इब्राहीम · 24/52
अनुवाद उच्चारण — इब्राहीम
أَلَمْ تَرَ كَيْفَ ضَرَبَ اللَّهُ مَثَلًا كَلِمَةً طَيِّبَةً كَشَجَرَةٍ طَيِّبَةٍ أَصْلُهَا ثَابِتٌ وَفَرْعُهَا فِي السَّمَاءِ ۝٢٤
Alam tara kaifa darabal laahu masalan kalimatan taiyibatan kashajaratin taiyibatin asluhaa saabitunw wa far`uhaa fis samaaa
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) क्या तुमने नहीं देखा कि ख़ुदा ने अच्छी बात (मसलन कलमा तौहीद की) वैसी अच्छी मिसाल बयान की है कि (अच्छी बात) गोया एक पाकीज़ा दरख्त है कि उसकी जड़ मज़बूत है और उसकी टहनियाँ आसमान में लगी हो

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अनुवाद — Tafsir

कठिन शब्दों के अर्थ:

  • كَلِمَةً طَيِّبَةً: पवित्र वचन, अर्थात् "ला इलाहा इल्लल्लाह" (अल्लाह के अतिरिक्त कोई सच्चा पूज्य नहीं)।
  • شَجَرَةٍ طَيِّبَةٍ: अच्छा (पवित्र) वृक्ष, जिसका तात्पर्य खजूर के वृक्ष से है।
  • أَصْلُهَا ثَابِتٌ: उसकी जड़ें पृथ्वी में गहरी और मज़बूती से जमी हुई हैं।
  • فَرْعُهَا فِي السَّمَاءِ: उसकी शाखाएँ आकाश की ओर ऊँची उठी हुई हैं।

आयत की व्याख्या:

हे नबी! क्या तुमने नहीं देखा (जाना) कि अल्लाह ने किस प्रकार एक पवित्र वचन की मिसाल दी है? उसने "ला इलाहा इल्लल्लाह" (एकेश्वरवाद की गवाही) की तुलना एक अच्छे और पवित्र वृक्ष से की है, जो खजूर का वृक्ष है। इस वृक्ष की जड़ें पृथ्वी की गहराइयों में मज़बूती से टिकी होती हैं, जिससे उसे पानी और पोषण मिलता है, और इसकी शाखाएँ ऊँची होकर आकाश की ओर उठती हैं, जहाँ से वह शुद्ध वायु और प्रकाश ग्रहण करती है। इसी प्रकार, ईमान का वचन (कलिमा तैय्यिबा) एक सच्चे मोमिन के हृदय में दृढ़ता से जमा होता है। यह वचन उसके विश्वास, ज्ञान और यक़ीन की जड़ों से मज़बूती से जुड़ा होता है, और उसके अच्छे कर्म तथा पुण्य कार्य इसी प्रकार ऊपर की ओर बढ़ते हैं, जैसे वृक्ष की शाखाएँ आकाश की ओर उठती हैं। यह वचन अल्लाह के पास चढ़ता है और उसके अच्छे कर्मों को स्वीकार्य बनाता है।

आयत से लाभ और शिक्षाएँ:

  1. ईमान का वचन (कलिमा तैय्यिबा) एक मोमिन के जीवन की नींव है; जिस प्रकार खजूर का वृक्ष अपनी मज़बूत जड़ों के कारण तूफानों और आँधियों में भी स्थिर रहता है, उसी प्रकार सच्चा ईमान इंसान को जीवन की कठिनाइयों और परीक्षाओं में स्थिर और दृढ़ रखता है।
  2. यह आयत हमें सिखाती है कि जिस प्रकार एक अच्छा वृक्ष हमेशा फल देता है और लोगों को लाभ पहुँचाता है, उसी प्रकार ईमान वाले व्यक्ति के अच्छे कर्म, अच्छा आचरण और नेकियाँ समाज के लिए लाभदायक होती हैं और उसके जीवन से दूसरों को भी भलाई मिलती है।
  3. यह आयत मुसलमानों को प्रोत्साहित करती है कि वे अपने ईमान को मात्र ज़ुबानी न रखें, बल्कि उसे अपने दिलों में मज़बूत करें और उसके अनुसार अच्छे कर्म करें, ताकि उनका जीवन ऊँचाइयों को छू सके और अल्लाह की रहमत उन पर नाज़िल हो।
  4. इस आयत से यह भी पता चलता है कि अल्लाह ने अपने बन्दों को समझाने के लिए उदाहरण दिए हैं, ताकि वे सत्य को समझें और अपने जीवन को सही दिशा दें। यह कुरआन की शिक्षा पद्धति की सुंदरता को दर्शाता है।


