मरियम · 23/98
अनुवाद उच्चारण — मरियम
فَأَجَاءَهَا الْمَخَاضُ إِلَىٰ جِذْعِ النَّخْلَةِ قَالَتْ يَا لَيْتَنِي مِتُّ قَبْلَ هَٰذَا وَكُنتُ نَسْيًا مَّنسِيًّا ۝٢٣
Fa ajaaa `ahal makhaadu ilaa jiz`in nakhlati qaalat yaa laitanee mittu qabla haazaa wa kuntu nasyam mansiyyaa
📖 हिंदी अर्थ
फिर (जब जनने का वक्त ़क़रीब आया तो दरदे ज़ह) उन्हें एक खजूर के (सूखे) दरख्त की जड़ में ले आया और (बेकसी में शर्म से) कहने लगीं काश मैं इससे पहले मर जाती और (न पैद होकर)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَأَجَاءَهَا الْمَخَاضُ: प्रसव पीड़ा ने उन्हें विवश कर दिया और उस स्थान की ओर ले आई।
  • جِذْعِ النَّخْلَةِ: खजूर के पेड़ का तना।
  • نَسْيًا: भूला हुआ, तुच्छ और फेंका हुआ सामान।
  • مَنْسِيًّا: जिसे लोग भूल चुके हों और जिसकी ओर कोई ध्यान न देता हो।

तफ़सीर:

जब हज़रत मरियम (अलैहिस्सलाम) के लिए प्रसव का समय आया, तो प्रसव पीड़ा ने उन्हें विवश कर दिया और वह एक खजूर के पेड़ के तने के पास जा पहुँचीं। वहाँ उन्होंने उस पेड़ का सहारा लिया, क्योंकि उनके पास कोई सहायक या दाई नहीं थी जो उनकी मदद करती। यह स्थिति अत्यंत कठिन थी — वह अकेली थीं, एक निर्जन स्थान पर, और उनके सामने एक नवजात शिशु को जन्म देने का कठिन क्षण था।

इस कठिन घड़ी में, जब उन्हें अपनी स्थिति का एहसास हुआ और उन्हें डर था कि लोग उनके बारे में क्या सोचेंगे और क्या कहेंगे, तो उन्होंने दुःख और शर्म के मारे कहा: "काश! मैं इस घटना से पहले ही मर गई होती और एक ऐसी चीज़ बन गई होती जिसे लोग भूल चुके हों, जिसकी ओर कोई ध्यान न देता हो, और जिसका कोई नाम-ओ-निशान न होता।"

यह उनकी ओर से एक स्वाभाविक मानवीय प्रतिक्रिया थी — एक पाकदामन और परहेज़गार महिला का दिल टूटना, जो जानती थी कि समाज उस पर क्या इल्ज़ाम लगाएगा। वह लोगों की बुरी ज़बानों और झूठे इल्ज़ामों से बहुत डरती थीं, इसलिए उन्होंने मौत की तमन्ना की।

दावती पहलू:

इस आयत से हमें हज़रत मरियम (अलैहिस्सलाम) की पाकीज़गी और उनके ऊँचे किरदार का पता चलता है। वह एक ऐसी महिला थीं जिन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी इबादत और पاکیزگی में गुज़ारी थी, और जब उन पर एक मुश्किल इम्तिहान आया, तो उन्होंने अल्लाह पर भरोसा रखा। यह हमें सिखाता है कि मुसीबत के समय में भी हमें अल्लाह से निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि उसी पर भरोसा रखना चाहिए। अल्लाह ने उनके लिए उसी मुश्किल घड़ी में राहत भेजी — खजूर का पेड़ फल देने लगा और पानी का स्रोत जारी हो गया। यह हमारे लिए एक सबक़ है कि अल्लाह की रहमत कभी निराश नहीं करती, और हर मुश्किल के बाद आसानी आती है। जब हम अल्लाह पर भरोसा करते हैं, तो वह हमें कभी अकेला नहीं छोड़ता।



📜 आयत 21-25 — मरियम

21قَالَ كَذَٰلِكِ قَالَ رَبُّكِ هُوَ عَلَيَّ هَيِّنٌ ۖ وَلِنَجْعَلَهُ آيَةً لِّلنَّاسِ وَرَحْمَةً مِّنَّا ۚ وَكَانَ أَمْرًا مَّقْضِيًّا
जिबरील ने कहा तुमने कहा ठीक (मगर) तुम्हारे परवरदिगार ने फ़रमाया है कि ये बात (बे बाप के लड़का पैदा करना) मुझ पर आसान है ताकि इसको (पैदा करके) लोगों के वास्ते (अपनी क़ुदरत की) निशानी क़रार दें और अपनी ख़ास रहमत का ज़रिया बनायें
22۞ فَحَمَلَتْهُ فَانتَبَذَتْ بِهِ مَكَانًا قَصِيًّا
और ये बात फैसला शुदा है ग़रज़ लड़के के साथ वह आप ही आप हामेला हो गई फिर इसकी वजह से लोगों से अलग एक दूर के मकान में चली गई
23فَأَجَاءَهَا الْمَخَاضُ إِلَىٰ جِذْعِ النَّخْلَةِ قَالَتْ يَا لَيْتَنِي مِتُّ قَبْلَ هَٰذَا وَكُنتُ نَسْيًا مَّنسِيًّا
फिर (जब जनने का वक्त ़क़रीब आया तो दरदे ज़ह) उन्हें एक खजूर के (सूखे) दरख्त की जड़ में ले आया और (बेकसी में शर्म से) कहने लगीं काश मैं इससे पहले मर जाती और (न पैद होकर)
24فَنَادَاهَا مِن تَحْتِهَا أَلَّا تَحْزَنِي قَدْ جَعَلَ رَبُّكِ تَحْتَكِ سَرِيًّا
बिल्कुल भूली बिसरी हो जाती तब जिबरील ने मरियम के पाईन की तरफ़ से आवाज़ दी कि तुम कुढ़ों नहीं देखो तो तुम्हारे परवरदिगार ने तुम्हारे क़रीब ही नीचे एक चश्मा जारी कर दिया है
25وَهُزِّي إِلَيْكِ بِجِذْعِ النَّخْلَةِ تُسَاقِطْ عَلَيْكِ رُطَبًا جَنِيًّا
और खुरमे की जड़ (पकड़ कर) अपनी तरफ़ हिलाओ तुम पर पक्के-पक्के ताजे खुरमे झड़ पड़ेगें फिर (शौक़ से खुरमे) खाओ
मरियमकुरान सूची
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मक्कीRevelation
23आयत

अनुवाद — मरियम 23

सूरा मरियम आयत 23 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर (जब जनने का वक्त ़क़रीब आया तो दरदे ज़ह)…

सूरा आयत 23/98 — मरियम مريم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: मरियम सुनें, मरियम अनुवाद, मरियम mp3, मरियम pdf. आयत 21–25. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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