Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- بَثِّي (बस्सी): अत्यधिक दुख और पीड़ा, वह गम जो सहन करना मुश्किल हो जाए और आदमी उसे बयान करने पर मजबूर हो जाए।
- حُزْنِي (हुज़्नी): गहरा दुख और रंज।
- أَشْكُو (अश्कू): मैं शिकायत करता हूँ, अपनी तकलीफ़ बयान करता हूँ।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) के बेटों ने उनसे कहा कि आप यूसुफ़ की याद में इतना रोते रहते हैं कि आपकी आँखें सफेद हो गईं और आपका शरीर कमज़ोर हो गया, तो उन्होंने जवाब में कहा: "मैं अपनी यह तकलीफ़, यह बेहद दुख और गम किसी इंसान के सामने नहीं रोता, न ही मैं अपनी बेसब्री और शिकायत किसी मख़लूक़ से बयान करता हूँ। मैं तो अपना सारा दर्द और गम सिर्फ़ अल्लाह ही के सामने पेश करता हूँ, क्योंकि वही दुख दूर करने वाला, मुसीबत काटने वाला और दुआएँ सुनने वाला है। मैं अल्लाह की रहमत, उसके लुत्फ़ और उसकी मदद के बारे में वह कुछ जानता हूँ जो तुम नहीं जानते। मुझे यक़ीन है कि अल्लाह मेरी मुसीबत दूर करेगा और मेरे बेटे यूसुफ़ को मुझसे मिलाएगा। मुझे उसके सपने की सच्चाई और अल्लाह के वादे पर पूरा भरोसा है कि हम सब उसे सजदा करेंगे।"
फ़ायदे (सबक और नसीहतें):
- मुसीबत और गम के वक़्त में इंसान को चाहिए कि वह अपनी शिकायत और दर्द सिर्फ़ अल्लाह से बयान करे, क्योंकि अल्लाह ही असली मददगार और दुख दूर करने वाला है। इंसानों के सामने रोना-धोना और शिकायत करना न तो मुसीबत हल करता है और न ही दिल को सुकून देता है।
- अल्लाह पर पूरा भरोसा और अच्छा गुमान रखना चाहिए। हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) ने सालों की मुसीबत के बावजूद अल्लाह की रहमत से उम्मीद नहीं खोई, यह हमारे लिए सबसे बड़ा सबक है कि मुसीबत कितनी भी लंबी हो, अल्लाह की रहमत और मदद का यक़ीन बनाए रखें।
- दुआ और गिड़गिड़ाना अल्लाह के सामने ही चाहिए, क्योंकि वही दुआओं को क़बूल करता है और मुसीबतों को टालता है। यह तौहीद (एकेश्वरवाद) की असली तालीम है कि हाजतें सिर्फ़ अल्लाह से माँगी जाएँ।
- मुसीबत में सब्र और उम्मीद का दामन नहीं छोड़ना चाहिए। हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) की यह हालत हमें सिखाती है कि अल्लाह वालों की ज़िंदगी में भी इम्तिहान आते हैं, लेकिन उनका सब्र और अल्लाह पर भरोसा उन्हें कभी कमज़ोर नहीं पड़ने देता।
📜 आयत 84-88 — सूरा यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 86
सूरा यूसुफ आयत 86 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : याक़ूब ने कहा (मै तुमसे कुछ नहीं कहता) मैं तो…सूरा आयत 86/111 — सूरा यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूसुफ सुनें, सूरा यूसुफ अनुवाद, सूरा यूसुफ mp3, सूरा यूसुफ pdf. आयत 84–88. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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