Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
कठिन शब्दों के अर्थ:
- كَلِمَةً طَيِّبَةً: पवित्र वचन, अर्थात् "ला इलाहा इल्लल्लाह" (अल्लाह के अतिरिक्त कोई सच्चा पूज्य नहीं)।
- شَجَرَةٍ طَيِّبَةٍ: अच्छा (पवित्र) वृक्ष, जिसका तात्पर्य खजूर के वृक्ष से है।
- أَصْلُهَا ثَابِتٌ: उसकी जड़ें पृथ्वी में गहरी और मज़बूती से जमी हुई हैं।
- فَرْعُهَا فِي السَّمَاءِ: उसकी शाखाएँ आकाश की ओर ऊँची उठी हुई हैं।
आयत की व्याख्या:
हे नबी! क्या तुमने नहीं देखा (जाना) कि अल्लाह ने किस प्रकार एक पवित्र वचन की मिसाल दी है? उसने "ला इलाहा इल्लल्लाह" (एकेश्वरवाद की गवाही) की तुलना एक अच्छे और पवित्र वृक्ष से की है, जो खजूर का वृक्ष है। इस वृक्ष की जड़ें पृथ्वी की गहराइयों में मज़बूती से टिकी होती हैं, जिससे उसे पानी और पोषण मिलता है, और इसकी शाखाएँ ऊँची होकर आकाश की ओर उठती हैं, जहाँ से वह शुद्ध वायु और प्रकाश ग्रहण करती है। इसी प्रकार, ईमान का वचन (कलिमा तैय्यिबा) एक सच्चे मोमिन के हृदय में दृढ़ता से जमा होता है। यह वचन उसके विश्वास, ज्ञान और यक़ीन की जड़ों से मज़बूती से जुड़ा होता है, और उसके अच्छे कर्म तथा पुण्य कार्य इसी प्रकार ऊपर की ओर बढ़ते हैं, जैसे वृक्ष की शाखाएँ आकाश की ओर उठती हैं। यह वचन अल्लाह के पास चढ़ता है और उसके अच्छे कर्मों को स्वीकार्य बनाता है।
आयत से लाभ और शिक्षाएँ:
- ईमान का वचन (कलिमा तैय्यिबा) एक मोमिन के जीवन की नींव है; जिस प्रकार खजूर का वृक्ष अपनी मज़बूत जड़ों के कारण तूफानों और आँधियों में भी स्थिर रहता है, उसी प्रकार सच्चा ईमान इंसान को जीवन की कठिनाइयों और परीक्षाओं में स्थिर और दृढ़ रखता है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि जिस प्रकार एक अच्छा वृक्ष हमेशा फल देता है और लोगों को लाभ पहुँचाता है, उसी प्रकार ईमान वाले व्यक्ति के अच्छे कर्म, अच्छा आचरण और नेकियाँ समाज के लिए लाभदायक होती हैं और उसके जीवन से दूसरों को भी भलाई मिलती है।
- यह आयत मुसलमानों को प्रोत्साहित करती है कि वे अपने ईमान को मात्र ज़ुबानी न रखें, बल्कि उसे अपने दिलों में मज़बूत करें और उसके अनुसार अच्छे कर्म करें, ताकि उनका जीवन ऊँचाइयों को छू सके और अल्लाह की रहमत उन पर नाज़िल हो।
- इस आयत से यह भी पता चलता है कि अल्लाह ने अपने बन्दों को समझाने के लिए उदाहरण दिए हैं, ताकि वे सत्य को समझें और अपने जीवन को सही दिशा दें। यह कुरआन की शिक्षा पद्धति की सुंदरता को दर्शाता है।
📜 आयत 22-26 — सूरा इब्राहीम
अनुवाद — इब्राहीम 24
सूरा इब्राहीम आयत 24 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) क्या तुमने नहीं देखा कि ख़ुदा ने अच्छी…सूरा आयत 24/52 — सूरा इब्राहीम إبراهيم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा इब्राहीम सुनें, सूरा इब्राहीम अनुवाद, सूरा इब्राहीम mp3, सूरा इब्राहीम pdf. आयत 22–26. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा इब्राहीम
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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