Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَخِرُّونَ: वे गिर पड़ते हैं, सजदे में झुक जाते हैं।
- لِلْأَذْقَانِ: ठुड्डियों के बल (अर्थात चेहरे के बल, पूरी तरह झुककर)।
- سُجَّدًا: सजदा करते हुए, अल्लाह के आगे झुकते हुए।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप इन इनकार करने वालों से कह दीजिए कि तुम इस क़ुरआन पर ईमान लाओ या न लाओ, इससे अल्लाह के दीन को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। तुम्हारा ईमान इसकी शान में कोई इज़ाफ़ा नहीं करता और तुम्हारा इनकार इसकी सच्चाई में कोई कमी नहीं ला सकता। यह क़ुरआन तो अल्लाह का कलाम है, जो हर हाल में सच्चा और बुलंद है।
लेकिन असली पहचान तो उन्हें है जिन्हें सच्चा इल्म दिया गया है। ये वो लोग हैं जिन्होंने पहले की आसमानी किताबें पढ़ीं और उन्होंने वहाँ अल्लाह के आख़िरी रसूल और आख़िरी किताब की निशानियाँ पढ़ रखी थीं। जब उनके सामने क़ुरआन की आयतें पढ़ी जाती हैं, तो वे सच्चे दिल से उसे पहचान लेते हैं, क्योंकि यह वही सच्चाई है जिसका उन्हें इंतज़ार था। उनके दिल अल्लाह के खौफ़ से भर जाते हैं और वे अपनी ठुड्डियों के बल, यानी अपने चेहरे के बल सजदे में गिर पड़ते हैं। यह सजदा किसी दिखावे के लिए नहीं होता, बल्कि अल्लाह की अज़मत के सामने सर झुकाने और उसकी नेमतों का शुक्र अदा करने के लिए होता है।
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा इल्म इंसान को अल्लाह के और करीब लाता है। जिसे जितना सच्चा इल्म मिलता है, वह उतना ही अल्लाह के आगे झुकता है, उतना ही उसकी इबादत में मज़ा पाता है। जो लोग क़ुरआन को समझकर पढ़ते हैं, उनके दिल नरम हो जाते हैं और वे अल्लाह के सामने सजदे में गिर पड़ते हैं। यही वो लोग हैं जिन्हें क़ुरआन से सच्ची हिदायत मिलती है और जिनके चेहरे क़यामत के दिन नूरानी होंगे।
प्यारे इस्लामी भाइयों और बहनों! हमें भी चाहिए कि क़ुरआन को सिर्फ़ पढ़ने की चीज़ न समझें, बल्कि उसे समझकर पढ़ें, उस पर अमल करें और उसकी आयतों को सुनकर अपने दिलों को अल्लाह के ज़िक्र और ख़ुशू (विनम्रता) से भर लें। क़ुरआन वो रहनुमा है जो हमें अंधेरों से निकालकर रौशनी की तरफ़ ले जाता है। जो लोग इससे जुड़े, वे कामयाब हुए और जिन्होंने इसे छोड़ा, वे नुक़सान में रहे। अल्लाह हमें क़ुरआन को समझने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 105-109 — सूरा अल-इसरा
अनुवाद — अल-इसरा 107
सूरा अल-इसरा आयत 107 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (इसी वजह से) हमने उसको रफ्ता रफ्ता नाज़िल किया…सूरा आयत 107/111 — सूरा अल-इसरा الإسراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-इसरा सुनें, सूरा अल-इसरा अनुवाद, सूरा अल-इसरा mp3, सूरा अल-इसरा pdf. आयत 105–109. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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