अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَوْلَا (लौला): क्यों नहीं? / काश!
- آيَة (आयत): निशानी, चमत्कार, प्रमाण
- مُنذِر (मुन्ज़िर): डराने वाला, सचेत करने वाला
- هَادٍ (हादी): मार्गदर्शक, हिदायत देने वाला
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत मक्का के काफ़िरों की उस जिद्द और हठधर्मिता का जवाब देती है जो वे पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ के पास आकर कहा करते थे। वे अत्यधिक अहंकार और विरोध के कारण कहते थे कि "इस व्यक्ति (मुहम्मद ﷺ) पर उसके रब की ओर से कोई चमत्कार (आयत) क्यों नहीं उतारा गया?" उनका इशारा उन भौतिक चमत्कारों की ओर था जो पिछले पैग़म्बरों को दिए गए थे, जैसे मूसा (अलैहिस्सलाम) की लाठी का अजगर बन जाना, या ईसा (अलैहिस्सलाम) का मुर्दों को ज़िंदा करना। वे यह कहकर नबी ﷺ की सच्चाई पर सवाल उठाना चाहते थे कि अगर आप सच्चे नबी हैं तो हमें भी ऐसा ही कोई चमत्कार दिखाइए।
अल्लाह तआला ने इसका जवाब दिया कि ऐ पैग़म्बर! आपका काम केवल लोगों को अल्लाह के अज़ाब से डराना (मुन्ज़िर बनाना) है। चमत्कारों का उतरना आपके हाथ में नहीं, बल्कि अल्लाह की मर्ज़ी पर निर्भर है। अल्लाह ने आपको जो चमत्कार (क़ुरआन) दिया है, वही आपके लिए पर्याप्त है। फिर अल्लाह ने एक महत्वपूर्ण सिद्धांत बताया कि हर क़ौम (समुदाय) के लिए एक हादी (मार्गदर्शक) होता है। यानी हर युग में अल्लाह अपने बंदों की हिदायत के लिए कोई न कोई नबी या रहनुमा भेजता रहा है, और इस उम्मत के लिए मुहम्मद ﷺ ही वह हादी हैं। उन्होंने अपना काम पूरा कर दिया; अब जो लोग उनकी बात नहीं मानते, वे खुद अपने नुक़सान का कारण बनते हैं।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- नबी ﷺ का काम केवल संदेश पहुँचाना है — हमें यह समझना चाहिए कि हिदायत देना अल्लाह के हाथ में है, और हमारा काम केवल अच्छी बात पहुँचाना और नसीहत करना है। जब हम दूसरों को इस्लाम की ओर बुलाएँ, तो निराश न हों अगर लोग न मानें।
- चमत्कारों की माँग करना ईमान की कसौटी नहीं — सबसे बड़ा चमत्कार क़ुरआन है जो हमेशा के लिए मौजूद है। यह अपनी बेमिसाल शैली, विज्ञान और भविष्यवाणियों के साथ आज भी हर ज़माने के लिए जीवित प्रमाण है। इस पर विचार करना ही काफी है।
- हर युग में अल्लाह की रहमत — अल्लाह ने कभी भी किसी क़ौम को बिना मार्गदर्शक के नहीं छोड़ा। यह अल्लाह की रहमत और न्याय का सबूत है कि उसने हर ज़माने में हिदायत का ज़रिया भेजा। हमारे लिए यह अहसान है कि हमें आख़िरी नबी ﷺ की उम्मत में रखा गया, जिनकी शिक्षाएँ क़यामत तक के लिए काफी हैं।
- जिद्द और हठधर्मिता से बचना — काफ़िरों की यह आदत थी कि वे हर बहाने से सच्चाई को ठुकराते थे। हमें चाहिए कि सच्चाई सामने आते ही उसे कबूल कर लें, न कि बहाने बनाते रहें।
📜 आयत 5-9 — सूरा अर-राद
अनुवाद — अर-राद 7
सूरा अर-राद आयत 7 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और वो लोग काफिर हैं कहते हैं कि इस शख़्श…सूरा आयत 7/43 — सूरा अर-राद الرعد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अर-राद सुनें, सूरा अर-राद अनुवाद, सूरा अर-राद mp3, सूरा अर-राद pdf. आयत 5–9. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 8, 2026
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