इब्राहीम · 23/52
अनुवाद उच्चारण — इब्राहीम
وَأُدْخِلَ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا بِإِذْنِ رَبِّهِمْ ۖ تَحِيَّتُهُمْ فِيهَا سَلَامٌ ۝٢٣
Wa udkhilal lazeena aamanoo wa `amilus saalihaati Jannaatin tajree min tahtihal anhaaru khaalideena feehaa bi izni Rabbihim tahiyyatuhum feeha salaam
📖 हिंदी अर्थ
और जिन लोगों ने (सदक़ दिल से) ईमान क़ुबूल किया और अच्छे (अच्छे) काम किए वह (बेहश्त के) उन बाग़ों में दाख़िल किए जाएँगें जिनके नीचे नहरे जारी होगी और वह अपने परवरदिगार के हुक्म से हमेशा उसमें रहेगें वहाँ उन (की मुलाक़ात) का तोहफा सलाम का हो
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • جَنَّاتٍ (जन्नात): बाग़, स्वर्ग के उद्यान।
  • تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ (तज्री मिन तह्तिहल अन्हार): उनके नीचे से नहरें बहती हैं।
  • خَالِدِينَ (ख़ालिदीन): हमेशा रहने वाले, कभी न मरने वाले।
  • تَحِيَّتُهُمْ (तहिय्यतुहुम): उनका अभिवादन, उन्हें दी जाने वाली सलामी।
  • سَلَامٌ (सलाम): शांति और सुरक्षा की दुआ।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों के अंजाम को बयान कर रहा है जो ईमान लाए और अच्छे कर्म करते रहे। जिस तरह ज़ालिमों का अंजाम जहन्नम है, उसी तरह मोमिनों का अंजाम जन्नत है। उन्हें ऐसे बाग़ों में दाख़िल किया जाएगा जिनके नीचे नहरें बहती हैं—यानी महलों और पेड़ों के नीचे से पानी की नहरें जारी होंगी। वे इन जन्नतों में हमेशा रहेंगे, कभी निकलेंगे नहीं और न ही उन्हें कोई मौत आएगी। यह सब कुछ अल्लाह की इजाज़त और उसकी ताक़त से होगा, क्योंकि जन्नत में दाख़िल होना सिर्फ़ अल्लाह के हुक्म से है, न कि किसी के अपने ज़ोर या अमल से। वहाँ उनका अभिवादन "सलाम" होगा—यानी अल्लाह की तरफ़ से सलाम, फ़रिश्तों की तरफ़ से सलाम, और आपस में एक-दूसरे को सलाम। यह सलाम शांति, सुरक्षा और हर बुराई से पाक होने की निशानी है। जन्नत में न कोई ग़म होगा, न डर, न नफ़रत—सिर्फ़ सुकून और मुहब्बत होगी।

फ़ायदे (सबक़):

  1. ईमान और अच्छे कर्म साथ-साथ ज़रूरी हैं—सिर्फ़ ईमान का दावा काफ़ी नहीं, अमल भी चाहिए।
  2. जन्नत की नेअमतें अल्लाह की रहमत और इजाज़त से मिलती हैं, इसलिए इंसान को अपने अमल पर नाज़ नहीं करना चाहिए, बल्कि अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए।
  3. जन्नत में मोमिनों की ज़िंदगी पूरी तरह सुकून और सलामती वाली होगी—वहाँ कोई झगड़ा, कोई दुख, कोई चिंता नहीं होगी।
  4. "सलाम" का तहिय्यत होना हमें सिखाता है कि मोमिनों का आपसी अभिवादन भी सलाम होना चाहिए, और हमें अपने समाज में शांति और मुहब्बत फैलानी चाहिए।
  5. यह आयत मोमिन को उम्मीद देती है कि दुनिया की मुश्किलें चाहे जितनी हों, अंजाम खूबसूरत है—बशर्ते वह ईमान और नेक अमल पर क़ायम रहे।
🎧 सुनें

