अल-बकरा · 119/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
إِنَّا أَرْسَلْنَاكَ بِالْحَقِّ بَشِيرًا وَنَذِيرًا ۖ وَلَا تُسْأَلُ عَنْ أَصْحَابِ الْجَحِيمِ ۝١١٩
Innaaa arsalnaaka bilhaqqi basheeranw wa nazeeranw wa laa tus`alu `am Ashaabil Jaheem
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) हमने तुमको दीने हक़ के साथ (बेहिश्त की) खुशख़बरी देने वाला और (अज़ाब से) डराने वाला बनाकर भेजा है और दोज़ख़ियों के बारे में तुमसे कुछ न पूछा जाएगा
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بِالْحَقِّ: सत्य के साथ, अर्थात सच्चे धर्म और स्पष्ट प्रमाणों के साथ।
  • بَشِيرًا: शुभ सूचना देने वाला (ईमानवालों को जन्नत की खुशखबरी देने वाला)।
  • نَذِيرًا: डराने वाला (काफिरों को आग के अज़ाब से सावधान करने वाला)।
  • أَصْحَابِ الْجَحِيمِ: जहन्नम (नरक) में जाने वाले लोग।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! हमने आपको सत्य (सच्चे धर्म) के साथ भेजा है, जो स्पष्ट प्रमाणों और चमत्कारों से समर्थित है। आपका काम केवल यह है कि लोगों तक यह संदेश पहुँचाएँ — ईमान लाने वालों को दुनिया और आख़िरत की भलाई की शुभ सूचना दें, और इनकार करने वालों को अल्लाह के अज़ाब से डराएँ। आप पर केवल स्पष्ट रूप से संदेश पहुँचाने की ज़िम्मेदारी है। जो लोग आपका संदेश सुनने के बाद भी ईमान नहीं लाते और जहन्नम में जाने वालों में शामिल होते हैं, उनके बारे में आपसे पूछताछ नहीं होगी। आप उनके कुफ्र के ज़िम्मेदार नहीं हैं, क्योंकि हिदायत देना आपके हाथ में नहीं, बल्कि अल्लाह के हाथ में है। क़यामत के दिन वे जहन्नम में दाखिल होंगे और उससे कभी बाहर नहीं निकलेंगे।

फ़ायदे (सीख):

  1. नबी ﷺ का मिशन सिर्फ संदेश पहुँचाना था, और उम्मत के दावत देने वालों का भी यही काम है — हमें परिणाम की चिंता किए बिना सच्चाई पहुँचानी चाहिए।
  2. यह आयत दावत के काम में निराशा से बचाती है — अगर लोग न मानें तो हम पर कोई गुनाह नहीं, बशर्ते हमने सही तरीके से संदेश पहुँचाया हो।
  3. अल्लाह की रहमत और अदल दोनों सामने आते हैं — ईमानवालों के लिए खुशखबरी और इनकार करने वालों के लिए चेतावनी, जो अल्लाह की हिकमत का हिस्सा है।
  4. इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपनी ज़िम्मेदारी निभानी चाहिए और दूसरों के फैसलों का बोझ अपने ऊपर नहीं लेना चाहिए — हर इंसान अपने कर्मों का जिम्मेदार है।
  5. यह भी सिखाती है कि इस्लाम में दावत का तरीका नरमी और खुशखबरी से शुरू होता है, और डराना उनके लिए है जो हक के मुकाबले में जिद करें।
🎧 सुनें

📜 आयत 117-121 — अल-बकरा

117بَدِيعُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ وَإِذَا قَضَىٰ أَمْرًا فَإِنَّمَا يَقُولُ لَهُ كُن فَيَكُونُ
(वही) आसमान व ज़मीन का मोजिद है और जब किसी काम का करना ठान लेता है तो उसकी निसबत सिर्फ कह देता है कि ''हो जा'' पस वह (खुद ब खुद) हो जाता है
118وَقَالَ الَّذِينَ لَا يَعْلَمُونَ لَوْلَا يُكَلِّمُنَا اللَّهُ أَوْ تَأْتِينَا آيَةٌ ۗ كَذَٰلِكَ قَالَ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِم مِّثْلَ قَوْلِهِمْ ۘ تَشَابَهَتْ قُلُوبُهُمْ ۗ قَدْ بَيَّنَّا الْآيَاتِ لِقَوْمٍ يُوقِنُونَ
और जो (मुशरेकीन) कुछ नहीं जानते कहते हैं कि खुदा हमसे (खुद) कलाम क्यों नहीं करता, या हमारे पास (खुद) कोई निशानी क्यों नहीं आती, इसी तरह उन्हीं की सी बाते वह कर चुके हैं जो उनसे पहले थे उन सब के दिल आपस में मिलते जुलते हैं जो लोग यक़ीन रखते हैं उनको तो अपनी निशानियाँ क्यों साफतौर पर दिखा चुके
119إِنَّا أَرْسَلْنَاكَ بِالْحَقِّ بَشِيرًا وَنَذِيرًا ۖ وَلَا تُسْأَلُ عَنْ أَصْحَابِ الْجَحِيمِ
(ऐ रसूल) हमने तुमको दीने हक़ के साथ (बेहिश्त की) खुशख़बरी देने वाला और (अज़ाब से) डराने वाला बनाकर भेजा है और दोज़ख़ियों के बारे में तुमसे कुछ न पूछा जाएगा
120وَلَن تَرْضَىٰ عَنكَ الْيَهُودُ وَلَا النَّصَارَىٰ حَتَّىٰ تَتَّبِعَ مِلَّتَهُمْ ۗ قُلْ إِنَّ هُدَى اللَّهِ هُوَ الْهُدَىٰ ۗ وَلَئِنِ اتَّبَعْتَ أَهْوَاءَهُم بَعْدَ الَّذِي جَاءَكَ مِنَ الْعِلْمِ ۙ مَا لَكَ مِنَ اللَّهِ مِن وَلِيٍّ وَلَا نَصِيرٍ
और (ऐ रसूल) न तो यहूदी कभी तुमसे रज़ामंद होगे न नसारा यहाँ तक कि तुम उनके मज़हब की पैरवी करो (ऐ रसूल उनसे) कह दो कि बस खुदा ही की हिदायत तो हिदायत है (बाक़ी ढकोसला है) और अगर तुम इसके बाद भी कि तुम्हारे पास इल्म (क़ुरान) आ चुका है उनकी ख्वाहिशों पर चले तो (याद रहे कि फिर) तुमको खुदा (के ग़ज़ब) से बचाने वाला न कोई सरपरस्त होगा न मददगार
121الَّذِينَ آتَيْنَاهُمُ الْكِتَابَ يَتْلُونَهُ حَقَّ تِلَاوَتِهِ أُولَٰئِكَ يُؤْمِنُونَ بِهِ ۗ وَمَن يَكْفُرْ بِهِ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْخَاسِرُونَ
जिन लोगों को हमने किताब (कुरान) दी है वह लोग उसे इस तरह पढ़ते रहते हैं जो उसके पढ़ने का हक़ है यही लोग उस पर ईमान लाते हैं और जो उससे इनकार करते हैं वही लोग घाटे में हैं
अल-बकराकुरान सूची
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119आयत

अनुवाद — अल-बकरा 119

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सूरा आयत 119/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 117–121. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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