अल-कहफ · 14/110
अनुवाद उच्चारण — अल-कहफ
وَرَبَطْنَا عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ إِذْ قَامُوا فَقَالُوا رَبُّنَا رَبُّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ لَن نَّدْعُوَ مِن دُونِهِ إِلَٰهًا ۖ لَّقَدْ قُلْنَا إِذًا شَطَطًا ۝١٤
Wa rabatnaa `alaa quloo bihim iz qaamoo faqaaloo Rabbunaa Rabbus samaawaati wal ardi lan nad`uwa min dooniheee ilaahal laqad qulnaaa izan shatataa
📖 हिंदी अर्थ
और हमने उनकी दिलों पर (सब्र व इस्तेक़लाल की) गिराह लगा दी (कि जब दक़ियानूस बादशाह ने कुफ्र पर मजबूर किया) तो उठ खड़े हुए (और बे ताम्मुल (खटके)) कहने लगे हमारा परवरदिगार तो बस सारे आसमान व ज़मीन का मालिक है हम तो उसके सिवा किसी माबूद की हरगिज़ इबादत न करेगें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • رَبَطْنَا عَلَى قُلُوبِهِمْ: हमने उनके दिलों को मज़बूत किया, उन्हें स्थिरता और साहस प्रदान किया।
  • شَطَطًا: अत्यधिक अन्याय, सत्य से दूर जाने वाली बात, हद से बढ़कर ग़लत कथन।

तफ़सीर:

जब अल्लाह तआला ने इन नौजवानों (अहले-कहफ) के दिलों को ईमान की रोशनी से रोशन किया और उन्हें सत्य पर स्थिर रहने की ताक़त दी, तो वे उस ज़ालिम बादशाह के सामने खड़े हुए, जो उन्हें मूर्तियों की पूजा करने और अल्लाह के सिवा दूसरों को सजदा करने पर मजबूर कर रहा था। उस वक़्त उन्होंने बड़ी बहादुरी और स्पष्टता के साथ अपना ईमानी मौक़िफ़ बयान किया और कहा: "हमारा रब वही है जो आसमानों और ज़मीन का पालनहार है। हम उसके सिवा किसी और को माबूद नहीं मानेंगे, न ही किसी और से दुआ करेंगे। अगर हम ऐसा करें (यानी उसके सिवा किसी और की इबादत करें) तो यह बड़ी ज़्यादती और सच्चाई से भटकी हुई बात होगी।"

अल्लाह ने उनके दिलों को इस क़दर मज़बूत किया कि उन्होंने न तो किसी के डर से अपना ईमान छिपाया और न ही किसी लालच में आकर सच्चाई को छोड़ा। उन्होंने साफ़ और दो टूक अंदाज़ में हक़ बोला, भले ही उन्हें अपनी जान, माल और वतन छोड़ना पड़ा। यही वजह है कि अल्लाह ने उन्हें अपनी ख़ास मदद से नवाज़ा और उनके दिलों में ऐसा सुकून और इत्मीनान पैदा किया कि वे हर मुश्किल का सामना कर सके।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि जब बंदा सच्चे दिल से अल्लाह पर भरोसा करता है और हक़ बोलने में कोई कसर नहीं छोड़ता, तो अल्लाह उसके दिल को मज़बूत कर देता है और उसे वह ताक़त देता है जो दुनिया की तमाम ताक़तों से बढ़कर होती है। यह ईमान की आज़माइश का लम्हा था, और इन नौजवानों ने इसे कामयाबी से पार किया। आज भी जब कोई मुसलमान सच्चाई पर क़ायम रहता है और अल्लाह के सिवा किसी से नहीं डरता, तो अल्लाह उसके दिल में वही नूर और क़ुव्वत डालता है जो उसने अहले-कहफ को दी थी।

याद रखिए, सच्चाई पर स्थिर रहना और अल्लाह के सिवा किसी और की इबादत से इनकार करना ही वह रास्ता है जो इंसान को इज़्ज़त और कामयाबी तक पहुँचाता है। अल्लाह अपने सच्चे बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता, चाहे हालात कितने ही मुश्किल क्यों न हों।

