अल-कहफ · 58/110
अनुवाद उच्चारण — अल-कहफ
وَرَبُّكَ الْغَفُورُ ذُو الرَّحْمَةِ ۖ لَوْ يُؤَاخِذُهُم بِمَا كَسَبُوا لَعَجَّلَ لَهُمُ الْعَذَابَ ۚ بَل لَّهُم مَّوْعِدٌ لَّن يَجِدُوا مِن دُونِهِ مَوْئِلًا ۝٥٨
Wa Rabbukal Ghafooru zur rahmati law yu`aakhi zuhum bimaa kasaboo la`ajala lahumul `azaab; bal lahum maw`idul lany yajidoo min doonihee maw`ilaa
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) तुम्हारा परवरदिगार तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है अगर उनकी करतूतों की सज़ा में धर पकड़ करता तो फौरन (दुनिया ही में) उन पर अज़ाब नाज़िल कर देता मगर उनके लिए तो एक मियाद (मुक़र्रर) है जिससे खुदा के सिवा कहीें पनाह की जगह न पाएंगें
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْغَفُورُ: अत्यंत क्षमाशील, गुनाहों को माफ करने वाला।
  • ذُو الرَّحْمَةِ: रहमत (दया) का मालिक, जिसकी दया हर चीज़ को घेरे हुए है।
  • يُؤَاخِذُهُم: उन्हें पकड़े, उनसे हिसाब ले।
  • لَعَجَّلَ: जल्दी कर देता।
  • مَوْعِدٌ: एक निश्चित समय, वादे का दिन।
  • مَوْئِلًا: पनाह की जगह, बचने का ठिकाना, सहारा।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आपका रब बड़ा क्षमाशील है और उसकी रहमत (दया) असीम है। वह अपने बंदों के गुनाहों को माफ करने वाला है, खासकर उन लोगों के लिए जो तौबा करके उसकी ओर लौट आते हैं। उसकी दया का यह आलम है कि वह गुनाहगारों पर भी रहम करता है और उन्हें मौका देता है कि वे सुधर जाएं।

अगर अल्लाह तआला इन काफिरों और मुन्किरों को उनके किए हुए गुनाहों की सज़ा तुरंत देता, तो इसी दुनिया में उन पर अज़ाब नाज़िल कर देता। लेकिन वह हलीम (बुर्दबार) है, जल्दबाज़ी नहीं करता। वह चाहता है कि लोग तौबा करें और उसकी रहमत की तरफ लौटें। यही उसकी रहमत है कि वह सज़ा में देरी करता है।

हालांकि, इसका यह मतलब नहीं कि वे बच जाएंगे। नहीं! उनके लिए एक निश्चित समय और एक वादे का दिन मुकर्रर है—वह क़यामत का दिन। उस दिन उन्हें उनके आमाल का पूरा बदला दिया जाएगा। उस दिन वे कहीं भागकर नहीं जा सकेंगे, न ही उन्हें अल्लाह के सिवा कोई पनाह की जगह मिलेगी। न कोई सहारा होगा, न कोई बचाव का रास्ता।

यह आयत हमें अल्लाह की दो सिफ़ात (गुणों) की याद दिलाती है—मग़फिरत (क्षमा) और रहमत (दया)। अल्लाह चाहता है कि उसके बंदे उसकी रहमत से निराश न हों और हमेशा तौबा की राह अपनाएं। साथ ही, यह भी सिखाती है कि अल्लाह की सज़ा से डरना चाहिए, क्योंकि उसका वादा सच्चा है और उस दिन कोई बचाव नहीं होगा।

तो ऐ बंदे! अपने रब की रहमत से उम्मीद रख, लेकिन उसके अज़ाब से भी डर। तौबा कर, अपने गुनाहों से बाज़ आ, और अल्लाह की रहमत की तरफ दौड़। वह माफ करने वाला है, मगर याद रख—उसका वादा भी सच्चा है, और उस दिन कोई पनाह नहीं मिलेगी।

