Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- شُرَكَائِيَ (मेरे साझीदार): अल्लाह के साथ साझीदार ठहराए गए वे लोग या चीज़ें, जिन्हें मुश्किलें दूर करने वाला और सहायक माना जाता था।
- زَعَمْتُمْ (तुमने दावा किया): तुमने ग़लत धारणा बनाई और झूठा दावा किया।
- مَوْبِقًا (विनाश का स्थान): ऐसी जगह जहाँ सब एक साथ हलाक हों, यानी जहन्नुम की आग।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! उस दिन को याद दिलाइए जब अल्लाह तआला मुशरिकों (बहुदेववादियों) से कहेगा: “पुकारो उन्हें जिन्हें तुम मेरा साझीदार मानते थे, जिनके बारे में तुम्हारा दावा था कि वे तुम्हारी मदद करेंगे और तुम्हारे लिए सिफ़ारिश करेंगे।” चुनाँचे वे अपने माबूदों (देवताओं) को पुकारेंगे, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिलेगा, न कोई मदद पहुँचेगी। उनके पुकारने का कोई असर नहीं होगा, क्योंकि वे माबूद न तो सुन सकते हैं, न बोल सकते हैं, न किसी की भलाई कर सकते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हमने उन इबादत करने वालों और उन माबूदों के बीच एक ऐसा गड्ढा (जहन्नुम) बना दिया है जो उन सबको एक साथ हलाक कर देगा। वहाँ सब एक जैसे अज़ाब में मुब्तिला होंगे — न पुकारने वाला किसी को बचा सकेगा, न पुकारा जाने वाला किसी के काम आएगा।
यह वह दिन होगा जब हर झूठा दावा बेनक़ाब हो जाएगा, और हर इंसान पर साफ़ हो जाएगा कि अल्लाह के सिवा कोई मददगार, कोई सिफ़ारिशी, कोई पनाह देने वाला नहीं। जिन्होंने दुनिया में अल्लाह के सिवा किसी और को पुकारा, उन्हें आज अपनी ग़लती का एहसास होगा, लेकिन वह एहसास किसी काम का नहीं होगा।
दावती पहलू (नसीहत):
यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह के सिवा किसी और से उम्मीदें बाँधना और उसे पुकारना कितना बड़ा नुक़सान है। आज हम जिन चीज़ों, लोगों या रुत्बों पर भरोसा करते हैं — चाहे वे दौलत हों, औलाद हों, या कोई और — क़यामत के दिन उनमें से कोई भी हमारे काम नहीं आएगा। सिर्फ़ अल्लाह की रहमत और उसकी मग़फ़िरत ही हमें बचा सकती है। इसलिए हमें चाहिए कि अपनी ज़िंदगी में सिर्फ़ अल्लाह ही को पुकारें, सिर्फ़ उसी से मदद माँगें, और अपने दिल को उसी की मुहब्बत से जोड़ें। यही वह रास्ता है जो हमें उस दिन की रुसवाई से बचा सकता है और जन्नत की तरफ़ ले जा सकता है। अल्लाह तआला हम सबको सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 50-54 — सूरा अल-कहफ
अनुवाद — अल-कहफ 52
सूरा अल-कहफ आयत 52 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (उस दिन से डरो) जिस दिन ख़ुदा फरमाएगा कि…सूरा आयत 52/110 — सूरा अल-कहफ الكهف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-कहफ सुनें, सूरा अल-कहफ अनुवाद, सूरा अल-कहफ mp3, सूरा अल-कहफ pdf. आयत 50–54. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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