यूसुफ · 86/111
अनुवाद उच्चारण — यूसुफ
قَالَ إِنَّمَا أَشْكُو بَثِّي وَحُزْنِي إِلَى اللَّهِ وَأَعْلَمُ مِنَ اللَّهِ مَا لَا تَعْلَمُونَ ۝٨٦
Qaala innamaaa ashkoo bassee wa huzneee ilal laahi wa a`lamu minal laahi maa laa ta`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
याक़ूब ने कहा (मै तुमसे कुछ नहीं कहता) मैं तो अपनी बेक़रारी व रंज की शिकायत ख़ुदा ही से करता हूँ और ख़ुदा की तरफ से जो बातें मै जानता हूँ तुम नहीं जानते हो

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بَثِّي (बस्सी): अत्यधिक दुख और पीड़ा, वह गम जो सहन करना मुश्किल हो जाए और आदमी उसे बयान करने पर मजबूर हो जाए।
  • حُزْنِي (हुज़्नी): गहरा दुख और रंज।
  • أَشْكُو (अश्कू): मैं शिकायत करता हूँ, अपनी तकलीफ़ बयान करता हूँ।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) के बेटों ने उनसे कहा कि आप यूसुफ़ की याद में इतना रोते रहते हैं कि आपकी आँखें सफेद हो गईं और आपका शरीर कमज़ोर हो गया, तो उन्होंने जवाब में कहा: "मैं अपनी यह तकलीफ़, यह बेहद दुख और गम किसी इंसान के सामने नहीं रोता, न ही मैं अपनी बेसब्री और शिकायत किसी मख़लूक़ से बयान करता हूँ। मैं तो अपना सारा दर्द और गम सिर्फ़ अल्लाह ही के सामने पेश करता हूँ, क्योंकि वही दुख दूर करने वाला, मुसीबत काटने वाला और दुआएँ सुनने वाला है। मैं अल्लाह की रहमत, उसके लुत्फ़ और उसकी मदद के बारे में वह कुछ जानता हूँ जो तुम नहीं जानते। मुझे यक़ीन है कि अल्लाह मेरी मुसीबत दूर करेगा और मेरे बेटे यूसुफ़ को मुझसे मिलाएगा। मुझे उसके सपने की सच्चाई और अल्लाह के वादे पर पूरा भरोसा है कि हम सब उसे सजदा करेंगे।"

फ़ायदे (सबक और नसीहतें):

  1. मुसीबत और गम के वक़्त में इंसान को चाहिए कि वह अपनी शिकायत और दर्द सिर्फ़ अल्लाह से बयान करे, क्योंकि अल्लाह ही असली मददगार और दुख दूर करने वाला है। इंसानों के सामने रोना-धोना और शिकायत करना न तो मुसीबत हल करता है और न ही दिल को सुकून देता है।
  2. अल्लाह पर पूरा भरोसा और अच्छा गुमान रखना चाहिए। हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) ने सालों की मुसीबत के बावजूद अल्लाह की रहमत से उम्मीद नहीं खोई, यह हमारे लिए सबसे बड़ा सबक है कि मुसीबत कितनी भी लंबी हो, अल्लाह की रहमत और मदद का यक़ीन बनाए रखें।
  3. दुआ और गिड़गिड़ाना अल्लाह के सामने ही चाहिए, क्योंकि वही दुआओं को क़बूल करता है और मुसीबतों को टालता है। यह तौहीद (एकेश्वरवाद) की असली तालीम है कि हाजतें सिर्फ़ अल्लाह से माँगी जाएँ।
  4. मुसीबत में सब्र और उम्मीद का दामन नहीं छोड़ना चाहिए। हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) की यह हालत हमें सिखाती है कि अल्लाह वालों की ज़िंदगी में भी इम्तिहान आते हैं, लेकिन उनका सब्र और अल्लाह पर भरोसा उन्हें कभी कमज़ोर नहीं पड़ने देता।