🎧 सुनें

📜 आयत 12-16 — अल-कहफ

12ثُمَّ بَعَثْنَاهُمْ لِنَعْلَمَ أَيُّ الْحِزْبَيْنِ أَحْصَىٰ لِمَا لَبِثُوا أَمَدًا
फिर हमने उन्हें चौकाया ताकि हम देखें कि दो गिरोहों में से किसी को (ग़ार में) ठहरने की मुद्दत खूब याद है
13نَّحْنُ نَقُصُّ عَلَيْكَ نَبَأَهُم بِالْحَقِّ ۚ إِنَّهُمْ فِتْيَةٌ آمَنُوا بِرَبِّهِمْ وَزِدْنَاهُمْ هُدًى
(ऐ रसूल) अब हम उनका हाल तुमसे बिल्कुल ठीक तहक़ीक़ातन (यक़ीन के साथ) बयान करते हैं वह चन्द जवान थे कि अपने (सच्चे) परवरदिगार पर ईमान लाए थे और हम ने उनकी सोच समझ और ज्यादा कर दी है
14وَرَبَطْنَا عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ إِذْ قَامُوا فَقَالُوا رَبُّنَا رَبُّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ لَن نَّدْعُوَ مِن دُونِهِ إِلَٰهًا ۖ لَّقَدْ قُلْنَا إِذًا شَطَطًا
और हमने उनकी दिलों पर (सब्र व इस्तेक़लाल की) गिराह लगा दी (कि जब दक़ियानूस बादशाह ने कुफ्र पर मजबूर किया) तो उठ खड़े हुए (और बे ताम्मुल (खटके)) कहने लगे हमारा परवरदिगार तो बस सारे आसमान व ज़मीन का मालिक है हम तो उसके सिवा किसी माबूद की हरगिज़ इबादत न करेगें
15هَٰؤُلَاءِ قَوْمُنَا اتَّخَذُوا مِن دُونِهِ آلِهَةً ۖ لَّوْلَا يَأْتُونَ عَلَيْهِم بِسُلْطَانٍ بَيِّنٍ ۖ فَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّنِ افْتَرَىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا
अगर हम ऐसा करे तो यक़ीनन हमने अक़ल से दूर की बात कही (अफसोस एक) ये हमारी क़ौम के लोग हैं कि जिन्होनें ख़ुदा को छोड़कर (दूसरे) माबूद बनाए हैं (फिर) ये लोग उनके (माबूद होने) की कोई सरीही (खुली) दलील क्यों नहीं पेश करते और जो शख़्श ख़ुदा पर झूट बोहतान बाँधे उससे ज्यादा ज़ालिम और कौन होगा
16وَإِذِ اعْتَزَلْتُمُوهُمْ وَمَا يَعْبُدُونَ إِلَّا اللَّهَ فَأْوُوا إِلَى الْكَهْفِ يَنشُرْ لَكُمْ رَبُّكُم مِّن رَّحْمَتِهِ وَيُهَيِّئْ لَكُم مِّنْ أَمْرِكُم مِّرْفَقًا
(फिर बाहम कहने लगे कि) जब तुमने उन लोगों से और ख़ुदा के सिवा जिन माबूदों की ये लोग परसतिश करते हैं उनसे किनारा कशी करली तो चलो (फलॉ) ग़ार में जा बैठो और तुम्हारा परवरदिगार अपनी रहमत तुम पर वसीह कर देगा और तुम्हारा काम में तुम्हारे लिए आसानी के सामान मुहय्या करेगा
अल-कहफकुरान सूची
110आयत
मक्कीRevelation
14आयत

अनुवाद — अल-कहफ 14

सूरा अल-कहफ आयत 14 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने उनकी दिलों पर (सब्र व इस्तेक़लाल की) गिराह…

सूरा आयत 14/110 — अल-कहफ الكهف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-कहफ सुनें, अल-कहफ अनुवाद, अल-कहफ mp3, अल-कहफ pdf. आयत 12–16. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए