अन-नहल · 12/128
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नहल
وَسَخَّرَ لَكُمُ اللَّيْلَ وَالنَّهَارَ وَالشَّمْسَ وَالْقَمَرَ ۖ وَالنُّجُومُ مُسَخَّرَاتٌ بِأَمْرِهِ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَعْقِلُونَ ۝١٢
Wa sakkhkhara lakumul laila wannahaara wash shamsa walqamara wannujoomu musakhkharaatum bi amrih; inna fee zaalika la Aayaatil liqawminy ya`qiloon
📖 हिंदी अर्थ
उसी ने तुम्हारे वास्ते रात को और दिन को और सूरज और चाँद को तुम्हारा ताबेए बना दिया है और सितारे भी उसी के हुक्म से (तुम्हारे) फरमाबरदार हैं कुछ शक़ ही नहीं कि (इसमें) समझदार लोगों के वास्ते यक़ीनन (कुदरत खुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • سَخَّرَ – वश में किया, अधीन किया
  • مُسَخَّرَاتٌ – वशीभूत, आज्ञाकारी
  • بِأَمْرِهِ – उसके आदेश से, उसकी अनुमति से
  • لَآيَاتٍ – निश्चित रूप से निशानियाँ, प्रमाण

तफसीर:

अल्लाह तआला ने अपनी असीम कृपा और दया से रात और दिन को तुम्हारे लिए वशीभूत कर दिया है। रात को उसने तुम्हारे आराम और सुकून के लिए बनाया, ताकि तुम उसमें विश्राम करो और अपनी थकान दूर करो, और दिन को तुम्हारी कमाई और जीविका की तलाश के लिए रोशन किया, ताकि तुम उसमें अपने काम-काज कर सको। इसी प्रकार सूरज को उसने चमकता हुआ प्रकाश बनाया, जो दिन में रोशनी और गर्मी प्रदान करता है, और चाँद को नूर (कोमल प्रकाश) बनाया, जो रात में मार्गदर्शन और महीनों तथा वर्षों की गणना का माध्यम है। इन सबके अलावा, तारों को भी उसने अपने आदेश से वशीभूत कर रखा है—वे आकाश में स्थिर हैं, तुम्हारे मार्गदर्शन के लिए अंधेरों में (जंगल, समुद्र और रात की यात्रा में) रास्ता दिखाते हैं, और समय तथा मौसम की पहचान में सहायक हैं। यह सब कुछ अल्लाह के आदेश और उसकी योजना के अधीन चल रहा है, बिना किसी स्वतंत्र शक्ति के।

निस्संदेह, इन सब चीज़ों के वशीभूत होने में—रात-दिन के बदलने, सूरज-चाँद की गति, और तारों के नियमित चक्र में—उन लोगों के लिए अल्लाह की क़ुदरत, हिकमत और एकता की स्पष्ट निशानियाँ हैं जो अपनी अक्ल से सोचते-समझते हैं। वे इन दृश्यों को देखकर यह निष्कर्ष निकालते हैं कि इन्हें बनाने वाला और इन्हें नियंत्रित करने वाला कोई महान शक्तिशाली प्राणी है, जो अकेला है, और वही इबादत के योग्य है।

फ़ायदे:

  1. यह आयत हमें अल्लाह की अपार दया और कृपा को याद दिलाती है—उसने ब्रह्मांड की हर चीज़ को हमारी सेवा में लगा दिया है, बिना किसी कीमत के। यह हमारे दिलों में अल्लाह के प्रति शुक्र और मोहब्बत पैदा करती है।
  2. यह हमें सिखाती है कि सृष्टि की हर चीज़ में गहरी निशानियाँ हैं; जो व्यक्ति अक्ल से काम लेता है, वह हर पल अल्लाह की याद में रहता है और उसकी महानता को पहचानता है।
  3. यह आयत हमें प्रकृति के नियमों पर ग़ौर करने की प्रेरणा देती है—विज्ञान और ज्ञान की खोज इसी सोच से जुड़ी है, क्योंकि जितना अधिक हम ब्रह्मांड को समझेंगे, उतना ही अल्लाह की क़ुदरत पर हमारा ईमान मज़बूत होगा।
  4. यह हमें यह भी बताती है कि यह सब कुछ अल्लाह के आदेश से चल रहा है, इसलिए हमें अपने जीवन के हर मामले में अल्लाह के आदेशों को मानना चाहिए, जैसे यह सारी सृष्टि उसके आदेश की पाबंद है।


