अल-कहफ · 59/110
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-कहफ
وَتِلْكَ الْقُرَىٰ أَهْلَكْنَاهُمْ لَمَّا ظَلَمُوا وَجَعَلْنَا لِمَهْلِكِهِم مَّوْعِدًا ۝٥٩
Wa tkal quraaa ahlak nahum lammaa zulamoo wa ja`alnaa limahlikihim maw`idaa
📖 हिंदी अर्थ
और ये बस्तियाँ (जिन्हें तुम अपनी ऑंखों से देखते हो) जब उन लोगों ने सरकशी तो हमने उन्हें हलाक कर मारा और हमने उनकी हलाकत की मियाद मुक़र्रर कर दी थी

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • तिल्कल क़ुरा – वे बस्तियाँ (जिनका उल्लेख पहले हुआ)
  • अहलकनाहुम – हमने उन्हें हलाक (विनष्ट) कर दिया
  • लम्मा ज़लमू – जब उन्होंने ज़ुल्म किया (अपने ऊपर कुफ्र और नाफ़रमानी द्वारा)
  • लिमहलिकिहिम – उनके विनाश के लिए
  • मौ'इदन – एक नियत समय (मीक़ात)

तफ़सीर (व्याख्या):

ये वे बस्तियाँ हैं जिनका ज़िक्र इस सूरह में पहले आया — जैसे आद की बस्तियाँ, समूद की बस्तियाँ, लूत की क़ौम की बस्तियाँ और शुऐब अलैहिस्सलाम की क़ौम की बस्तियाँ। ये सब बस्तियाँ तुम्हारे आस-पास ही थीं और इनके खंडहर तुम्हारे सामने मौजूद हैं। जब इन लोगों ने अपने रब के साथ कुफ्र किया, उसके रसूलों को झुठलाया और ज़ुल्म व सरकशी में हद से गुज़र गए, तो अल्लाह ने उन्हें हलाक कर दिया। यह हलाकी अचानक नहीं आई, बल्कि अल्लाह ने उनके विनाश के लिए एक नियत समय और मीक़ात मुक़र्रर कर रखा था। जब वह समय आ गया, तो अल्लाह का अज़ाब उन पर नाज़िल हुआ और उन्होंने अपने किए की सज़ा पाई।

इस आयत में अल्लाह तआला ने क़ुरैश और बाद की उम्मतों को सबक़ दिया है कि ये बस्तियाँ जो तुम्हारे सामने वीरान पड़ी हैं, वे तुमसे ज़्यादा ताक़तवर थीं, उनके पास माल और औलाद ज़्यादा थी, उनकी इमारतें ऊँची थीं, लेकिन जब उन्होंने हक़ को झुठलाया और ज़ुल्म पर अड़े रहे, तो अल्लाह की पकड़ ने उन्हें आ लिया। अल्लाह ने उन्हें मोहलत ज़रूर दी, लेकिन जब वादा पूरा होने का वक़्त आया, तो कोई चीज़ उन्हें अल्लाह के अज़ाब से नहीं बचा सकी।

यह आयत हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन वह जल्दबाज़ी नहीं करता। वह बंदों को मौका देता है, तौबा का दरवाज़ा खुला रखता है, लेकिन जब उसका फैसला आ जाता है, तो उसे कोई टाल नहीं सकता। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की नाफ़रमानी से बचें, उसके दीन पर क़ायम रहें और उसकी रहमत से कभी मायूस न हों। अल्लाह तआला अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है — वह चाहता है कि हम उसकी तरफ़ रुजू करें, तौबा करें और उसकी रहमत के साये में आ जाएँ। जो लोग उसकी तरफ़ लौटते हैं, उनके लिए जन्नत की खुशखबरी है, और जो उसकी नाफ़रमानी पर अड़े रहते हैं, उनके लिए उसी अज़ाब का डर है जो पहले की उम्मतों पर आया।



