मरियम · 24/98
अनुवाद उच्चारण — मरियम
فَنَادَاهَا مِن تَحْتِهَا أَلَّا تَحْزَنِي قَدْ جَعَلَ رَبُّكِ تَحْتَكِ سَرِيًّا ۝٢٤
Fanaadaahaa min tahtihaan allaa tahzanee qad ja`ala Rabbuki tahtaki sariyyaa
📖 हिंदी अर्थ
बिल्कुल भूली बिसरी हो जाती तब जिबरील ने मरियम के पाईन की तरफ़ से आवाज़ दी कि तुम कुढ़ों नहीं देखो तो तुम्हारे परवरदिगार ने तुम्हारे क़रीब ही नीचे एक चश्मा जारी कर दिया है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • سَرِيًّا: छोटी नदी या पानी की धारा (जलधारा)।

तफ़सीर:

जब मरियम (अलैहिस्सलाम) ने इस कठिन घड़ी में अकेलेपन और चिंता का सामना किया, और उनके दिल में दुख और घबराहट थी, तो अल्लाह ने उनकी मदद के लिए अपना करिश्मा दिखाया। उन्हें उनके नीचे से आवाज़ दी गई—चाहे वह जिब्रील (अलैहिस्सलाम) की आवाज़ थी या ईसा (अलैहिस्सलाम) की, जो उनके पैरों के नीचे से बोले—कि "उदास मत हो, तुम्हारे रब ने तुम्हारे नीचे एक छोटी सी जलधारा बहा दी है।"

यह अल्लाह की रहमत का एक अद्भुत नमूना है कि जब बंदा सबसे कठिन हालात में होता है, तो अल्लाह उसे ऐसे रास्ते से राहत देता है जिसका उसे अंदाज़ा भी नहीं होता। मरियम (अलैहिस्सलाम) उस वक़्त एक अकेली औरत थीं, एक नए बच्चे के साथ, एक सुनसान जगह पर—लेकिन अल्लाह ने उनके लिए पानी का जरिया पैदा कर दिया, जो उनकी प्यास बुझाने और उन्हें ताज़गी देने के लिए काफी था।

इस आयत से हमें सीख मिलती है कि अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। जब हमारी मुश्किलें बढ़ जाएं, तो हमें याद रखना चाहिए कि अल्लाह हर मुश्किल के साथ आसानी भी रखता है। वह हमारी ज़रूरतों को जानता है और जब हम उसकी तरफ रुजू करते हैं, तो वह हमारे लिए ऐसे दरवाजे खोलता है जिनके बारे में हमने सोचा भी नहीं होता। यह हमारे लिए एक प्यारा पैगाम है कि अल्लाह की रहमत कभी खत्म नहीं होती—चाहे हालात कितने भी बुरे क्यों न हों। मरियम (अलैहिस्सलाम) की तरह हमें भी अल्लाह पर यकीन रखना चाहिए, क्योंकि वही है जो हर दुख को दूर करने की ताकत रखता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 22-26 — मरियम

22۞ فَحَمَلَتْهُ فَانتَبَذَتْ بِهِ مَكَانًا قَصِيًّا
और ये बात फैसला शुदा है ग़रज़ लड़के के साथ वह आप ही आप हामेला हो गई फिर इसकी वजह से लोगों से अलग एक दूर के मकान में चली गई
23فَأَجَاءَهَا الْمَخَاضُ إِلَىٰ جِذْعِ النَّخْلَةِ قَالَتْ يَا لَيْتَنِي مِتُّ قَبْلَ هَٰذَا وَكُنتُ نَسْيًا مَّنسِيًّا
फिर (जब जनने का वक्त ़क़रीब आया तो दरदे ज़ह) उन्हें एक खजूर के (सूखे) दरख्त की जड़ में ले आया और (बेकसी में शर्म से) कहने लगीं काश मैं इससे पहले मर जाती और (न पैद होकर)
24فَنَادَاهَا مِن تَحْتِهَا أَلَّا تَحْزَنِي قَدْ جَعَلَ رَبُّكِ تَحْتَكِ سَرِيًّا
बिल्कुल भूली बिसरी हो जाती तब जिबरील ने मरियम के पाईन की तरफ़ से आवाज़ दी कि तुम कुढ़ों नहीं देखो तो तुम्हारे परवरदिगार ने तुम्हारे क़रीब ही नीचे एक चश्मा जारी कर दिया है
25وَهُزِّي إِلَيْكِ بِجِذْعِ النَّخْلَةِ تُسَاقِطْ عَلَيْكِ رُطَبًا جَنِيًّا
और खुरमे की जड़ (पकड़ कर) अपनी तरफ़ हिलाओ तुम पर पक्के-पक्के ताजे खुरमे झड़ पड़ेगें फिर (शौक़ से खुरमे) खाओ
26فَكُلِي وَاشْرَبِي وَقَرِّي عَيْنًا ۖ فَإِمَّا تَرَيِنَّ مِنَ الْبَشَرِ أَحَدًا فَقُولِي إِنِّي نَذَرْتُ لِلرَّحْمَٰنِ صَوْمًا فَلَنْ أُكَلِّمَ الْيَوْمَ إِنسِيًّا
और (चश्मे का पानी) पियो और (लड़के से) अपनी ऑंख ठन्डी करो फिर अगर तुम किसी आदमी को देखो (और वह तुमसे कुछ पूछे) तो तुम इशारे से कह देना कि मैंने खुदा के वास्ते रोजे क़ी नज़र की थी तो मैं आज हरगिज़ किसी से बात नहीं कर सकती
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अनुवाद — मरियम 24

सूरा मरियम आयत 24 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बिल्कुल भूली बिसरी हो जाती तब जिबरील ने मरियम के…

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Tuesday, August 18, 2026

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