अन-नहल · 13/128
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नहल
وَمَا ذَرَأَ لَكُمْ فِي الْأَرْضِ مُخْتَلِفًا أَلْوَانُهُ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لِّقَوْمٍ يَذَّكَّرُونَ ۝١٣
Wa maa zara a lakum fil ardi mukhtalifan alwaanuh; inna fee zaalika la Aayatal liqawminy yazakkaroon
📖 हिंदी अर्थ
और जो तरह तरह के रंगों की चीज़े उसमें ज़मीन में तुम्हारे नफे के वास्ते पैदा की

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ذَرَأَ: पैदा किया, फैलाया, सृष्टि की।
  • مُخْتَلِفًا أَلْوَانُهُ: जिसके रंग अलग-अलग हैं, यानी कई किस्में और प्रकार।
  • يَذَّكَّرُونَ: वे लोग जो सोच-विचार करते हैं, सबक लेते हैं और याद रखते हैं।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी असीम शक्ति और दया का ज़िक्र करते हुए बताया कि उसने धरती में तुम्हारे लिए तरह-तरह की चीज़ें पैदा की हैं — जानवर, पेड़-पौधे, फल, खनिज पदार्थ, अनाज और दूसरी ज़रूरत की चीज़ें। इन सबके रंग, रूप, स्वाद और फायदे अलग-अलग हैं। कोई लाल है, कोई पीला, कोई हरा, कोई सफेद; कोई मीठा, कोई खट्टा, कोई कड़वा। यह सब कुछ अल्लाह ने इंसान के लिए मुसख़्खर (अधीन) कर दिया है ताकि वह उनसे फायदा उठाए।

इस सृष्टि में, इन चीज़ों के अलग-अलग रंगों और फायदों में एक बड़ी निशानी है — अल्लाह की कुदरत (शक्ति), उसकी वहदानियत (एकता) और उसकी बेपनाह रहमत की। जो लोग सोचते-समझते हैं, वे इन चीज़ों को देखकर अल्लाह की अज़मत को पहचानते हैं और समझ जाते हैं कि यह सब किसी अपने आप नहीं बना, बल्कि एक हकीम (तत्वदर्शी) और कादिर (सर्वशक्तिमान) ख़ालिक़ ने बनाया है। वे इससे सबक लेते हैं कि जिसने इतनी विविधता और सुंदरता से यह दुनिया बनाई, वही अकेला इबादत (पूजा) के लायक है, और उसके साथ किसी को शरीक नहीं करना चाहिए।

फायदे और सबक:

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की बनाई हुई चीज़ों पर ग़ौर करना इबादत है। जब हम किसी फल, जानवर या पहाड़ को देखें, तो उसमें अल्लाह की कुदरत की झलक पहचानें।
  2. अल्लाह ने यह सब कुछ हमारे लिए बनाया है — यह उसकी महान दया और मुहब्बत का सबूत है। इसलिए हमें उसका शुक्र अदा करना चाहिए और उसकी नेमतों का सही इस्तेमाल करना चाहिए।
  3. रंगों और किस्मों का अंतर हमें सिखाता है कि यह दुनिया जानबूझकर बनाई गई है, कोई इत्तफ़ाक़ (संयोग) नहीं है। यह हमारे ईमान को मज़बूत करता है।
  4. जो लोग सोचते-समझते हैं, वही अल्लाह की निशानियों से फायदा उठा पाते हैं। इसलिए हमें दिल और दिमाग़ से ग़ौर करने की आदत बनानी चाहिए।
  5. यह आयत हमें अल्लाह की वहदानियत की याद दिलाती है — जिसने इतनी बड़ी और विविध सृष्टि बनाई, वही अकेला पूजा के लायक है। यह हमें शिर्क (अल्लाह के साथ किसी को साझीदार बनाने) से बचाती है और तौहीद (एकेश्वरवाद) पर चलने की तरफ़ ले जाती है।


📜 आयत 11-15 — सूरा अन-नहल

11يُنبِتُ لَكُم بِهِ الزَّرْعَ وَالزَّيْتُونَ وَالنَّخِيلَ وَالْأَعْنَابَ وَمِن كُلِّ الثَّمَرَاتِ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لِّقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ
जिनमें तुम (अपने मवेशियों को) चराते हो इसी पानी से तुम्हारे वास्ते खेती और जैतून और खुरमें और अंगूर उगाता है और हर तरह के फल (पैदा करता है) इसमें शक़ नहीं कि इसमें ग़ौर करने वालो के वास्ते (कुदरते ख़ुदा की) बहुत बड़ी निशानी है
12وَسَخَّرَ لَكُمُ اللَّيْلَ وَالنَّهَارَ وَالشَّمْسَ وَالْقَمَرَ ۖ وَالنُّجُومُ مُسَخَّرَاتٌ بِأَمْرِهِ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَعْقِلُونَ
उसी ने तुम्हारे वास्ते रात को और दिन को और सूरज और चाँद को तुम्हारा ताबेए बना दिया है और सितारे भी उसी के हुक्म से (तुम्हारे) फरमाबरदार हैं कुछ शक़ ही नहीं कि (इसमें) समझदार लोगों के वास्ते यक़ीनन (कुदरत खुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
13وَمَا ذَرَأَ لَكُمْ فِي الْأَرْضِ مُخْتَلِفًا أَلْوَانُهُ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لِّقَوْمٍ يَذَّكَّرُونَ
और जो तरह तरह के रंगों की चीज़े उसमें ज़मीन में तुम्हारे नफे के वास्ते पैदा की
14وَهُوَ الَّذِي سَخَّرَ الْبَحْرَ لِتَأْكُلُوا مِنْهُ لَحْمًا طَرِيًّا وَتَسْتَخْرِجُوا مِنْهُ حِلْيَةً تَلْبَسُونَهَا وَتَرَى الْفُلْكَ مَوَاخِرَ فِيهِ وَلِتَبْتَغُوا مِن فَضْلِهِ وَلَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
कुछ शक़ नहीं कि इसमें भी इबरत व नसीहत हासिल करने वालों के वास्ते (कुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानी है और वही (वह ख़ुदा है जिसने दरिया को (भी तुम्हारे) क़ब्ज़े में कर दिया ताकि तुम इसमें से (मछलियों का) ताज़ा ताज़ा गोश्त खाओ और इसमें से जेवर (की चीज़े मोती वगैरह) निकालो जिन को तुम पहना करते हो और तू कश्तियों को देखता है कि (आमद व रफत में) दरिया में (पानी को) चीरती फाड़ती आती है
15وَأَلْقَىٰ فِي الْأَرْضِ رَوَاسِيَ أَن تَمِيدَ بِكُمْ وَأَنْهَارًا وَسُبُلًا لَّعَلَّكُمْ تَهْتَدُونَ
और (दरिया को तुम्हारे ताबेए) इसलिए (कर दिया) कि तुम लोग उसके फज़ल (नफा तिजारत) की तलाश करो और ताकि तुम शुक्र करो और उसी ने ज़मीन पर (भारी भारी) पहाड़ों को गाड़ दिया
अन-नहलकुरान सूची
128आयत
मक्कीअवतरण स्थान
13आयत

अनुवाद — अन-नहल 13

सूरा अन-नहल आयत 13 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो तरह तरह के रंगों की चीज़े उसमें ज़मीन…

सूरा आयत 13/128 — सूरा अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नहल सुनें, सूरा अन-नहल अनुवाद, सूरा अन-नहल mp3, सूरा अन-नहल pdf. आयत 11–15. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Thursday, October 1, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए