (व्याख्या):
हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) ने अपने बेटों से कहा: "मेरे प्यारे बेटों! तुम फिर से मिस्र जाओ और यूसुफ़ और उसके भाई (बिन्यामीन) की खोज-बीन करो। उनके बारे में कोई भी जानकारी या निशान मिले, उसे तलाश करो। और अल्लाह की रहमत से कभी निराश मत होना।"
फिर उन्होंने समझाया कि अल्लाह की रहमत और उसकी मदद का दामन कभी नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि अल्लाह ही है जो मुसीबतों को दूर करता है और बंदों की तकलीफें कम करता है। उसकी रहमत से निराश होना केवल उन्हीं लोगों का काम है जो अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति) को नहीं मानते और उस पर ईमान नहीं रखते। ऐसे लोग ही उसकी रहमत से मायूस होते हैं, क्योंकि वे अल्लाह की असीम शक्ति और उसके एहसानों से अनजान होते हैं।
यहाँ "रोह" से मुराद अल्लाह की रहमत और उसकी ओर से राहत है, जो वह अपने बंदों पर करता है। हज़रत याक़ूब ने अपने बेटों को यह सिखाया कि मुसीबत में भी अल्लाह की रहमत से उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए, क्योंकि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर (सक्षम) है और वह किसी भी वक़्त हालात बदल सकता है।
फ़ायदे (सबक):
- मुसीबत और तकलीफ़ के वक़्त भी अल्लाह की रहमत से उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। यह ईमान की निशानी है कि इंसान अल्लाह पर भरोसा रखे और उसकी मदद का इंतज़ार करे।
- निराशा और मायूसी कुफ़्र (अल्लाह पर ईमान न लाने) की ओर ले जाती है, इसलिए मोमिन को हमेशा अल्लाह की रहमत से उम्मीद रखनी चाहिए।
- हज़रत याक़ूब का यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि बुज़ुर्गों की नसीहत और उनका मार्गदर्शन कितना अहम है। उन्होंने अपने बेटों को कभी हिम्मत न हारने की तालीम दी।
- अल्लाह की रहमत असीम है, और वह हर मुश्किल के बाद आसानी पैदा करता है। इसलिए इंसान को हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और उसकी रहमत से उम्मीद नहीं खोनी चाहिए।
- यह आयत हमें सिखाती है कि कोशिश और तलाश (खोज) करना भी अल्लाह पर भरोसे का हिस्सा है। इंसान को सिर्फ़ दुआ ही नहीं करनी चाहिए, बल्कि अपनी तरफ़ से भी पूरी कोशिश करनी चाहिए।
📜 आयत 85-89 — सूरा यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 87
सूरा यूसुफ आयत 87 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ मेरी फरज़न्द (एक बार फिर मिस्र) जाओ और यूसुफ…सूरा आयत 87/111 — सूरा यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूसुफ सुनें, सूरा यूसुफ अनुवाद, सूरा यूसुफ mp3, सूरा यूसुफ pdf. आयत 85–89. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


