अनुवाद — Tafsir
ये हैं हमारी क़ौम के लोग जिन्होंने अल्लाह को छोड़कर दूसरे माबूद (पूज्य) बना लिए हैं। वे अपनी इन पूज्य वस्तुओं पर कोई स्पष्ट दलील और प्रमाण क्यों नहीं लाते? अल्लाह पर झूठ बोलने और उसके साथ साझीदार ठहराने से बढ़कर ज़ालिम और कोई नहीं हो सकता।
इस आयत में उन नौजवानों (अहले-कहफ) का ज़िक्र है जिन्होंने अपनी क़ौम के सामने सच्चाई पेश की। उन्होंने देखा कि उनकी क़ौम बिना किसी प्रमाण के मूर्तियों की पूजा कर रही है। उन्होंने साफ़ कहा कि अगर इन मूर्तियों की पूजा सच्ची होती तो उनके पास कोई ठोस सबूत होता। लेकिन उनके पास कोई दलील नहीं, सिर्फ अंधी परंपरा और पूर्वजों की नकल है।
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई की पहचान के लिए दलील और प्रमाण ज़रूरी है, सिर्फ रिवायत या अंधी परंपरा पर चलना सही नहीं। जो लोग बिना ज्ञान के अल्लाह के बारे में झूठी बातें कहते हैं या उसके साथ किसी को साझीदार ठहराते हैं, वे सबसे बड़े ज़ालिम हैं।
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपने ईमान और अक़ीदे को दलील और ज्ञान की बुनियाद पर खड़ा करना चाहिए। अल्लाह ने हमें अक्ल और समझ दी है ताकि हम सच्चाई को पहचानें। जो लोग सच्चाई को जानकर भी उस पर अमल नहीं करते, वे खुद पर ज़ुल्म करते हैं। लेकिन जो लोग सच्चाई की तलाश में निकलते हैं, अल्लाह उन्हें हिदायत देता है और उनके दिलों को सुकून अता करता है, जैसा कि उन नौजवानों को मिला जिन्होंने अपने रब पर भरोसा किया और उनकी हिफाज़त की गई।
📜 आयत 13-17 — अल-कहफ
अनुवाद — अल-कहफ 15
सूरा अल-कहफ आयत 15 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अगर हम ऐसा करे तो यक़ीनन हमने अक़ल से दूर…सूरा आयत 15/110 — अल-कहफ الكهف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-कहफ सुनें, अल-कहफ अनुवाद, अल-कहफ mp3, अल-कहफ pdf. आयत 13–17. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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