📜 आयत 21-25 — इब्राहीम

21وَبَرَزُوا لِلَّهِ جَمِيعًا فَقَالَ الضُّعَفَاءُ لِلَّذِينَ اسْتَكْبَرُوا إِنَّا كُنَّا لَكُمْ تَبَعًا فَهَلْ أَنتُم مُّغْنُونَ عَنَّا مِنْ عَذَابِ اللَّهِ مِن شَيْءٍ ۚ قَالُوا لَوْ هَدَانَا اللَّهُ لَهَدَيْنَاكُمْ ۖ سَوَاءٌ عَلَيْنَا أَجَزِعْنَا أَمْ صَبَرْنَا مَا لَنَا مِن مَّحِيصٍ
और (क़यामत के दिन) लोग सबके सब ख़ुदा के सामने निकल खड़े होगें जो लोग (दुनिया में कमज़ोर थे बड़ी इज्ज़त रखने वालो से (उस वक्त) क़हेंगें कि हम तो बस तुम्हारे क़दम ब क़दम चलने वाले थे तो क्या (आज) तुम ख़ुदा के अज़ाब से कुछ भी हमारे आड़े आ सकते हो वह जवाब देगें काश ख़ुदा हमारी हिदायत करता तो हम भी तुम्हारी हिदायत करते हम ख्वाह बेक़रारी करें ख्वाह सब्र करे (दोनो) हमारे लिए बराबर है (क्योंकि अज़ाब से) हमें तो अब छुटकारा नहीं
22وَقَالَ الشَّيْطَانُ لَمَّا قُضِيَ الْأَمْرُ إِنَّ اللَّهَ وَعَدَكُمْ وَعْدَ الْحَقِّ وَوَعَدتُّكُمْ فَأَخْلَفْتُكُمْ ۖ وَمَا كَانَ لِيَ عَلَيْكُم مِّن سُلْطَانٍ إِلَّا أَن دَعَوْتُكُمْ فَاسْتَجَبْتُمْ لِي ۖ فَلَا تَلُومُونِي وَلُومُوا أَنفُسَكُم ۖ مَّا أَنَا بِمُصْرِخِكُمْ وَمَا أَنتُم بِمُصْرِخِيَّ ۖ إِنِّي كَفَرْتُ بِمَا أَشْرَكْتُمُونِ مِن قَبْلُ ۗ إِنَّ الظَّالِمِينَ لَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
और जब (लोगों का) ख़ैर फैसला हो चुकेगा (और लोग शैतान को इल्ज़ाम देगें) तो शैतान कहेगा कि ख़ुदा ने तुम से सच्चा वायदा किया था (तो वह पूरा हो गया) और मैने भी वायदा तो किया था फिर मैने वायदा ख़िलाफ़ी की और मुझे कुछ तुम पर हुकूमत तो थी नहीं मगर इतनी बात थी कि मैने तुम को (बुरे कामों की तरफ) बुलाया और तुमने मेरा कहा मान लिया तो अब तुम मुझे बुंरा (भला) न कहो बल्कि (अगर कहना है तो) अपने नफ्स को बुरा कहो (आज) न तो मैं तुम्हारी फरियाद को पहुँचा सकता हूँ और न तुम मेरी फरियाद कर सकते हो मै तो उससे पहले ही बेज़ार हूँ कि तुमने मुझे (ख़ुदा का) शरीक बनाया बेशक जो लोग नाफरमान हैं उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है
23وَأُدْخِلَ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا بِإِذْنِ رَبِّهِمْ ۖ تَحِيَّتُهُمْ فِيهَا سَلَامٌ
और जिन लोगों ने (सदक़ दिल से) ईमान क़ुबूल किया और अच्छे (अच्छे) काम किए वह (बेहश्त के) उन बाग़ों में दाख़िल किए जाएँगें जिनके नीचे नहरे जारी होगी और वह अपने परवरदिगार के हुक्म से हमेशा उसमें रहेगें वहाँ उन (की मुलाक़ात) का तोहफा सलाम का हो
24أَلَمْ تَرَ كَيْفَ ضَرَبَ اللَّهُ مَثَلًا كَلِمَةً طَيِّبَةً كَشَجَرَةٍ طَيِّبَةٍ أَصْلُهَا ثَابِتٌ وَفَرْعُهَا فِي السَّمَاءِ
(ऐ रसूल) क्या तुमने नहीं देखा कि ख़ुदा ने अच्छी बात (मसलन कलमा तौहीद की) वैसी अच्छी मिसाल बयान की है कि (अच्छी बात) गोया एक पाकीज़ा दरख्त है कि उसकी जड़ मज़बूत है और उसकी टहनियाँ आसमान में लगी हो
25تُؤْتِي أُكُلَهَا كُلَّ حِينٍ بِإِذْنِ رَبِّهَا ۗ وَيَضْرِبُ اللَّهُ الْأَمْثَالَ لِلنَّاسِ لَعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَ
अपने परवरदिगार के हुक्म से हर वक्त फ़ला (फूला) रहता है और ख़ुदा लोगों के वास्ते (इसलिए) मिसालें बयान फरमाता है ताकि लोग नसीहत व इबरत हासिल करें
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अनुवाद — इब्राहीम 23

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सूरा आयत 23/52 — इब्राहीम إبراهيم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: इब्राहीम सुनें, इब्राहीम अनुवाद, इब्राहीम mp3, इब्राहीम pdf. आयत 21–25. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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