अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- خَلْفٌ – बुरे उत्तराधिकारी, पीछे आने वाली बुरी पीढ़ी
- أَضَاعُوا الصَّلَاةَ – नमाज़ को बर्बाद किया, यानी उसे छोड़ दिया या उसके समय, रुक्न (अर्कान) और शर्तों की पूरी पाबंदी नहीं की
- الشَّهَوَاتِ – मन की इच्छाएँ, विशेष रूप से वे इच्छाएँ जो अल्लाह ने हराम की हैं
- غَيًّا – बुराई, गुमराही, और नुक़सान; कुछ मुफ़स्सिरीन के अनुसार यह जहन्नम की एक वादी (घाटी) का नाम है
तफ़सीर:
इस आयत में अल्लाह तआला ने उन पैग़म्बरों और नेक लोगों के बाद आने वाली बुरी पीढ़ी का ज़िक्र किया है, जिनका उल्लेख इस सूरह में पहले हुआ। वे लोग ऐसे थे जिन्होंने नमाज़ को बर्बाद कर दिया — यानी उसे पूरी तरह छोड़ दिया, या उसके वक़्त को टाल दिया, या उसके रुक्न और शर्तों की पाबंदी नहीं की। उन्होंने अल्लाह की इबादत को पीठ पीछे डाल दिया और अपनी नफ़्सानी ख्वाहिशों और शहवतों के पीछे चल पड़े। उन्होंने हलाल-हराम की परवाह नहीं की और अपनी इच्छाओं को ही अपना माबूद बना लिया।
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ऐसे लोग जल्द ही "ग़ै" से दो-चार होंगे — यानी वे बुराई, गुमराही और जहन्नम के अज़ाब में मुब्तला होंगे। कुछ मुफ़स्सिरीन ने बयान किया है कि "ग़ै" जहन्नम की एक बहुत गहरी और सख्त गर्म वादी है, जिसकी गर्मी से जहन्नम की दूसरी वादियाँ भी पनाह माँगती हैं। यह उन लोगों का अंजाम है जो नमाज़ को छोड़ देते हैं और अपनी ख्वाहिशों के ग़ुलाम बन जाते हैं।
दावती पहलू:
यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है। नमाज़ इस्लाम का सबसे अहम रुक्न है — यही वह रिश्ता है जो बंदे को उसके रब से जोड़ता है। जिसने नमाज़ को छोड़ दिया या उसमें कुतर-बरत की, उसने अपने दीन की बुनियाद ही कमज़ोर कर दी। आज हम देखते हैं कि बहुत से लोग नमाज़ से दूर हैं, और अपनी ख्वाहिशों, मौज-मस्ती, दुनियावी चीज़ों और गुनाहों में डूबे हुए हैं। यह आयत हमें चेतावनी देती है कि इसका अंजाम बहुत बुरा है — दुनिया में बेचैनी और आख़िरत में जहन्नम का अज़ाब।
लेकिन साथ ही, अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान और रहीम है। उसने तौबा का दरवाज़ा खुला रखा है। जो कोई भी अपनी गलती पर शर्मिंदा होकर अल्लाह की तरफ लौटेगा, अल्लाह उसे माफ़ कर देगा। हमें चाहिए कि हम अपनी नमाज़ों को सही तरीके से पढ़ें, उनके वक़्त की पाबंदी करें, और अपनी ख्वाहिशों को अल्लाह की रज़ा के आगे झुकाएँ। यही कामयाबी का रास्ता है। अल्लाह तआला हम सबको नमाज़ की पाबंदी और गुनाहों से बचने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 57-61 — मरियम
अनुवाद — मरियम 59
सूरा मरियम आयत 59 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर उनके बाद कुछ नाख़लफ (उनके) जानशीन हुए जिन्होंने नमाज़ें…सूरा आयत 59/98 — मरियम مريم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: मरियम सुनें, मरियम अनुवाद, मरियम mp3, मरियम pdf. आयत 57–61. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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