अर-राद · 6/43
अनुवाद उच्चारण — सूरा अर-राद
وَيَسْتَعْجِلُونَكَ بِالسَّيِّئَةِ قَبْلَ الْحَسَنَةِ وَقَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِهِمُ الْمَثُلَاتُ ۗ وَإِنَّ رَبَّكَ لَذُو مَغْفِرَةٍ لِّلنَّاسِ عَلَىٰ ظُلْمِهِمْ ۖ وَإِنَّ رَبَّكَ لَشَدِيدُ الْعِقَابِ ۝٦
Wa yasta`jiloonaka bis saiyi`ati qablal hasanati wa qad khalat min qablihimul masulaat; wa inna Rabbaka lazoo maghfiratil linnaasi `alaa zulmihim wa inna Rabbaka lashadeedul `iqaab
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) ये लोग तुम से भलाई के क़ब्ल ही बुराई (अज़ाब) की जल्दी मचा रहे हैं हालॉकि उनके पहले (बहुत से लोगों की) सज़ाएं हो चुकी हैं और इसमें शक़ नहीं की तुम्हारा परवरदिगार बावजूद उनकी शरारत के लोगों पर बड़ा बख़शिश (करम) वाला है और इसमें भी शक़ नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार यक़ीनन सख्त अज़ाब वाला है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • السَّيِّئَةَ: यहाँ इसका अर्थ है यातना और अज़ाब।
  • الْحَسَنَةَ: यहाँ इसका अर्थ है क्षमा और भलाई (आराम व अफ़ियत)।
  • الْمَثُلَاتُ: यह 'مَثُلَة' का बहुवचन है, जिसका अर्थ है पिछली उम्मतों पर आई सज़ाएँ और अज़ाब।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! ये मुशरिकीन आपसे मज़ाक़ और उपहास के तौर पर अज़ाब को जल्दी लाने की माँग करते हैं। वे उस भलाई से पहले बुराई (यानी अज़ाब) की जल्दी कर रहे हैं, जबकि उन्हें चाहिए था कि वे ईमान लाकर रहमत और क्षमा के हक़दार बनते। उनसे पहले बहुत सी उम्मतें गुज़र चुकी हैं, जिन्होंने अपने नबियों को झुठलाया और उन पर अल्लाह की यातनाएँ नाज़िल हुईं। ये लोग उनके हालात से वाक़िफ़ हैं, फिर भी वे अज़ाब की जल्दी क्यों मचा रहे हैं? क्या उन्होंने इन ऐतिहासिक घटनाओं से सबक़ नहीं लिया?

ऐ नबी! आपका रब बहुत क्षमाशील है। वह लोगों के ज़ुल्म (गुनाहों) के बावजूद उन्हें मौक़ा देता है और उन पर अज़ाब जल्दी नाज़िल नहीं करता, ताकि वे तौबा कर लें। अगर वे अपनी ग़लतियों से बाज़ आकर अल्लाह की ओर रुजू करें, तो वह उनके गुनाह माफ़ कर देता है। लेकिन साथ ही, आपका रब सख़्त अज़ाब देने वाला भी है — उन लोगों के लिए जो कुफ़्र और गुनाह पर अड़े रहें और तौबा न करें। उसकी पकड़ बहुत सख़्त है और उसकी सज़ा से कोई बच नहीं सकता।

फ़ायदे (सबक़):

  1. अल्लाह की रहमत और क्षमा का दामन बहुत विस्तृत है — वह बंदों के गुनाहों के बावजूद उन्हें मौक़ा देता है और तौबा करने पर माफ़ कर देता है। यह हमें अल्लाह की रहमत से कभी निराश न होने की तालीम देता है।
  2. अल्लाह की सज़ा से डरना चाहिए — वह जल्दी सज़ा नहीं देता, लेकिन जब पकड़ता है, तो बहुत सख़्त पकड़ता है। इसलिए हमें गुनाहों से बचना चाहिए और उसकी नाफ़रमानी से डरना चाहिए।
  3. पिछली उम्मतों के हालात से सबक़ लेना चाहिए — इतिहास में अल्लाह की सज़ाओं के नमूने मौजूद हैं, जो हमें सीधे रास्ते पर चलने की तरग़ीब देते हैं।
  4. अल्लाह की दो सिफ़तें (गुण) — 'मग़फ़िरत' (क्षमा) और 'शिद्दत-ए-अज़ाब' (सख़्त सज़ा) — हमें बीच का रास्ता दिखाती हैं: न तो अल्लाह की रहमत से निराश होना और न ही उसकी पकड़ से बेख़ौफ़ होना। यही दोनों का संतुलन एक मुसलमान की ज़िंदगी का असली रास्ता है।


