अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَعْرَضَ: मुँह फेर लिया, टाल गया
- وَنَأَى بِجَانِبِهِ: अपनी तरफ़ से दूर हो गया, अकड़कर किनारे हट गया
- مَسَّهُ الشَّرُّ: उसे कोई कष्ट, बीमारी या तंगी पहुँची
- يَئُوسًا: बहुत अधिक निराश, रहमत से मायूस हो जाने वाला
तफ़सीर:
जब हम इंसान पर अपनी नेमतें नाज़िल करते हैं — जैसे माल, सेहत, ताकत, और आराम — तो वह हमारी तरफ़ से मुँह फेर लेता है और शुक्र अदा करने के बजाय अकड़कर किनारे हो जाता है। वह अपने रब की इबादत और ताअत से दूर भागता है, गोया उसे कोई ज़रूरत ही नहीं और वह अपने आप में मुख़्तार है। उसका यह रवैया अहंकार और घमंड से भरा होता है।
और जब उसे कोई मुसीबत छू जाती है — जैसे ग़रीबी, बीमारी, या कोई दुख — तो वह अल्लाह की रहमत से पूरी तरह निराश और मायूस हो जाता है। उसे यक़ीन ही नहीं रहता कि अल्लाह उसकी मुसीबत दूर कर सकता है। वह दोनों हालात में ग़लत रवैया अपनाता है — नेमत पर शुक्र नहीं करता और मुसीबत में सब्र नहीं करता।
हालाँकि, जिसे अल्लाह ने हिदायत दी हो और उसके दिल को सच्चे ईमान से मज़बूत किया हो, वह दोनों हालात में रास्ते पर क़ायम रहता है — नेमत पर शुक्र करता है और मुसीबत में सब्र और उम्मीद रखता है। वह जानता है कि अल्लाह की रहमत से कभी निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि अल्लाह हर मुसीबत को दूर करने पर क़ादिर है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान की फ़ितरत कमज़ोर है, लेकिन ईमान उसे संतुलन देता है। हमें चाहिए कि हर हाल में अल्लाह से जुड़े रहें — खुशी में शुक्र करें और ग़म में सब्र। अल्लाह की रहमत से मायूस होना बड़ा गुनाह है, क्योंकि अल्लाह तआला बेहद रहम करने वाला है। जो लोग अल्लाह पर भरोसा रखते हैं, उनके लिए हर मुसीबत में राहत का रास्ता होता है। आओ हम अपने रब के साथ अपने रिश्ते को मज़बूत करें और हर हाल में उसकी रहमत के तलबगार रहें।
📜 आयत 81-85 — अल-इसरा
अनुवाद — अल-इसरा 83
सूरा अल-इसरा आयत 83 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जब हमने आदमी को नेअमत अता फरमाई तो (उल्टे)…सूरा आयत 83/111 — अल-इसरा الإسراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इसरा सुनें, अल-इसरा अनुवाद, अल-इसरा mp3, अल-इसरा pdf. आयत 81–85. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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