📜 आयत 57-61 — सूरा अल-कहफ

57وَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّن ذُكِّرَ بِآيَاتِ رَبِّهِ فَأَعْرَضَ عَنْهَا وَنَسِيَ مَا قَدَّمَتْ يَدَاهُ ۚ إِنَّا جَعَلْنَا عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ أَكِنَّةً أَن يَفْقَهُوهُ وَفِي آذَانِهِمْ وَقْرًا ۖ وَإِن تَدْعُهُمْ إِلَى الْهُدَىٰ فَلَن يَهْتَدُوا إِذًا أَبَدًا
और उससे बढ़कर और कौन ज़ालिम होगा जिसको ख़ुदा की आयतें याद दिलाई जाए और वह उनसे रद गिरदानी (मुँह फेर ले) करे और अपने पहले करतूतों को जो उसके हाथों ने किए हैं भूल बैठे (गोया) हमने खुद उनके दिलों पर परदे डाल दिए हैं कि वह (हक़ बात को) न समझ सकें और (गोया) उनके कानों में गिरानी पैदा कर दी है कि (सुन न सकें) और अगर तुम उनको राहे रास्त की तरफ़ बुलाओ भी तो ये हरगिज़ कभी रुबरु होने वाले नहीं हैं
58وَرَبُّكَ الْغَفُورُ ذُو الرَّحْمَةِ ۖ لَوْ يُؤَاخِذُهُم بِمَا كَسَبُوا لَعَجَّلَ لَهُمُ الْعَذَابَ ۚ بَل لَّهُم مَّوْعِدٌ لَّن يَجِدُوا مِن دُونِهِ مَوْئِلًا
और (ऐ रसूल) तुम्हारा परवरदिगार तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है अगर उनकी करतूतों की सज़ा में धर पकड़ करता तो फौरन (दुनिया ही में) उन पर अज़ाब नाज़िल कर देता मगर उनके लिए तो एक मियाद (मुक़र्रर) है जिससे खुदा के सिवा कहीें पनाह की जगह न पाएंगें
59وَتِلْكَ الْقُرَىٰ أَهْلَكْنَاهُمْ لَمَّا ظَلَمُوا وَجَعَلْنَا لِمَهْلِكِهِم مَّوْعِدًا
और ये बस्तियाँ (जिन्हें तुम अपनी ऑंखों से देखते हो) जब उन लोगों ने सरकशी तो हमने उन्हें हलाक कर मारा और हमने उनकी हलाकत की मियाद मुक़र्रर कर दी थी
60وَإِذْ قَالَ مُوسَىٰ لِفَتَاهُ لَا أَبْرَحُ حَتَّىٰ أَبْلُغَ مَجْمَعَ الْبَحْرَيْنِ أَوْ أَمْضِيَ حُقُبًا
(ऐ रसूल) वह वाक़या याद करो जब मूसा खिज़्र की मुलाक़ात को चले तो अपने जवान वसी यूशा से बोले कि जब तक में दोनों दरियाओं के मिलने की जगह न पहुँच जाऊँ (चलने से) बाज़ न आऊँगा
61فَلَمَّا بَلَغَا مَجْمَعَ بَيْنِهِمَا نَسِيَا حُوتَهُمَا فَاتَّخَذَ سَبِيلَهُ فِي الْبَحْرِ سَرَبًا
ख्वाह (अगर मुलाक़ात न हो तो) बरसों यूँ ही चलता जाऊँगा फिर जब ये दोनों उन दोनों दरियाओं के मिलने की जगह पहुँचे तो अपनी (भुनी हुई) मछली छोड़ चले तो उसने दरिया में सुरंग बनाकर अपनी राह ली
अल-कहफकुरान सूची
110आयत
मक्कीअवतरण स्थान
59आयत

अनुवाद — अल-कहफ 59

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सूरा आयत 59/110 — सूरा अल-कहफ الكهف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-कहफ सुनें, सूरा अल-कहफ अनुवाद, सूरा अल-कहफ mp3, सूरा अल-कहफ pdf. आयत 57–61. हिंदी अर्थ: اردو.





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Thursday, October 1, 2026

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