📜 आयत 4-8 — सूरा अर-राद

4وَفِي الْأَرْضِ قِطَعٌ مُّتَجَاوِرَاتٌ وَجَنَّاتٌ مِّنْ أَعْنَابٍ وَزَرْعٌ وَنَخِيلٌ صِنْوَانٌ وَغَيْرُ صِنْوَانٍ يُسْقَىٰ بِمَاءٍ وَاحِدٍ وَنُفَضِّلُ بَعْضَهَا عَلَىٰ بَعْضٍ فِي الْأُكُلِ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَعْقِلُونَ
और खुरमों (खजूर) के दरख्त की एक जड़ और दो याखें और बाज़ अकेला (एक ही याख़ का) हालॉकि सब एक ही पानी से सीचे जाते हैं और फलों में बाज़ को बाज़ पर हम तरजीह देते हैं बेशक जो लोग अक़ल वाले हैं उनके लिए इसमें (कुदरत खुदा की) बहुतेरी निशानियाँ हैं
5۞ وَإِن تَعْجَبْ فَعَجَبٌ قَوْلُهُمْ أَإِذَا كُنَّا تُرَابًا أَإِنَّا لَفِي خَلْقٍ جَدِيدٍ ۗ أُولَٰئِكَ الَّذِينَ كَفَرُوا بِرَبِّهِمْ ۖ وَأُولَٰئِكَ الْأَغْلَالُ فِي أَعْنَاقِهِمْ ۖ وَأُولَٰئِكَ أَصْحَابُ النَّارِ ۖ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
और अगर तुम्हें (किसी बात पर) ताज्जुब होता है तो उन कुफ्फारों को ये क़ौल ताज्जुब की बात है कि जब हम (सड़गल कर) मिट्टी हो जाएंगें तो क्या हम (फिर दोबारा) एक नई जहन्नुम में आंऎंगें ये वही लोग हैं जिन्होंने अपने परवरदिगार के साथ कुफ्र किया और यही वह लोग हैं जिनकी गर्दनों में (क़यामत के दिन) तौक़ पड़े होगें और यही लोग जहन्नुमी हैं कि ये इसमें हमेशा रहेगें
6وَيَسْتَعْجِلُونَكَ بِالسَّيِّئَةِ قَبْلَ الْحَسَنَةِ وَقَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِهِمُ الْمَثُلَاتُ ۗ وَإِنَّ رَبَّكَ لَذُو مَغْفِرَةٍ لِّلنَّاسِ عَلَىٰ ظُلْمِهِمْ ۖ وَإِنَّ رَبَّكَ لَشَدِيدُ الْعِقَابِ
और (ऐ रसूल) ये लोग तुम से भलाई के क़ब्ल ही बुराई (अज़ाब) की जल्दी मचा रहे हैं हालॉकि उनके पहले (बहुत से लोगों की) सज़ाएं हो चुकी हैं और इसमें शक़ नहीं की तुम्हारा परवरदिगार बावजूद उनकी शरारत के लोगों पर बड़ा बख़शिश (करम) वाला है और इसमें भी शक़ नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार यक़ीनन सख्त अज़ाब वाला है
7وَيَقُولُ الَّذِينَ كَفَرُوا لَوْلَا أُنزِلَ عَلَيْهِ آيَةٌ مِّن رَّبِّهِ ۗ إِنَّمَا أَنتَ مُنذِرٌ ۖ وَلِكُلِّ قَوْمٍ هَادٍ
और वो लोग काफिर हैं कहते हैं कि इस शख़्श (मोहम्मद) पर उसके परवरदिगार की तरफ से कोई निशानी (हमारी मर्ज़ी के मुताबिक़) क्यों नहीं नाज़िल की जाती ऐ रसूल तुम तो सिर्फ (ख़ौफे ख़ुदा से) डराने वाले हो
8اللَّهُ يَعْلَمُ مَا تَحْمِلُ كُلُّ أُنثَىٰ وَمَا تَغِيضُ الْأَرْحَامُ وَمَا تَزْدَادُ ۖ وَكُلُّ شَيْءٍ عِندَهُ بِمِقْدَارٍ
और हर क़ौम के लिए एक हिदायत करने वाला है हर मादा जो कि पेट में लिए हुए है और उसको ख़ुदा ही जानता है व बच्चा दानियों का घटना बढ़ना (भी वही जानता है) और हर चीज़ उसके नज़दीक़ एक अन्दाजे से है
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6आयत

अनुवाद — अर-राद 6

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सूरा आयत 6/43 — सूरा अर-राद الرعد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अर-राद सुनें, सूरा अर-राद अनुवाद, सूरा अर-राद mp3, सूरा अर-राद pdf. आयत 4–8. हिंदी अर्थ: اردو.





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Friday, October 2, 2026

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