Wa yaqoolul lazeena kafaroo law laaa unzila `alaihi Aayatum mir Rabbih; innamaaa anta munzirunw wa likulli qawmin haad
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
और वो लोग काफिर हैं कहते हैं कि इस शख़्श (मोहम्मद) पर उसके परवरदिगार की तरफ से कोई निशानी (हमारी मर्ज़ी के मुताबिक़) क्यों नहीं नाज़िल की जाती ऐ रसूल तुम तो सिर्फ (ख़ौफे ख़ुदा से) डराने वाले हो
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اور کافر لوگ کہتے ہیں کہ اس (پیغمبر) پر اس کے پروردگار کی طرف سے کوئی نشانی نازل نہیں ہوئی۔ سو (اے محمدﷺ) تم تو صرف ہدایت کرنے والے ہو اور ہر ایک قوم کے لیے رہنما ہوا کرتا ہے
यह आयत मक्का के काफ़िरों की उस जिद्द और हठधर्मिता का जवाब देती है जो वे पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ के पास आकर कहा करते थे। वे अत्यधिक अहंकार और विरोध के कारण कहते थे कि "इस व्यक्ति (मुहम्मद ﷺ) पर उसके रब की ओर से कोई चमत्कार (आयत) क्यों नहीं उतारा गया?" उनका इशारा उन भौतिक चमत्कारों की ओर था जो पिछले पैग़म्बरों को दिए गए थे, जैसे मूसा (अलैहिस्सलाम) की लाठी का अजगर बन जाना, या ईसा (अलैहिस्सलाम) का मुर्दों को ज़िंदा करना। वे यह कहकर नबी ﷺ की सच्चाई पर सवाल उठाना चाहते थे कि अगर आप सच्चे नबी हैं तो हमें भी ऐसा ही कोई चमत्कार दिखाइए।
अल्लाह तआला ने इसका जवाब दिया कि ऐ पैग़म्बर! आपका काम केवल लोगों को अल्लाह के अज़ाब से डराना (मुन्ज़िर बनाना) है। चमत्कारों का उतरना आपके हाथ में नहीं, बल्कि अल्लाह की मर्ज़ी पर निर्भर है। अल्लाह ने आपको जो चमत्कार (क़ुरआन) दिया है, वही आपके लिए पर्याप्त है। फिर अल्लाह ने एक महत्वपूर्ण सिद्धांत बताया कि हर क़ौम (समुदाय) के लिए एक हादी (मार्गदर्शक) होता है। यानी हर युग में अल्लाह अपने बंदों की हिदायत के लिए कोई न कोई नबी या रहनुमा भेजता रहा है, और इस उम्मत के लिए मुहम्मद ﷺ ही वह हादी हैं। उन्होंने अपना काम पूरा कर दिया; अब जो लोग उनकी बात नहीं मानते, वे खुद अपने नुक़सान का कारण बनते हैं।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
नबी ﷺ का काम केवल संदेश पहुँचाना है — हमें यह समझना चाहिए कि हिदायत देना अल्लाह के हाथ में है, और हमारा काम केवल अच्छी बात पहुँचाना और नसीहत करना है। जब हम दूसरों को इस्लाम की ओर बुलाएँ, तो निराश न हों अगर लोग न मानें।
चमत्कारों की माँग करना ईमान की कसौटी नहीं — सबसे बड़ा चमत्कार क़ुरआन है जो हमेशा के लिए मौजूद है। यह अपनी बेमिसाल शैली, विज्ञान और भविष्यवाणियों के साथ आज भी हर ज़माने के लिए जीवित प्रमाण है। इस पर विचार करना ही काफी है।
हर युग में अल्लाह की रहमत — अल्लाह ने कभी भी किसी क़ौम को बिना मार्गदर्शक के नहीं छोड़ा। यह अल्लाह की रहमत और न्याय का सबूत है कि उसने हर ज़माने में हिदायत का ज़रिया भेजा। हमारे लिए यह अहसान है कि हमें आख़िरी नबी ﷺ की उम्मत में रखा गया, जिनकी शिक्षाएँ क़यामत तक के लिए काफी हैं।
जिद्द और हठधर्मिता से बचना — काफ़िरों की यह आदत थी कि वे हर बहाने से सच्चाई को ठुकराते थे। हमें चाहिए कि सच्चाई सामने आते ही उसे कबूल कर लें, न कि बहाने बनाते रहें।
और वो लोग काफिर हैं कहते हैं कि इस शख़्श (मोहम्मद) पर उसके परवरदिगार की तरफ से कोई निशानी (हमारी मर्ज़ी के मुताबिक़) क्यों नहीं नाज़िल की जाती ऐ रसूल तुम तो सिर्फ (ख़ौफे ख़ुदा से) डराने वाले हो
और अगर तुम्हें (किसी बात पर) ताज्जुब होता है तो उन कुफ्फारों को ये क़ौल ताज्जुब की बात है कि जब हम (सड़गल कर) मिट्टी हो जाएंगें तो क्या हम (फिर दोबारा) एक नई जहन्नुम में आंऎंगें ये वही लोग हैं जिन्होंने अपने परवरदिगार के साथ कुफ्र किया और यही वह लोग हैं जिनकी गर्दनों में (क़यामत के दिन) तौक़ पड़े होगें और यही लोग जहन्नुमी हैं कि ये इसमें हमेशा रहेगें
और (ऐ रसूल) ये लोग तुम से भलाई के क़ब्ल ही बुराई (अज़ाब) की जल्दी मचा रहे हैं हालॉकि उनके पहले (बहुत से लोगों की) सज़ाएं हो चुकी हैं और इसमें शक़ नहीं की तुम्हारा परवरदिगार बावजूद उनकी शरारत के लोगों पर बड़ा बख़शिश (करम) वाला है और इसमें भी शक़ नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार यक़ीनन सख्त अज़ाब वाला है
और वो लोग काफिर हैं कहते हैं कि इस शख़्श (मोहम्मद) पर उसके परवरदिगार की तरफ से कोई निशानी (हमारी मर्ज़ी के मुताबिक़) क्यों नहीं नाज़िल की जाती ऐ रसूल तुम तो सिर्फ (ख़ौफे ख़ुदा से) डराने वाले हो
और हर क़ौम के लिए एक हिदायत करने वाला है हर मादा जो कि पेट में लिए हुए है और उसको ख़ुदा ही जानता है व बच्चा दानियों का घटना बढ़ना (भी वही जानता है) और हर चीज़ उसके नज़दीक़ एक अन्दाजे से है
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