📜 आयत 22-26 — इब्राहीम

22وَقَالَ الشَّيْطَانُ لَمَّا قُضِيَ الْأَمْرُ إِنَّ اللَّهَ وَعَدَكُمْ وَعْدَ الْحَقِّ وَوَعَدتُّكُمْ فَأَخْلَفْتُكُمْ ۖ وَمَا كَانَ لِيَ عَلَيْكُم مِّن سُلْطَانٍ إِلَّا أَن دَعَوْتُكُمْ فَاسْتَجَبْتُمْ لِي ۖ فَلَا تَلُومُونِي وَلُومُوا أَنفُسَكُم ۖ مَّا أَنَا بِمُصْرِخِكُمْ وَمَا أَنتُم بِمُصْرِخِيَّ ۖ إِنِّي كَفَرْتُ بِمَا أَشْرَكْتُمُونِ مِن قَبْلُ ۗ إِنَّ الظَّالِمِينَ لَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
और जब (लोगों का) ख़ैर फैसला हो चुकेगा (और लोग शैतान को इल्ज़ाम देगें) तो शैतान कहेगा कि ख़ुदा ने तुम से सच्चा वायदा किया था (तो वह पूरा हो गया) और मैने भी वायदा तो किया था फिर मैने वायदा ख़िलाफ़ी की और मुझे कुछ तुम पर हुकूमत तो थी नहीं मगर इतनी बात थी कि मैने तुम को (बुरे कामों की तरफ) बुलाया और तुमने मेरा कहा मान लिया तो अब तुम मुझे बुंरा (भला) न कहो बल्कि (अगर कहना है तो) अपने नफ्स को बुरा कहो (आज) न तो मैं तुम्हारी फरियाद को पहुँचा सकता हूँ और न तुम मेरी फरियाद कर सकते हो मै तो उससे पहले ही बेज़ार हूँ कि तुमने मुझे (ख़ुदा का) शरीक बनाया बेशक जो लोग नाफरमान हैं उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है
23وَأُدْخِلَ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا بِإِذْنِ رَبِّهِمْ ۖ تَحِيَّتُهُمْ فِيهَا سَلَامٌ
और जिन लोगों ने (सदक़ दिल से) ईमान क़ुबूल किया और अच्छे (अच्छे) काम किए वह (बेहश्त के) उन बाग़ों में दाख़िल किए जाएँगें जिनके नीचे नहरे जारी होगी और वह अपने परवरदिगार के हुक्म से हमेशा उसमें रहेगें वहाँ उन (की मुलाक़ात) का तोहफा सलाम का हो
24أَلَمْ تَرَ كَيْفَ ضَرَبَ اللَّهُ مَثَلًا كَلِمَةً طَيِّبَةً كَشَجَرَةٍ طَيِّبَةٍ أَصْلُهَا ثَابِتٌ وَفَرْعُهَا فِي السَّمَاءِ
(ऐ रसूल) क्या तुमने नहीं देखा कि ख़ुदा ने अच्छी बात (मसलन कलमा तौहीद की) वैसी अच्छी मिसाल बयान की है कि (अच्छी बात) गोया एक पाकीज़ा दरख्त है कि उसकी जड़ मज़बूत है और उसकी टहनियाँ आसमान में लगी हो
25تُؤْتِي أُكُلَهَا كُلَّ حِينٍ بِإِذْنِ رَبِّهَا ۗ وَيَضْرِبُ اللَّهُ الْأَمْثَالَ لِلنَّاسِ لَعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَ
अपने परवरदिगार के हुक्म से हर वक्त फ़ला (फूला) रहता है और ख़ुदा लोगों के वास्ते (इसलिए) मिसालें बयान फरमाता है ताकि लोग नसीहत व इबरत हासिल करें
26وَمَثَلُ كَلِمَةٍ خَبِيثَةٍ كَشَجَرَةٍ خَبِيثَةٍ اجْتُثَّتْ مِن فَوْقِ الْأَرْضِ مَا لَهَا مِن قَرَارٍ
और गन्दी बात (जैसे कलमाए शिर्क) की मिसाल गोया एक गन्दे दरख्त की सी है (जिसकी जड़ ऐसी कमज़ोर हो) कि ज़मीन के ऊपर ही से उखाड़ फेंका जाए (क्योंकि) उसको कुछ ठहराओ तो है नहीं
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अनुवाद — इब्राहीम 24

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Tuesday, August 18, 2026

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