अन-नहल · 80/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
وَاللَّهُ جَعَلَ لَكُم مِّن بُيُوتِكُمْ سَكَنًا وَجَعَلَ لَكُم مِّن جُلُودِ الْأَنْعَامِ بُيُوتًا تَسْتَخِفُّونَهَا يَوْمَ ظَعْنِكُمْ وَيَوْمَ إِقَامَتِكُمْ ۙ وَمِنْ أَصْوَافِهَا وَأَوْبَارِهَا وَأَشْعَارِهَا أَثَاثًا وَمَتَاعًا إِلَىٰ حِينٍ ۝٨٠
Wallaahu ja`ala lakum min juloodil an`aami buyootan tastakhif foonahaa yawma za`nikum wa yawma iqaamatikum wa min aswaafihaa wa awbaarihaa wa ash`aarihaaa asaasanw wa mataa`an ilaa been
📖 हिंदी अर्थ
और ख़ुदा ही ने तुम्हारे घरों को तुम्हारा ठिकाना क़रार दिया और उसी ने तुम्हारे वास्ते चौपायों की खालों से तुम्हारे लिए (हलके फुलके) डेरे (ख़ेमे) बना जिन्हें तुम हलका पाकर अपने सफर और हजर (ठहरने) में काम लाते हो और इन चारपायों की ऊन और रुई और बालो से एक वक्त ख़ास (क़यामत तक) के लिए तुम्हारे बहुत से असबाब और अबकार आमद (काम की) चीज़े बनाई
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَكَنًا (सकनन): वह स्थान जहाँ आराम और सुकून मिले, घर का ठिकाना।
  • ظَعْنِكُمْ (ज़अनिकुम): तुम्हारा सफ़र के लिए कूच करना, एक जगह से दूसरी जगह जाना।
  • أَثَاثًا (असासन): घर का सामान, जैसे कपड़े, बिस्तर, गद्दे आदि।
  • مَتَاعًا (मताअन): वह चीज़ जिससे फ़ायदा उठाया जाए, उपयोग की वस्तु।
  • أَصْوَاف (अस्वाफ़): भेड़ का ऊन।
  • أَوْبَار (औबार): ऊँट का बाल (रोआँ)।
  • أَشْعَار (अश्आर): बकरी का बाल।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपनी बेपनाह रहमत से इंसान के लिए घरों को सुकून और आराम की जगह बनाया है, जहाँ वह अपने परिवार के साथ प्रशांति से रहता है। यह घर पत्थर, मिट्टी या अन्य चीज़ों से बनाए जाते हैं। इसके अलावा, अल्लाह ने जानवरों की खालों से भी घर (ख़ेमे, तंबू) बनाने का इंतज़ाम किया, जिन्हें सफ़र के दौरान आसानी से उठाया जा सकता है और जब कहीं ठहरना हो तो जल्दी से खड़ा किया जा सकता है। ये ख़ेमे और तंबू बस्ती और सफ़र दोनों हालात में इंसान के लिए बड़ी सहूलियत हैं।

इसी तरह, अल्लाह ने भेड़ के ऊन, ऊँट के बाल और बकरी के बाल से घर का सामान (जैसे कपड़े, कालीन, बिस्तर, गद्दे, ज़ीनत की चीज़ें) बनाने का ज़रिया बनाया, ताकि इंसान उनसे फ़ायदा उठाए और एक निश्चित समय तक (यानी अपनी ज़िंदगी के अंत तक) उनका उपयोग करता रहे। यह सब अल्लाह की अपार दया और उसकी नेमतों की निशानियाँ हैं।


फ़ायदे और सबक़:

  1. अल्लाह की नेमतों की पहचान: यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपने घर, कपड़े, और रोज़मर्रा की चीज़ों पर ग़ौर करें और समझें कि ये सब अल्लाह की देन हैं। उसका शुक्र अदा करना हमारा फ़र्ज़ है।
  2. इस्लाम में आसानी: इस्लाम सफ़र और हर हालत में इंसान के लिए आराम और सहूलियत चाहता है। जानवरों की खाल और बाल से बनी चीज़ें इस बात की दलील हैं कि अल्लाह ने इंसान की ज़रूरतों का पूरा ख़याल रखा है।
  3. क़ुदरत की निशानियों पर ग़ौर: जब हम देखते हैं कि भेड़, ऊँट और बकरी जैसे जानवरों से हमें कितने फ़ायदे मिलते हैं, तो हमारा ईमान मज़बूत होता है और हम अल्लाह की क़ुदरत को समझते हैं। यह हमें उसकी इबादत की तरफ़ ले जाता है।
  4. शुक्रगुज़ारी की तालीम: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की हर नेमत का शुक्र अदा करना चाहिए, क्योंकि नेमतों की क़द्र करने से अल्लाह और नेमतें बढ़ाता है।
  5. दुनिया की चीज़ें अस्थायी हैं: "إِلَى حِينٍ" (एक निश्चित समय तक) से हमें यह सबक़ मिलता है कि दुनिया की सारी चीज़ें अस्थायी हैं। हमें आख़िरत के लिए भी तैयारी करनी चाहिए और दुनिया को अपना असली घर नहीं समझना चाहिए।
🎧 सुनें

