मरियम · 60/98
अनुवाद उच्चारण — मरियम
إِلَّا مَن تَابَ وَآمَنَ وَعَمِلَ صَالِحًا فَأُولَٰئِكَ يَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ وَلَا يُظْلَمُونَ شَيْئًا ۝٦٠
Illaa man taaba wa aamana wa `amila saalihan fa ulaaa`ika yadkhuloonal jannata wa laa yuzlamoona shai`aa
📖 हिंदी अर्थ
मगर (हाँ) जिसने तौबा कर लिया और अच्छे-अच्छे काम किए तो ऐसे लोग बेहिश्त में दाख़िल होंगे और उन पर कुछ भी जुल्म नहीं किया जाएगा वह सदाबहार बाग़ात में रहेंगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَابَ: तौबा की, अपनी गलती और कुकर्मों से लौट आया।
  • آمَنَ: ईमान लाया, अल्लाह और उसके रसूल (ﷺ) की सच्चाई को दिल से स्वीकार किया।
  • عَمِلَ صَالِحًا: अच्छे और नेक काम किए, जो अल्लाह को पसंद हैं।
  • لَا يُظْلَمُونَ شَيْئًا: उनके साथ कोई अन्याय नहीं होगा, यानी उनके अच्छे कामों का पूरा-पूरा बदला दिया जाएगा, कम नहीं किया जाएगा।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में अपनी असीम रहमत और क्षमा का द्वार खोलते हुए फ़रमाते हैं कि जो लोग पहले गुमराही, कुफ़्र या गुनाहों में पड़े हुए थे, उनके लिए भी निराशा नहीं है। हाँ, जो व्यक्ति सच्चे दिल से तौबा कर ले — यानी अपने किए पर पछताए, तुरंत गुनाह छोड़ दे, और अल्लाह की ओर पलट आए — और साथ ही अल्लाह पर ईमान लाए, उसकी वहदानियत और रसूल (ﷺ) की सच्चाई को मान ले, और फिर अपने ईमान के अनुसार अच्छे काम करे, जैसे नमाज़, रोज़ा, ज़कात और दूसरे नेक काम, तो ऐसे लोगों के लिए अल्लाह की जन्नत है।

यह अल्लाह का बड़ा ही प्यारा वादा है कि वह तौबा करने वालों को माफ़ कर देता है और उन्हें जन्नत में दाखिल करता है। वहाँ उनके साथ ज़रा भी ज़ुल्म नहीं होगा — उनके अच्छे कामों का बदला पूरा-पूरा मिलेगा, कोई नेकी कम नहीं की जाएगी, और न ही उनके साथ कोई नाइंसाफ़ी होगी।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत से कभी निराश नहीं होना चाहिए। चाहे इंसान कितना ही गुनाहगार क्यों न हो, जब तक दम में दम है, तौबा का दरवाज़ा खुला है। अल्लाह तआला अपने बंदों से बेहद प्यार करता है और चाहता है कि वे उसकी ओर लौट आएँ। तो आओ, हम सब अपनी ज़िंदगी में तौबा को अपनाएँ, ईमान को मज़बूत करें और नेक कामों में जुट जाएँ, ताकि हम भी उन खुशनसीब लोगों में शामिल हो सकें जिनके लिए जन्नत की खुशखबरी है। यही सबसे बड़ी कामयाबी है।



📜 आयत 58-62 — मरियम

58أُولَٰئِكَ الَّذِينَ أَنْعَمَ اللَّهُ عَلَيْهِم مِّنَ النَّبِيِّينَ مِن ذُرِّيَّةِ آدَمَ وَمِمَّنْ حَمَلْنَا مَعَ نُوحٍ وَمِن ذُرِّيَّةِ إِبْرَاهِيمَ وَإِسْرَائِيلَ وَمِمَّنْ هَدَيْنَا وَاجْتَبَيْنَا ۚ إِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ آيَاتُ الرَّحْمَٰنِ خَرُّوا سُجَّدًا وَبُكِيًّا ۩
ये अम्बिया लोग जिन्हें खुदा ने अपनी नेअमत दी आदमी की औलाद से हैं और उनकी नस्ल से जिन्हें हमने (तूफ़ान के वक्त) नूह के साथ (कश्ती पर) सवारकर लिया था और इबराहीम व याकूब की औलाद से हैं और उन लोगों में से हैं जिनकी हमने हिदायत की और मुन्तिख़ब किया जब उनके सामने खुदा की (नाज़िल की हुई) आयतें पढ़ी जाती थीं तो सजदे में ज़ारोक़तार रोते हुए गिर पड़ते थे (58) सजदा
59۞ فَخَلَفَ مِن بَعْدِهِمْ خَلْفٌ أَضَاعُوا الصَّلَاةَ وَاتَّبَعُوا الشَّهَوَاتِ ۖ فَسَوْفَ يَلْقَوْنَ غَيًّا
फिर उनके बाद कुछ नाख़लफ (उनके) जानशीन हुए जिन्होंने नमाज़ें खोयी और नफ़सानी ख्वाहिशों के चेले बन बैठे अनक़रीब ही ये लोग (अपनी) गुमराही (के ख़ामयाजे) से जा मिलेंगे
60إِلَّا مَن تَابَ وَآمَنَ وَعَمِلَ صَالِحًا فَأُولَٰئِكَ يَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ وَلَا يُظْلَمُونَ شَيْئًا
मगर (हाँ) जिसने तौबा कर लिया और अच्छे-अच्छे काम किए तो ऐसे लोग बेहिश्त में दाख़िल होंगे और उन पर कुछ भी जुल्म नहीं किया जाएगा वह सदाबहार बाग़ात में रहेंगे
61جَنَّاتِ عَدْنٍ الَّتِي وَعَدَ الرَّحْمَٰنُ عِبَادَهُ بِالْغَيْبِ ۚ إِنَّهُ كَانَ وَعْدُهُ مَأْتِيًّا
जिनका खुदा ने अपने बन्दों से ग़ाएबाना वायदा कर लिया है बेशक उसका वायदा पूरा होने वाला है
62لَّا يَسْمَعُونَ فِيهَا لَغْوًا إِلَّا سَلَامًا ۖ وَلَهُمْ رِزْقُهُمْ فِيهَا بُكْرَةً وَعَشِيًّا
वह लोग वहाँ सलाम के सिवा कोई बेहूदा बात सुनेंगे ही नहीं मगर हर तरफ से इस्लाम ही इस्लाम (की आवाज़ आएगी) और वहाँ उनका खाना सुबह व शाम (जिस वक्त चाहेंगे) उनके लिए (तैयार) रहेगा
मरियमकुरान सूची
98आयत
मक्कीRevelation
60आयत

अनुवाद — मरियम 60

सूरा मरियम आयत 60 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मगर (हाँ) जिसने तौबा कर लिया और अच्छे-अच्छे काम किए…

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Tuesday, August 18, 2026

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