मरियम · 22/98
अनुवाद उच्चारण — सूरा मरियम
۞ فَحَمَلَتْهُ فَانتَبَذَتْ بِهِ مَكَانًا قَصِيًّا ۝٢٢
Fahamalat hu fantabazat bihee makaanan qasiyyaa
📖 हिंदी अर्थ
और ये बात फैसला शुदा है ग़रज़ लड़के के साथ वह आप ही आप हामेला हो गई फिर इसकी वजह से लोगों से अलग एक दूर के मकान में चली गई

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَانتَبَذَتْ: अलग हो गईं, एकांत में चली गईं।
  • مَكَانًا قَصِيًّا: दूर का स्थान, जहाँ लोगों की नज़रों से वह छिपी रहें।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब जिब्रील (अलैहिस्सलाम) ने मरियम (अलैहिस्सलाम) के कुर्ते के गले में फूँक मारी, तो अल्लाह की क़ुदरत से वह फूँक उनके रहम तक पहुँची और वे ईसा (अलैहिस्सलाम) से हामिला हो गईं। यह एक अद्भुत और मो'जिज़ाना घटना थी, जो अल्लाह की ताक़त का प्रदर्शन थी, क्योंकि बिना पति के बच्चे का पैदा होना केवल अल्लाह ही के क़ाबिल है।

हामिला होने के बाद, मरियम (अलैहिस्सलाम) को डर हुआ कि लोग उन पर क्या इल्ज़ाम लगाएँगे और किस तरह की बातें करेंगे। वे जानती थीं कि समाज में एक कुँवारी लड़की का बच्चा पैदा करना बहुत बड़ी रुसवाई की बात समझी जाएगी। इसलिए उन्होंने अपने घर और अपने लोगों से दूर एक एकांत और दूरस्थ स्थान को चुना, ताकि वहाँ जाकर वे अल्लाह की इबादत करें और इस मुश्किल घड़ी में अल्लाह से मदद माँगें। यह उनके ईमान और भरोसे की निशानी थी कि उन्होंने मुश्किल में अल्लाह की तरफ रुजू' किया, न कि लोगों की तरफ।

यह घटना हमें सिखाती है कि जब इंसान पर मुसीबत आती है, तो उसे अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और उसी से मदद माँगनी चाहिए। मरियम (अलैहिस्सलाम) ने हर मुश्किल में सब्र और भरोसे का सबक दिया। उन्होंने अपनी इज़्ज़त और दीन की हिफ़ाज़त के लिए अलग रहना बेहतर समझा, ताकि लोगों की बुरी ज़बान से बच सकें। यह हमारे लिए भी एक नसीहत है कि हम अपनी इज़्ज़त और ईमान की हिफ़ाज़त के लिए हर क़ुर्बानी देने को तैयार रहें।

अल्लाह ने इस क़िस्से में मरियम (अलैहिस्सलाम) के सब्र और तक़वा का ज़िक्र करके हमें बताया कि जो लोग अल्लाह पर भरोसा करते हैं, अल्लाह उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता। यही वजह है कि अल्लाह ने उन्हें इस मुश्किल में भी सब्र की ताक़त दी और आगे चलकर उन्हें बड़ा मक़ाम अता किया। हमें भी चाहिए कि अपनी ज़िंदगी की हर मुश्किल में अल्लाह की तरफ रुजू' करें और उसी से मदद माँगें, क्योंकि वही सबसे बड़ा मददगार है।



📜 आयत 20-24 — सूरा मरियम

20قَالَتْ أَنَّىٰ يَكُونُ لِي غُلَامٌ وَلَمْ يَمْسَسْنِي بَشَرٌ وَلَمْ أَكُ بَغِيًّا
मरियम ने कहा मुझे लड़का क्योंकर हो सकता है हालाँकि किसी मर्द ने मुझे छुआ तक नहीं है औ मैं न बदकार हूँ
21قَالَ كَذَٰلِكِ قَالَ رَبُّكِ هُوَ عَلَيَّ هَيِّنٌ ۖ وَلِنَجْعَلَهُ آيَةً لِّلنَّاسِ وَرَحْمَةً مِّنَّا ۚ وَكَانَ أَمْرًا مَّقْضِيًّا
जिबरील ने कहा तुमने कहा ठीक (मगर) तुम्हारे परवरदिगार ने फ़रमाया है कि ये बात (बे बाप के लड़का पैदा करना) मुझ पर आसान है ताकि इसको (पैदा करके) लोगों के वास्ते (अपनी क़ुदरत की) निशानी क़रार दें और अपनी ख़ास रहमत का ज़रिया बनायें
22۞ فَحَمَلَتْهُ فَانتَبَذَتْ بِهِ مَكَانًا قَصِيًّا
और ये बात फैसला शुदा है ग़रज़ लड़के के साथ वह आप ही आप हामेला हो गई फिर इसकी वजह से लोगों से अलग एक दूर के मकान में चली गई
23فَأَجَاءَهَا الْمَخَاضُ إِلَىٰ جِذْعِ النَّخْلَةِ قَالَتْ يَا لَيْتَنِي مِتُّ قَبْلَ هَٰذَا وَكُنتُ نَسْيًا مَّنسِيًّا
फिर (जब जनने का वक्त ़क़रीब आया तो दरदे ज़ह) उन्हें एक खजूर के (सूखे) दरख्त की जड़ में ले आया और (बेकसी में शर्म से) कहने लगीं काश मैं इससे पहले मर जाती और (न पैद होकर)
24فَنَادَاهَا مِن تَحْتِهَا أَلَّا تَحْزَنِي قَدْ جَعَلَ رَبُّكِ تَحْتَكِ سَرِيًّا
बिल्कुल भूली बिसरी हो जाती तब जिबरील ने मरियम के पाईन की तरफ़ से आवाज़ दी कि तुम कुढ़ों नहीं देखो तो तुम्हारे परवरदिगार ने तुम्हारे क़रीब ही नीचे एक चश्मा जारी कर दिया है
मरियमकुरान सूची
98आयत
मक्कीअवतरण स्थान
22आयत

अनुवाद — मरियम 22

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Thursday, October 1, 2026

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