📜 आयत 78-82 — अन-नहल

78وَاللَّهُ أَخْرَجَكُم مِّن بُطُونِ أُمَّهَاتِكُمْ لَا تَعْلَمُونَ شَيْئًا وَجَعَلَ لَكُمُ السَّمْعَ وَالْأَبْصَارَ وَالْأَفْئِدَةَ ۙ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
और ख़ुदा ही ने तुम्हें तुम्हारी माओं के पेट से निकाला (जब) तुम बिल्कुल नासमझ थे और तुम को कान दिए और ऑंखें (अता की) दिल (इनायत किए) ताकि तुम शुक्र करो
79أَلَمْ يَرَوْا إِلَى الطَّيْرِ مُسَخَّرَاتٍ فِي جَوِّ السَّمَاءِ مَا يُمْسِكُهُنَّ إِلَّا اللَّهُ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ
क्या उन लोगों ने परिन्दों की तरफ ग़ौर नहीं किया जो आसमान के नीचे हवा में घिरे हुए (उड़ते रहते हैं) उनको तो बस ख़ुदा ही (गिरने से ) रोकता है बेशक इसमें भी (कुदरते ख़ुदा की) ईमानदारों के लिए बहुत सी निशानियाँ हैं
80وَاللَّهُ جَعَلَ لَكُم مِّن بُيُوتِكُمْ سَكَنًا وَجَعَلَ لَكُم مِّن جُلُودِ الْأَنْعَامِ بُيُوتًا تَسْتَخِفُّونَهَا يَوْمَ ظَعْنِكُمْ وَيَوْمَ إِقَامَتِكُمْ ۙ وَمِنْ أَصْوَافِهَا وَأَوْبَارِهَا وَأَشْعَارِهَا أَثَاثًا وَمَتَاعًا إِلَىٰ حِينٍ
और ख़ुदा ही ने तुम्हारे घरों को तुम्हारा ठिकाना क़रार दिया और उसी ने तुम्हारे वास्ते चौपायों की खालों से तुम्हारे लिए (हलके फुलके) डेरे (ख़ेमे) बना जिन्हें तुम हलका पाकर अपने सफर और हजर (ठहरने) में काम लाते हो और इन चारपायों की ऊन और रुई और बालो से एक वक्त ख़ास (क़यामत तक) के लिए तुम्हारे बहुत से असबाब और अबकार आमद (काम की) चीज़े बनाई
81وَاللَّهُ جَعَلَ لَكُم مِّمَّا خَلَقَ ظِلَالًا وَجَعَلَ لَكُم مِّنَ الْجِبَالِ أَكْنَانًا وَجَعَلَ لَكُمْ سَرَابِيلَ تَقِيكُمُ الْحَرَّ وَسَرَابِيلَ تَقِيكُم بَأْسَكُمْ ۚ كَذَٰلِكَ يُتِمُّ نِعْمَتَهُ عَلَيْكُمْ لَعَلَّكُمْ تُسْلِمُونَ
और ख़ुदा ही ने तुम्हारे आराम के लिए अपनी पैदा की हुईचीज़ों के साए बनाए और उसी ने तुम्हारे (छिपने बैठने) के वास्ते पहाड़ों में घरौन्दे (ग़ार वग़ैरह) बनाए और उसी ने तुम्हारे लिए कपड़े बनाए जो तुम्हें (सर्दी) गर्मी से महफूज़ रखें और (लोहे) के कुर्ते जो तुम्हें हाथियों की ज़द (मार) से बचा लंग़ यूँ ख़ुदा अपनी नेअमत तुम पर पूरी करता है
82فَإِن تَوَلَّوْا فَإِنَّمَا عَلَيْكَ الْبَلَاغُ الْمُبِينُ
तुम उसकी फरमाबरदारी करो उस पर भी अगर ये लोग (ईमान से) मुँह फेरे तो तुम्हारा फर्ज सिर्फ (एहकाम का) साफ पहुँचा देना है
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अनुवाद — अन-नहल 80

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Tuesday, August 18, 2026

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