अल-इसरा · 106/111
अनुवाद उच्चारण — अल-इसरा
وَقُرْآنًا فَرَقْنَاهُ لِتَقْرَأَهُ عَلَى النَّاسِ عَلَىٰ مُكْثٍ وَنَزَّلْنَاهُ تَنزِيلًا ۝١٠٦
Wa quraanan faraqnaahu litaqra ahoo `alan naasi `alaa muksinw wa nazzalnaahu tanzeelaa
📖 हिंदी अर्थ
और क़ुरान को हमने थोड़ा थोड़ा करके इसलिए नाज़िल किया कि तुम लोगों के सामने (ज़रुरत पड़ने पर) मोहलत दे देकर उसको पढ़ दिया करो
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَرَقْنَاهُ: हमने इसे स्पष्ट किया, विस्तार से बयान किया, और इसे सत्य और असत्य के बीच फर्क करने वाला बनाया।
  • عَلَىٰ مُكْثٍ: धीरे-धीरे, ठहर-ठहर कर, बिना जल्दी के।
  • تَنزِيلًا: इसे चरणबद्ध रूप से, थोड़ा-थोड़ा करके उतारा।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! हमने यह क़ुरआन आप पर इसलिए उतारा कि यह स्पष्ट करने वाला, विस्तार देने वाला और सत्य को असत्य से अलग करने वाला है। हमने इसे इस तरह नाज़िल किया कि आप इसे लोगों के सामने धीरे-धीरे, ठहर-ठहर कर पढ़ें, ताकि वे इसे अच्छी तरह समझ सकें और इस पर गहराई से विचार कर सकें। यह क़ुरआन एक ही बार में नहीं उतारा गया, बल्कि इसे घटनाओं और परिस्थितियों के अनुसार थोड़ा-थोड़ा करके उतारा गया, ताकि लोगों के दिलों में यह आसानी से बैठ जाए और वे इसके हर हिस्से को अच्छी तरह आत्मसात कर सकें।

यह क़ुरआन एक ऐसा ग्रंथ है जो मानवता के लिए मार्गदर्शन का प्रकाश स्तंभ है। इसे चरणबद्ध रूप से उतारने में बड़ी हिकमत (बुद्धिमत्ता) है — इससे मुसलमानों का ईमान मजबूत होता है, उन्हें हर परिस्थिति में सही राह दिखाई जाती है, और यह किताब उनके दिलों में इस तरह बस जाती है जैसे कोई प्यासा व्यक्ति धीरे-धीरे पानी पीकर तृप्त होता है। यह क़ुरआन हर युग और हर स्थान के लिए है, और इसकी शिक्षाएँ क़यामत तक के लिए पर्याप्त हैं।

इस आयत से हमें सीख मिलती है कि क़ुरआन को समझकर, धीरे-धीरे और विचारपूर्वक पढ़ना चाहिए। जल्दबाज़ी में पढ़ने से अर्थ नहीं समझ आता, बल्कि ठहर-ठहर कर पढ़ने से दिल में रोशनी पैदा होती है और अमल की तौफ़ीक़ मिलती है। यह क़ुरआन हमारे लिए रहमत और शिफ़ा है — जो इसे अपनाएगा, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होगा।

🎧 सुनें

📜 आयत 104-108 — अल-इसरा

104وَقُلْنَا مِن بَعْدِهِ لِبَنِي إِسْرَائِيلَ اسْكُنُوا الْأَرْضَ فَإِذَا جَاءَ وَعْدُ الْآخِرَةِ جِئْنَا بِكُمْ لَفِيفًا
और उसके बाद हमने बनी इसराईल से कहा कि (अब तुम ही) इस मुल्क में (खूब आराम से) रहो सहो फिर जब आख़िरत का वायदा आ पहुँचेगा तो हम तुम सबको समेट कर ले आएँगें
105وَبِالْحَقِّ أَنزَلْنَاهُ وَبِالْحَقِّ نَزَلَ ۗ وَمَا أَرْسَلْنَاكَ إِلَّا مُبَشِّرًا وَنَذِيرًا
और (ऐ रसूल) हमने इस क़ुरान को बिल्कुल ठीक नाज़िल किया और बिल्कुल ठीक नाज़िल हुआ और तुमको तो हमने (जन्नत की) खुशखबरी देने वाला और (अज़ाब से) डराने वाला (रसूल) बनाकर भेजा है
106وَقُرْآنًا فَرَقْنَاهُ لِتَقْرَأَهُ عَلَى النَّاسِ عَلَىٰ مُكْثٍ وَنَزَّلْنَاهُ تَنزِيلًا
और क़ुरान को हमने थोड़ा थोड़ा करके इसलिए नाज़िल किया कि तुम लोगों के सामने (ज़रुरत पड़ने पर) मोहलत दे देकर उसको पढ़ दिया करो
107قُلْ آمِنُوا بِهِ أَوْ لَا تُؤْمِنُوا ۚ إِنَّ الَّذِينَ أُوتُوا الْعِلْمَ مِن قَبْلِهِ إِذَا يُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ يَخِرُّونَ لِلْأَذْقَانِ سُجَّدًا
और (इसी वजह से) हमने उसको रफ्ता रफ्ता नाज़िल किया तुम कह दो कि ख्वाह तुम इस पर ईमान लाओ या न लाओ इसमें शक़ नहीं कि जिन लोगों को उसके क़ब्ल ही (आसमानी किताबों का इल्म अता किया गया है उनके सामने जब ये पढ़ा जाता है तो ठुडडियों से (मुँह के बल) सजदे में गिर पड़तें हैं
108وَيَقُولُونَ سُبْحَانَ رَبِّنَا إِن كَانَ وَعْدُ رَبِّنَا لَمَفْعُولًا
और कहते हैं कि हमारा परवरदिगार (हर ऐब से) पाक व पाकीज़ा है बेशक हमारे परवरदिगार का वायदा पूरा होना ज़रुरी था
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अनुवाद — अल-इसरा 106

सूरा अल-इसरा आयत 106 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और क़ुरान को हमने थोड़ा थोड़ा करके इसलिए नाज़िल किया…

सूरा आयत 106/111 — अल-इसरा الإسراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इसरा सुनें, अल-इसरा अनुवाद, अल-इसरा mp3, अल-इसरा pdf. आयत 104–108. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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