अल-इसरा · 107/111
अनुवाद उच्चारण — अल-इसरा
قُلْ آمِنُوا بِهِ أَوْ لَا تُؤْمِنُوا ۚ إِنَّ الَّذِينَ أُوتُوا الْعِلْمَ مِن قَبْلِهِ إِذَا يُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ يَخِرُّونَ لِلْأَذْقَانِ سُجَّدًا ۝١٠٧
Qul aaaniminoo biheee aw laa tu`minoo; innal lazeena ootul `ilma min qabliheee izaa yutlaa `alaihim yakhirroona lil azqaani sujjadaa
📖 हिंदी अर्थ
और (इसी वजह से) हमने उसको रफ्ता रफ्ता नाज़िल किया तुम कह दो कि ख्वाह तुम इस पर ईमान लाओ या न लाओ इसमें शक़ नहीं कि जिन लोगों को उसके क़ब्ल ही (आसमानी किताबों का इल्म अता किया गया है उनके सामने जब ये पढ़ा जाता है तो ठुडडियों से (मुँह के बल) सजदे में गिर पड़तें हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَخِرُّونَ: वे गिर पड़ते हैं, सजदे में झुक जाते हैं।
  • لِلْأَذْقَانِ: ठुड्डियों के बल (अर्थात चेहरे के बल, पूरी तरह झुककर)।
  • سُجَّدًا: सजदा करते हुए, अल्लाह के आगे झुकते हुए।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप इन इनकार करने वालों से कह दीजिए कि तुम इस क़ुरआन पर ईमान लाओ या न लाओ, इससे अल्लाह के दीन को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। तुम्हारा ईमान इसकी शान में कोई इज़ाफ़ा नहीं करता और तुम्हारा इनकार इसकी सच्चाई में कोई कमी नहीं ला सकता। यह क़ुरआन तो अल्लाह का कलाम है, जो हर हाल में सच्चा और बुलंद है।

लेकिन असली पहचान तो उन्हें है जिन्हें सच्चा इल्म दिया गया है। ये वो लोग हैं जिन्होंने पहले की आसमानी किताबें पढ़ीं और उन्होंने वहाँ अल्लाह के आख़िरी रसूल और आख़िरी किताब की निशानियाँ पढ़ रखी थीं। जब उनके सामने क़ुरआन की आयतें पढ़ी जाती हैं, तो वे सच्चे दिल से उसे पहचान लेते हैं, क्योंकि यह वही सच्चाई है जिसका उन्हें इंतज़ार था। उनके दिल अल्लाह के खौफ़ से भर जाते हैं और वे अपनी ठुड्डियों के बल, यानी अपने चेहरे के बल सजदे में गिर पड़ते हैं। यह सजदा किसी दिखावे के लिए नहीं होता, बल्कि अल्लाह की अज़मत के सामने सर झुकाने और उसकी नेमतों का शुक्र अदा करने के लिए होता है।

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा इल्म इंसान को अल्लाह के और करीब लाता है। जिसे जितना सच्चा इल्म मिलता है, वह उतना ही अल्लाह के आगे झुकता है, उतना ही उसकी इबादत में मज़ा पाता है। जो लोग क़ुरआन को समझकर पढ़ते हैं, उनके दिल नरम हो जाते हैं और वे अल्लाह के सामने सजदे में गिर पड़ते हैं। यही वो लोग हैं जिन्हें क़ुरआन से सच्ची हिदायत मिलती है और जिनके चेहरे क़यामत के दिन नूरानी होंगे।

प्यारे इस्लामी भाइयों और बहनों! हमें भी चाहिए कि क़ुरआन को सिर्फ़ पढ़ने की चीज़ न समझें, बल्कि उसे समझकर पढ़ें, उस पर अमल करें और उसकी आयतों को सुनकर अपने दिलों को अल्लाह के ज़िक्र और ख़ुशू (विनम्रता) से भर लें। क़ुरआन वो रहनुमा है जो हमें अंधेरों से निकालकर रौशनी की तरफ़ ले जाता है। जो लोग इससे जुड़े, वे कामयाब हुए और जिन्होंने इसे छोड़ा, वे नुक़सान में रहे। अल्लाह हमें क़ुरआन को समझने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 105-109 — अल-इसरा

105وَبِالْحَقِّ أَنزَلْنَاهُ وَبِالْحَقِّ نَزَلَ ۗ وَمَا أَرْسَلْنَاكَ إِلَّا مُبَشِّرًا وَنَذِيرًا
और (ऐ रसूल) हमने इस क़ुरान को बिल्कुल ठीक नाज़िल किया और बिल्कुल ठीक नाज़िल हुआ और तुमको तो हमने (जन्नत की) खुशखबरी देने वाला और (अज़ाब से) डराने वाला (रसूल) बनाकर भेजा है
106وَقُرْآنًا فَرَقْنَاهُ لِتَقْرَأَهُ عَلَى النَّاسِ عَلَىٰ مُكْثٍ وَنَزَّلْنَاهُ تَنزِيلًا
और क़ुरान को हमने थोड़ा थोड़ा करके इसलिए नाज़िल किया कि तुम लोगों के सामने (ज़रुरत पड़ने पर) मोहलत दे देकर उसको पढ़ दिया करो
107قُلْ آمِنُوا بِهِ أَوْ لَا تُؤْمِنُوا ۚ إِنَّ الَّذِينَ أُوتُوا الْعِلْمَ مِن قَبْلِهِ إِذَا يُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ يَخِرُّونَ لِلْأَذْقَانِ سُجَّدًا
और (इसी वजह से) हमने उसको रफ्ता रफ्ता नाज़िल किया तुम कह दो कि ख्वाह तुम इस पर ईमान लाओ या न लाओ इसमें शक़ नहीं कि जिन लोगों को उसके क़ब्ल ही (आसमानी किताबों का इल्म अता किया गया है उनके सामने जब ये पढ़ा जाता है तो ठुडडियों से (मुँह के बल) सजदे में गिर पड़तें हैं
108وَيَقُولُونَ سُبْحَانَ رَبِّنَا إِن كَانَ وَعْدُ رَبِّنَا لَمَفْعُولًا
और कहते हैं कि हमारा परवरदिगार (हर ऐब से) पाक व पाकीज़ा है बेशक हमारे परवरदिगार का वायदा पूरा होना ज़रुरी था
109وَيَخِرُّونَ لِلْأَذْقَانِ يَبْكُونَ وَيَزِيدُهُمْ خُشُوعًا ۩
और ये लोग (सजदे के लिए) मुँह के बल गिर पड़तें हैं और रोते चले जाते हैं और ये क़ुरान उन की ख़ाकसारी के बढ़ाता जाता है (109) (सजदा)
अल-इसराकुरान सूची
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107आयत

अनुवाद — अल-इसरा 107

सूरा अल-इसरा आयत 107 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (इसी वजह से) हमने उसको रफ्ता रफ्ता नाज़िल किया…

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Tuesday, August 18, 2026

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