अल-इसरा · 84/111
अनुवाद उच्चारण — अल-इसरा
قُلْ كُلٌّ يَعْمَلُ عَلَىٰ شَاكِلَتِهِ فَرَبُّكُمْ أَعْلَمُ بِمَنْ هُوَ أَهْدَىٰ سَبِيلًا ۝٨٤
Qul kulluny ya`malu `alaa shaakilatihee fa rabbukum a`lamu biman huwa ahdaa sabeelaa
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि हर (एक अपने तरीक़े पर कारगुज़ारी करता है फिर तुम में से जो शख़्श बिल्कुल ठीक सीधी राह पर है तुम्हारा परवरदिगार (उससे) खूब वाक़िफ है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • شَاكِلَتِهِ (शाकिलतिही): उसकी अपनी विधि, ढंग, प्रवृत्ति या राह।
  • أَهْدَى سَبِيلًا (अहदा सबीलन): सबसे सीधी और स्पष्ट राह वाला, मार्गदर्शन में सबसे अग्रणी।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप लोगों से कह दीजिए कि हर इंसान अपनी अपनी प्रवृत्ति, अपने स्वभाव और अपने ढंग पर काम करता है। कोई अपनी अच्छी फितरत और नेक इरादों के कारण सीधी राह पर चलता है, तो कोई अपनी बुरी आदतों और गलत सोच के कारण गुमराही की राह अपनाता है। हर शख्स अपने अंदर की सोच, अपने इरादे और अपने मिजाज के मुताबिक अमल करता है—जिसका दिल साफ होता है वह अच्छे काम करता है, और जिसका दिल खराब होता है वह बुरे कामों में लगा रहता है।

फिर आप उन्हें बता दें कि तुम्हारा रब (पालनहार) सबसे बेहतर जानता है कि कौन सीधी और सच्ची राह पर है। वह हर इंसान के दिल का हाल जानता है, उसकी नीयत से वाकिफ है, और उसके अंजाम को भली-भांति समझता है। जो हिदायत (मार्गदर्शन) की राह पर चलता है, अल्लाह उसे जानता है और उसे अच्छा बदला देगा; और जो गुमराही में भटका है, वह भी अल्लाह से छिपा नहीं है।

यह आयत हमें सिखाती है कि हर इंसान अपने कर्मों का जिम्मेदार है। हमें अपनी प्रवृत्ति को अच्छा बनाना चाहिए, अपने दिल को साफ रखना चाहिए, और अपने अमल को नेक बनाना चाहिए। अल्लाह तआला किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि हर इंसान को उसकी नीयत और कर्मों के अनुसार बदला देता है। यह हमारे लिए एक बड़ी खुशखबरी है कि अगर हम सच्चे दिल से सीधी राह पर चलने की कोशिश करें, तो अल्लाह हमें जानता है और हमारी मदद करता है। और अगर कोई गलती से भटक जाए, तो उसे चाहिए कि वह अल्लाह की ओर लौटे, क्योंकि अल्लाह तो सब कुछ जानने वाला और बड़ा क्षमाशील है।

🎧 सुनें

📜 आयत 82-86 — अल-इसरा

82وَنُنَزِّلُ مِنَ الْقُرْآنِ مَا هُوَ شِفَاءٌ وَرَحْمَةٌ لِّلْمُؤْمِنِينَ ۙ وَلَا يَزِيدُ الظَّالِمِينَ إِلَّا خَسَارًا
और हम तो क़ुरान में वही चीज़ नाज़िल करते हैं जो मोमिनों के लिए (सरासर) शिफा और रहमत है (मगर) नाफरमानों को तो घाटे के सिवा कुछ बढ़ाता ही नहीं
83وَإِذَا أَنْعَمْنَا عَلَى الْإِنسَانِ أَعْرَضَ وَنَأَىٰ بِجَانِبِهِ ۖ وَإِذَا مَسَّهُ الشَّرُّ كَانَ يَئُوسًا
और जब हमने आदमी को नेअमत अता फरमाई तो (उल्टे) उसने (हमसे) मुँह फेरा और पहलू बचाने लगा और जब उसे कोई तकलीफ छू भी गई तो मायूस हो बैठा
84قُلْ كُلٌّ يَعْمَلُ عَلَىٰ شَاكِلَتِهِ فَرَبُّكُمْ أَعْلَمُ بِمَنْ هُوَ أَهْدَىٰ سَبِيلًا
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि हर (एक अपने तरीक़े पर कारगुज़ारी करता है फिर तुम में से जो शख़्श बिल्कुल ठीक सीधी राह पर है तुम्हारा परवरदिगार (उससे) खूब वाक़िफ है
85وَيَسْأَلُونَكَ عَنِ الرُّوحِ ۖ قُلِ الرُّوحُ مِنْ أَمْرِ رَبِّي وَمَا أُوتِيتُم مِّنَ الْعِلْمِ إِلَّا قَلِيلًا
और (ऐ रसूल) तुमसे लोग रुह के बारे में सवाल करते हैं तुम (उनके जवाब में) कह दो कि रूह (भी) मेरे परदिगार के हुक्म से (पैदा हुईहै) और तुमको बहुत थोड़ा सा इल्म दिया गया है
86وَلَئِن شِئْنَا لَنَذْهَبَنَّ بِالَّذِي أَوْحَيْنَا إِلَيْكَ ثُمَّ لَا تَجِدُ لَكَ بِهِ عَلَيْنَا وَكِيلًا
(इसकी हक़ीकत नहीं समझ सकते) और (ऐ रसूल) अगर हम चाहे तो जो (क़ुरान) हमने तुम्हारे पास 'वही' के ज़रिए भेजा है (दुनिया से) उठा ले जाएँ फिर तुम अपने वास्ते हमारे मुक़ाबले में कोई मददगार न पाओगे
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अनुवाद — अल-इसरा 84

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Tuesday, August 18, 2026

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