अल-कहफ · 52/110
अनुवाद उच्चारण — अल-कहफ
وَيَوْمَ يَقُولُ نَادُوا شُرَكَائِيَ الَّذِينَ زَعَمْتُمْ فَدَعَوْهُمْ فَلَمْ يَسْتَجِيبُوا لَهُمْ وَجَعَلْنَا بَيْنَهُم مَّوْبِقًا ۝٥٢
Wa Yawma yaqoolu naadoo shurakaaa`i yal lazeena za`amtum fada`awhum falam yastajeeboo lahum wa ja`alnaa bainahum maw biqaa
📖 हिंदी अर्थ
और (उस दिन से डरो) जिस दिन ख़ुदा फरमाएगा कि अब तुम जिन लोगों को मेरा शरीक़ ख्याल करते थे उनको (मदद के लिए) पुकारो तो वह लोग उनको पुकारेगें मगर वह लोग उनकी कुछ न सुनेगें और हम उन दोनों के बीच में महलक (खतरनाक) आड़ बना देंगे
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • شُرَكَائِيَ (मेरे साझीदार): अल्लाह के साथ साझीदार ठहराए गए वे लोग या चीज़ें, जिन्हें मुश्किलें दूर करने वाला और सहायक माना जाता था।
  • زَعَمْتُمْ (तुमने दावा किया): तुमने ग़लत धारणा बनाई और झूठा दावा किया।
  • مَوْبِقًا (विनाश का स्थान): ऐसी जगह जहाँ सब एक साथ हलाक हों, यानी जहन्नुम की आग।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! उस दिन को याद दिलाइए जब अल्लाह तआला मुशरिकों (बहुदेववादियों) से कहेगा: “पुकारो उन्हें जिन्हें तुम मेरा साझीदार मानते थे, जिनके बारे में तुम्हारा दावा था कि वे तुम्हारी मदद करेंगे और तुम्हारे लिए सिफ़ारिश करेंगे।” चुनाँचे वे अपने माबूदों (देवताओं) को पुकारेंगे, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिलेगा, न कोई मदद पहुँचेगी। उनके पुकारने का कोई असर नहीं होगा, क्योंकि वे माबूद न तो सुन सकते हैं, न बोल सकते हैं, न किसी की भलाई कर सकते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हमने उन इबादत करने वालों और उन माबूदों के बीच एक ऐसा गड्ढा (जहन्नुम) बना दिया है जो उन सबको एक साथ हलाक कर देगा। वहाँ सब एक जैसे अज़ाब में मुब्तिला होंगे — न पुकारने वाला किसी को बचा सकेगा, न पुकारा जाने वाला किसी के काम आएगा।

यह वह दिन होगा जब हर झूठा दावा बेनक़ाब हो जाएगा, और हर इंसान पर साफ़ हो जाएगा कि अल्लाह के सिवा कोई मददगार, कोई सिफ़ारिशी, कोई पनाह देने वाला नहीं। जिन्होंने दुनिया में अल्लाह के सिवा किसी और को पुकारा, उन्हें आज अपनी ग़लती का एहसास होगा, लेकिन वह एहसास किसी काम का नहीं होगा।


दावती पहलू (नसीहत):

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह के सिवा किसी और से उम्मीदें बाँधना और उसे पुकारना कितना बड़ा नुक़सान है। आज हम जिन चीज़ों, लोगों या रुत्बों पर भरोसा करते हैं — चाहे वे दौलत हों, औलाद हों, या कोई और — क़यामत के दिन उनमें से कोई भी हमारे काम नहीं आएगा। सिर्फ़ अल्लाह की रहमत और उसकी मग़फ़िरत ही हमें बचा सकती है। इसलिए हमें चाहिए कि अपनी ज़िंदगी में सिर्फ़ अल्लाह ही को पुकारें, सिर्फ़ उसी से मदद माँगें, और अपने दिल को उसी की मुहब्बत से जोड़ें। यही वह रास्ता है जो हमें उस दिन की रुसवाई से बचा सकता है और जन्नत की तरफ़ ले जा सकता है। अल्लाह तआला हम सबको सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 50-54 — अल-कहफ

50وَإِذْ قُلْنَا لِلْمَلَائِكَةِ اسْجُدُوا لِآدَمَ فَسَجَدُوا إِلَّا إِبْلِيسَ كَانَ مِنَ الْجِنِّ فَفَسَقَ عَنْ أَمْرِ رَبِّهِ ۗ أَفَتَتَّخِذُونَهُ وَذُرِّيَّتَهُ أَوْلِيَاءَ مِن دُونِي وَهُمْ لَكُمْ عَدُوٌّ ۚ بِئْسَ لِلظَّالِمِينَ بَدَلًا
और (वह वक्त याद करो) जब हमने फ़रिश्तों को हुक्म दिया कि आदम को सजदा करो तो इबलीस के सिवा सबने सजदा किया (ये इबलीस) जिन्नात से था तो अपने परवरदिगार के हुक्म से निकल भागा तो (लोगों) क्या मुझे छोड़कर उसको और उसकी औलाद को अपना दोस्त बनाते हो हालॉकि वह तुम्हारा (क़दीमी) दुश्मन हैं ज़ालिमों (ने ख़ुदा के बदले शैतान को अपना दोस्त बनाया ये उन) का क्या बुरा ऐवज़ है
51۞ مَّا أَشْهَدتُّهُمْ خَلْقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَلَا خَلْقَ أَنفُسِهِمْ وَمَا كُنتُ مُتَّخِذَ الْمُضِلِّينَ عَضُدًا
मैने न तो आसमान व ज़मीन के पैदा करने के वक्त उनको (मदद के लिए) बुलाया था और न खुद उनके पैदा करने के वक्त अौर मै (ऐसा गया गुज़रा) न था कि मै गुमराह करने वालों को मददगार बनाता
52وَيَوْمَ يَقُولُ نَادُوا شُرَكَائِيَ الَّذِينَ زَعَمْتُمْ فَدَعَوْهُمْ فَلَمْ يَسْتَجِيبُوا لَهُمْ وَجَعَلْنَا بَيْنَهُم مَّوْبِقًا
और (उस दिन से डरो) जिस दिन ख़ुदा फरमाएगा कि अब तुम जिन लोगों को मेरा शरीक़ ख्याल करते थे उनको (मदद के लिए) पुकारो तो वह लोग उनको पुकारेगें मगर वह लोग उनकी कुछ न सुनेगें और हम उन दोनों के बीच में महलक (खतरनाक) आड़ बना देंगे
53وَرَأَى الْمُجْرِمُونَ النَّارَ فَظَنُّوا أَنَّهُم مُّوَاقِعُوهَا وَلَمْ يَجِدُوا عَنْهَا مَصْرِفًا
और गुनेहगार लोग (देखकर समझ जाएँगें कि ये इसमें सोके जाएँगे और उससे गरीज़ (बचने की) की राह न पाएँगें
54وَلَقَدْ صَرَّفْنَا فِي هَٰذَا الْقُرْآنِ لِلنَّاسِ مِن كُلِّ مَثَلٍ ۚ وَكَانَ الْإِنسَانُ أَكْثَرَ شَيْءٍ جَدَلًا
और हमने तो इस क़ुरान में लोगों (के समझाने) के वास्ते हर तरह की मिसालें फेर बदल कर बयान कर दी है मगर इन्सान तो तमाम मख़लूक़ात से ज्यादा झगड़ालू है
अल-कहफकुरान सूची
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अनुवाद — अल-कहफ 52

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Tuesday, August 18, 2026

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