📜 आयत 10-14 — सूरा अन-नहल

10هُوَ الَّذِي أَنزَلَ مِنَ السَّمَاءِ مَاءً ۖ لَّكُم مِّنْهُ شَرَابٌ وَمِنْهُ شَجَرٌ فِيهِ تُسِيمُونَ
और अगर ख़ुदा चाहता तो तुम सबको मज़िले मक़सूद तक पहुँचा देता वह वही (ख़ुदा) है जिसने आसमान से पानी बरसाया जिसमें से तुम सब पीते हो और इससे दरख्त शादाब होते हैं
11يُنبِتُ لَكُم بِهِ الزَّرْعَ وَالزَّيْتُونَ وَالنَّخِيلَ وَالْأَعْنَابَ وَمِن كُلِّ الثَّمَرَاتِ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لِّقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ
जिनमें तुम (अपने मवेशियों को) चराते हो इसी पानी से तुम्हारे वास्ते खेती और जैतून और खुरमें और अंगूर उगाता है और हर तरह के फल (पैदा करता है) इसमें शक़ नहीं कि इसमें ग़ौर करने वालो के वास्ते (कुदरते ख़ुदा की) बहुत बड़ी निशानी है
12وَسَخَّرَ لَكُمُ اللَّيْلَ وَالنَّهَارَ وَالشَّمْسَ وَالْقَمَرَ ۖ وَالنُّجُومُ مُسَخَّرَاتٌ بِأَمْرِهِ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَعْقِلُونَ
उसी ने तुम्हारे वास्ते रात को और दिन को और सूरज और चाँद को तुम्हारा ताबेए बना दिया है और सितारे भी उसी के हुक्म से (तुम्हारे) फरमाबरदार हैं कुछ शक़ ही नहीं कि (इसमें) समझदार लोगों के वास्ते यक़ीनन (कुदरत खुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
13وَمَا ذَرَأَ لَكُمْ فِي الْأَرْضِ مُخْتَلِفًا أَلْوَانُهُ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لِّقَوْمٍ يَذَّكَّرُونَ
और जो तरह तरह के रंगों की चीज़े उसमें ज़मीन में तुम्हारे नफे के वास्ते पैदा की
14وَهُوَ الَّذِي سَخَّرَ الْبَحْرَ لِتَأْكُلُوا مِنْهُ لَحْمًا طَرِيًّا وَتَسْتَخْرِجُوا مِنْهُ حِلْيَةً تَلْبَسُونَهَا وَتَرَى الْفُلْكَ مَوَاخِرَ فِيهِ وَلِتَبْتَغُوا مِن فَضْلِهِ وَلَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
कुछ शक़ नहीं कि इसमें भी इबरत व नसीहत हासिल करने वालों के वास्ते (कुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानी है और वही (वह ख़ुदा है जिसने दरिया को (भी तुम्हारे) क़ब्ज़े में कर दिया ताकि तुम इसमें से (मछलियों का) ताज़ा ताज़ा गोश्त खाओ और इसमें से जेवर (की चीज़े मोती वगैरह) निकालो जिन को तुम पहना करते हो और तू कश्तियों को देखता है कि (आमद व रफत में) दरिया में (पानी को) चीरती फाड़ती आती है
अन-नहलकुरान सूची
128आयत
मक्कीअवतरण स्थान
12आयत

अनुवाद — अन-नहल 12

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Friday, October 2, 2026

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