Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَأَجَاءَهَا الْمَخَاضُ: प्रसव पीड़ा ने उन्हें विवश कर दिया और उस स्थान की ओर ले आई।
- جِذْعِ النَّخْلَةِ: खजूर के पेड़ का तना।
- نَسْيًا: भूला हुआ, तुच्छ और फेंका हुआ सामान।
- مَنْسِيًّا: जिसे लोग भूल चुके हों और जिसकी ओर कोई ध्यान न देता हो।
तफ़सीर:
जब हज़रत मरियम (अलैहिस्सलाम) के लिए प्रसव का समय आया, तो प्रसव पीड़ा ने उन्हें विवश कर दिया और वह एक खजूर के पेड़ के तने के पास जा पहुँचीं। वहाँ उन्होंने उस पेड़ का सहारा लिया, क्योंकि उनके पास कोई सहायक या दाई नहीं थी जो उनकी मदद करती। यह स्थिति अत्यंत कठिन थी — वह अकेली थीं, एक निर्जन स्थान पर, और उनके सामने एक नवजात शिशु को जन्म देने का कठिन क्षण था।
इस कठिन घड़ी में, जब उन्हें अपनी स्थिति का एहसास हुआ और उन्हें डर था कि लोग उनके बारे में क्या सोचेंगे और क्या कहेंगे, तो उन्होंने दुःख और शर्म के मारे कहा: "काश! मैं इस घटना से पहले ही मर गई होती और एक ऐसी चीज़ बन गई होती जिसे लोग भूल चुके हों, जिसकी ओर कोई ध्यान न देता हो, और जिसका कोई नाम-ओ-निशान न होता।"
यह उनकी ओर से एक स्वाभाविक मानवीय प्रतिक्रिया थी — एक पाकदामन और परहेज़गार महिला का दिल टूटना, जो जानती थी कि समाज उस पर क्या इल्ज़ाम लगाएगा। वह लोगों की बुरी ज़बानों और झूठे इल्ज़ामों से बहुत डरती थीं, इसलिए उन्होंने मौत की तमन्ना की।
दावती पहलू:
इस आयत से हमें हज़रत मरियम (अलैहिस्सलाम) की पाकीज़गी और उनके ऊँचे किरदार का पता चलता है। वह एक ऐसी महिला थीं जिन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी इबादत और पاکیزگی में गुज़ारी थी, और जब उन पर एक मुश्किल इम्तिहान आया, तो उन्होंने अल्लाह पर भरोसा रखा। यह हमें सिखाता है कि मुसीबत के समय में भी हमें अल्लाह से निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि उसी पर भरोसा रखना चाहिए। अल्लाह ने उनके लिए उसी मुश्किल घड़ी में राहत भेजी — खजूर का पेड़ फल देने लगा और पानी का स्रोत जारी हो गया। यह हमारे लिए एक सबक़ है कि अल्लाह की रहमत कभी निराश नहीं करती, और हर मुश्किल के बाद आसानी आती है। जब हम अल्लाह पर भरोसा करते हैं, तो वह हमें कभी अकेला नहीं छोड़ता।
📜 आयत 21-25 — सूरा मरियम
अनुवाद — मरियम 23
सूरा मरियम आयत 23 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर (जब जनने का वक्त ़क़रीब आया तो दरदे ज़ह)…सूरा आयत 23/98 — सूरा मरियम مريم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा मरियम सुनें, सूरा मरियम अनुवाद, सूरा मरियम mp3, सूरा मरियम pdf. आयत 21–25. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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