📜 आयत 84-88 — यूसुफ

84وَتَوَلَّىٰ عَنْهُمْ وَقَالَ يَا أَسَفَىٰ عَلَىٰ يُوسُفَ وَابْيَضَّتْ عَيْنَاهُ مِنَ الْحُزْنِ فَهُوَ كَظِيمٌ
और याक़ूब ने उन लोगों की तरफ से मुँह फेर लिया और (रोकर) कहने लगे हाए अफसोस यूसुफ पर और (इस क़दर रोए कि) उनकी ऑंखें सदमे से सफेद हो गई वह तो बड़े रंज के ज़ाबित (झेलने वाले) थे
85قَالُوا تَاللَّهِ تَفْتَأُ تَذْكُرُ يُوسُفَ حَتَّىٰ تَكُونَ حَرَضًا أَوْ تَكُونَ مِنَ الْهَالِكِينَ
(ये देखकर उनके बेटे) कहने लगे कि आप तो हमेशा यूसुफ को याद ही करते रहिएगा यहाँ तक कि बीमार हो जाएगा या जान ही दे दीजिएगा
86قَالَ إِنَّمَا أَشْكُو بَثِّي وَحُزْنِي إِلَى اللَّهِ وَأَعْلَمُ مِنَ اللَّهِ مَا لَا تَعْلَمُونَ
याक़ूब ने कहा (मै तुमसे कुछ नहीं कहता) मैं तो अपनी बेक़रारी व रंज की शिकायत ख़ुदा ही से करता हूँ और ख़ुदा की तरफ से जो बातें मै जानता हूँ तुम नहीं जानते हो
87يَا بَنِيَّ اذْهَبُوا فَتَحَسَّسُوا مِن يُوسُفَ وَأَخِيهِ وَلَا تَيْأَسُوا مِن رَّوْحِ اللَّهِ ۖ إِنَّهُ لَا يَيْأَسُ مِن رَّوْحِ اللَّهِ إِلَّا الْقَوْمُ الْكَافِرُونَ
ऐ मेरी फरज़न्द (एक बार फिर मिस्र) जाओ और यूसुफ और उसके भाई को (जिस तरह बने) ढूँढ के ले आओ और ख़ुदा की रहमत से ना उम्मीद न हो क्योंकि ख़ुदा की रहमत से काफिर लोगो के सिवा और कोई ना उम्मीद नहीं हुआ करता
88فَلَمَّا دَخَلُوا عَلَيْهِ قَالُوا يَا أَيُّهَا الْعَزِيزُ مَسَّنَا وَأَهْلَنَا الضُّرُّ وَجِئْنَا بِبِضَاعَةٍ مُّزْجَاةٍ فَأَوْفِ لَنَا الْكَيْلَ وَتَصَدَّقْ عَلَيْنَا ۖ إِنَّ اللَّهَ يَجْزِي الْمُتَصَدِّقِينَ
फिर जब ये लोग यूसुफ के पास गए तो (बहुत गिड़गिड़ाकर) अर्ज़ की कि ऐ अज़ीज़ हमको और हमारे (सारे) कुनबे को कहत की वजह से बड़ी तकलीफ हो रही है और हम कुछ थोड़ी सी पूंजी लेकर आए हैं तो हम को (उसके ऐवज़ पर पूरा ग़ल्ला दिलवा दीजिए और (क़ीमत ही पर नहीं) हम को (अपना) सदक़ा खैरात दीजिए इसमें तो शक़ नहीं कि ख़ुदा सदक़ा ख़ैरात देने वालों को जजाए ख़ैर देता है
यूसुफकुरान सूची
111आयत
मक्कीRevelation
86आयत

अनुवाद — यूसुफ 86

सूरा यूसुफ आयत 86 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : याक़ूब ने कहा (मै तुमसे कुछ नहीं कहता) मैं तो…

सूरा आयत 86/111 — यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूसुफ सुनें, यूसुफ अनुवाद, यूसुफ mp3, यूसुफ pdf. आयत 84–88. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए