अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- سَكَنًا (सकनन): वह स्थान जहाँ आराम और सुकून मिले, घर का ठिकाना।
- ظَعْنِكُمْ (ज़अनिकुम): तुम्हारा सफ़र के लिए कूच करना, एक जगह से दूसरी जगह जाना।
- أَثَاثًا (असासन): घर का सामान, जैसे कपड़े, बिस्तर, गद्दे आदि।
- مَتَاعًا (मताअन): वह चीज़ जिससे फ़ायदा उठाया जाए, उपयोग की वस्तु।
- أَصْوَاف (अस्वाफ़): भेड़ का ऊन।
- أَوْبَار (औबार): ऊँट का बाल (रोआँ)।
- أَشْعَار (अश्आर): बकरी का बाल।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने अपनी बेपनाह रहमत से इंसान के लिए घरों को सुकून और आराम की जगह बनाया है, जहाँ वह अपने परिवार के साथ प्रशांति से रहता है। यह घर पत्थर, मिट्टी या अन्य चीज़ों से बनाए जाते हैं। इसके अलावा, अल्लाह ने जानवरों की खालों से भी घर (ख़ेमे, तंबू) बनाने का इंतज़ाम किया, जिन्हें सफ़र के दौरान आसानी से उठाया जा सकता है और जब कहीं ठहरना हो तो जल्दी से खड़ा किया जा सकता है। ये ख़ेमे और तंबू बस्ती और सफ़र दोनों हालात में इंसान के लिए बड़ी सहूलियत हैं।
इसी तरह, अल्लाह ने भेड़ के ऊन, ऊँट के बाल और बकरी के बाल से घर का सामान (जैसे कपड़े, कालीन, बिस्तर, गद्दे, ज़ीनत की चीज़ें) बनाने का ज़रिया बनाया, ताकि इंसान उनसे फ़ायदा उठाए और एक निश्चित समय तक (यानी अपनी ज़िंदगी के अंत तक) उनका उपयोग करता रहे। यह सब अल्लाह की अपार दया और उसकी नेमतों की निशानियाँ हैं।
फ़ायदे और सबक़:
- अल्लाह की नेमतों की पहचान: यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपने घर, कपड़े, और रोज़मर्रा की चीज़ों पर ग़ौर करें और समझें कि ये सब अल्लाह की देन हैं। उसका शुक्र अदा करना हमारा फ़र्ज़ है।
- इस्लाम में आसानी: इस्लाम सफ़र और हर हालत में इंसान के लिए आराम और सहूलियत चाहता है। जानवरों की खाल और बाल से बनी चीज़ें इस बात की दलील हैं कि अल्लाह ने इंसान की ज़रूरतों का पूरा ख़याल रखा है।
- क़ुदरत की निशानियों पर ग़ौर: जब हम देखते हैं कि भेड़, ऊँट और बकरी जैसे जानवरों से हमें कितने फ़ायदे मिलते हैं, तो हमारा ईमान मज़बूत होता है और हम अल्लाह की क़ुदरत को समझते हैं। यह हमें उसकी इबादत की तरफ़ ले जाता है।
- शुक्रगुज़ारी की तालीम: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की हर नेमत का शुक्र अदा करना चाहिए, क्योंकि नेमतों की क़द्र करने से अल्लाह और नेमतें बढ़ाता है।
- दुनिया की चीज़ें अस्थायी हैं: "إِلَى حِينٍ" (एक निश्चित समय तक) से हमें यह सबक़ मिलता है कि दुनिया की सारी चीज़ें अस्थायी हैं। हमें आख़िरत के लिए भी तैयारी करनी चाहिए और दुनिया को अपना असली घर नहीं समझना चाहिए।
📜 आयत 78-82 — अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 80
सूरा अन-नहल आयत 80 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ख़ुदा ही ने तुम्हारे घरों को तुम्हारा ठिकाना क़रार…सूरा आयत 80/128 — अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नहल सुनें, अन-नहल अनुवाद, अन-नहल mp3, अन-नहल pdf. आयत 78–82. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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