Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ (معاني الكلمات):
- بِالْحَقِّ: सत्य के साथ, पूर्ण न्याय और सच्चाई पर आधारित।
- أَنزَلْنَاهُ: हमने इसे (क़ुरआन) उतारा।
- نَزَلَ: यह उतरा (अवतरित हुआ)।
- مُبَشِّرًا: शुभ सूचना देने वाला (जन्नत की खुशखबरी सुनाने वाला)।
- نَذِيرًا: डराने वाला (आग और अज़ाब से सावधान करने वाला)।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत हमें बताती है कि यह पवित्र क़ुरआन, जो अल्लाह की आख़िरी किताब है, सत्य और न्याय के साथ उतारा गया है। यह कोई साधारण पुस्तक नहीं, बल्कि वह सच्चाई है जो ब्रह्मांड की हर चीज़ को सही रास्ता दिखाती है। अल्लाह ने इसे हिदायत, रहमत और इंसानों की भलाई के लिए उतारा, और यह सत्य के साथ उतरा यानी इसमें कोई कमी, बदलाव या भ्रष्टाचार नहीं है। यह क़ुरआन हमेशा वैसा ही रहेगा जैसा अल्लाह ने उतारा था, क्योंकि अल्लाह ने इसे हर तरह की तहरीफ़ (विकृति) से सुरक्षित रखा है।
इसके बाद अल्लाह अपने नबी ﷺ से कहता है: "और हमने आपको केवल शुभ सूचना देने वाला और डराने वाला बनाकर भेजा है।" यानी आपका मिशन दो ही चीज़ों पर आधारित है:
- मुबश्शिर (शुभ सूचना देने वाला): जो लोग अल्लाह की आज्ञा का पालन करें, नेकी करें और ईमान लाएँ, उन्हें जन्नत की खुशखबरी दी जाए।
- नज़ीर (डराने वाला): जो लोग अल्लाह की नाफ़रमानी करें, कुफ़्र करें और गुनाहों में डूबे रहें, उन्हें अल्लाह के अज़ाब और जहन्नम की आग से सावधान किया जाए।
यह आयत हमें सिखाती है कि क़ुरआन सिर्फ़ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि उस पर अमल करने के लिए उतारा गया है। यह हमारे लिए रहनुमा है, और इसमें हर युग और हर ज़माने के लिए हिदायत है। अल्लाह ने हमें इस किताब के ज़रिए ज़िंदगी का सही तरीक़ा बताया है, ताकि हम दुनिया में भी कामयाब हों और आख़िरत में भी।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह ने हम पर कितना बड़ा एहसान किया है कि उसने हमें यह क़ुरआन दिया, जो सच्चाई और न्याय पर आधारित है। यह किताब हमारे लिए रोशनी है, अंधेरे में रास्ता दिखाने वाली है। अल्लाह ने अपने नबी ﷺ को हमारे पास भेजा, जो हमें जन्नत की खुशखबरी देते हैं और जहन्नम से डराते हैं। यानी हमारे पास मौक़ा है कि हम अल्लाह की राह पर चलें, उसकी इबादत करें और नेक काम करें, तो हमें जन्नत मिलेगी। और अगर हम गुनाह करेंगे, तो अल्लाह का अज़ाब भुगतना पड़ेगा। यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम क़ुरआन को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें। अल्लाह हमें सच्ची हिदायत दे और हमें उन लोगों में शामिल करे जो क़ुरआन पर अमल करते हैं। आमीन।
📜 आयत 103-107 — सूरा अल-इसरा
अनुवाद — अल-इसरा 105
सूरा अल-इसरा आयत 105 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) हमने इस क़ुरान को बिल्कुल ठीक नाज़िल…सूरा आयत 105/111 — सूरा अल-इसरा الإسراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-इसरा सुनें, सूरा अल-इसरा अनुवाद, सूरा अल-इसरा mp3, सूरा अल-इसरा pdf. आयत 103–107. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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