🎧 सुनें

📜 आयत 56-60 — अल-कहफ

56وَمَا نُرْسِلُ الْمُرْسَلِينَ إِلَّا مُبَشِّرِينَ وَمُنذِرِينَ ۚ وَيُجَادِلُ الَّذِينَ كَفَرُوا بِالْبَاطِلِ لِيُدْحِضُوا بِهِ الْحَقَّ ۖ وَاتَّخَذُوا آيَاتِي وَمَا أُنذِرُوا هُزُوًا
और हम तो पैग़म्बरों को सिर्फ इसलिए भेजते हैं कि (अच्छों को निजात की) खुशख़बरी सुनाएंऔर (बदों को अज़ाब से) डराएंऔर जो लोग काफिर हैं झूटी झूटी बातों का सहारा पकड़ के झगड़ा करते है ताकि उसकी बदौलत हक़ को (उसकी जगह से उखाड़ फेकें और उन लोगों ने मेरी आयतों को जिस (अज़ाब से) ये लोग डराए गए हॅसी ठ्ठ्ठा (मज़ाक) बना रखा है
57وَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّن ذُكِّرَ بِآيَاتِ رَبِّهِ فَأَعْرَضَ عَنْهَا وَنَسِيَ مَا قَدَّمَتْ يَدَاهُ ۚ إِنَّا جَعَلْنَا عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ أَكِنَّةً أَن يَفْقَهُوهُ وَفِي آذَانِهِمْ وَقْرًا ۖ وَإِن تَدْعُهُمْ إِلَى الْهُدَىٰ فَلَن يَهْتَدُوا إِذًا أَبَدًا
और उससे बढ़कर और कौन ज़ालिम होगा जिसको ख़ुदा की आयतें याद दिलाई जाए और वह उनसे रद गिरदानी (मुँह फेर ले) करे और अपने पहले करतूतों को जो उसके हाथों ने किए हैं भूल बैठे (गोया) हमने खुद उनके दिलों पर परदे डाल दिए हैं कि वह (हक़ बात को) न समझ सकें और (गोया) उनके कानों में गिरानी पैदा कर दी है कि (सुन न सकें) और अगर तुम उनको राहे रास्त की तरफ़ बुलाओ भी तो ये हरगिज़ कभी रुबरु होने वाले नहीं हैं
58وَرَبُّكَ الْغَفُورُ ذُو الرَّحْمَةِ ۖ لَوْ يُؤَاخِذُهُم بِمَا كَسَبُوا لَعَجَّلَ لَهُمُ الْعَذَابَ ۚ بَل لَّهُم مَّوْعِدٌ لَّن يَجِدُوا مِن دُونِهِ مَوْئِلًا
और (ऐ रसूल) तुम्हारा परवरदिगार तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है अगर उनकी करतूतों की सज़ा में धर पकड़ करता तो फौरन (दुनिया ही में) उन पर अज़ाब नाज़िल कर देता मगर उनके लिए तो एक मियाद (मुक़र्रर) है जिससे खुदा के सिवा कहीें पनाह की जगह न पाएंगें
59وَتِلْكَ الْقُرَىٰ أَهْلَكْنَاهُمْ لَمَّا ظَلَمُوا وَجَعَلْنَا لِمَهْلِكِهِم مَّوْعِدًا
और ये बस्तियाँ (जिन्हें तुम अपनी ऑंखों से देखते हो) जब उन लोगों ने सरकशी तो हमने उन्हें हलाक कर मारा और हमने उनकी हलाकत की मियाद मुक़र्रर कर दी थी
60وَإِذْ قَالَ مُوسَىٰ لِفَتَاهُ لَا أَبْرَحُ حَتَّىٰ أَبْلُغَ مَجْمَعَ الْبَحْرَيْنِ أَوْ أَمْضِيَ حُقُبًا
(ऐ रसूल) वह वाक़या याद करो जब मूसा खिज़्र की मुलाक़ात को चले तो अपने जवान वसी यूशा से बोले कि जब तक में दोनों दरियाओं के मिलने की जगह न पहुँच जाऊँ (चलने से) बाज़ न आऊँगा
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अनुवाद — अल-कहफ 58

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Tuesday, August 18, 2026

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