अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَتْلُونَهُ حَقَّ تِلَاوَتِهِ: इसे पढ़ें जैसा कि इसे उतारा गया है, बिना किसी बदलाव या विकृति के, और इसके आदेशों का पालन करें।
- الْخَاسِرُونَ: वे लोग जिन्होंने अपना नुकसान किया, और अल्लाह की रहमत से वंचित रहे।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला उन लोगों का ज़िक्र कर रहा है जिन्हें उसने किताब (तौरात और इंजील) दी थी। उनमें से कुछ ऐसे हैं जो इस किताब को सही तरीके से पढ़ते हैं, यानी इसे वैसे ही पढ़ते हैं जैसे इसे उतारा गया था, बिना किसी शब्द को बदले या छिपाए। वे इसके आदेशों का पालन करते हैं और इसकी शिक्षाओं पर अमल करते हैं। ये वही लोग हैं जो इस किताब में मौजूद सच्चाई को पहचानते हैं, जिसमें अल्लाह के सभी रसूलों पर ईमान लाना शामिल है, और उनमें से आखिरी रसूल मुहम्मद ﷺ पर भी ईमान लाना शामिल है, क्योंकि उनकी नबुव्वत की निशानियाँ उन किताबों में मौजूद थीं। ये लोग सच्चे मोमिन हैं।
लेकिन जिन लोगों ने अपनी किताबों में बदलाव किया, उनके शब्दों को तोड़ा-मरोड़ा, और उनमें से कुछ हिस्सों को छिपाया, उन्होंने मुहम्मद ﷺ पर ईमान नहीं लाया और उन पर कुफ्र किया। ऐसे लोग सबसे बड़े नुकसान में हैं, क्योंकि उन्होंने सीधे रास्ते के बदले गुमराही को चुना, और अल्लाह की तरफ से मिलने वाले इनाम को खो दिया। उनका यह नुकसान सबसे बड़ा है, क्योंकि उन्होंने दुनिया और आखिरत दोनों को खो दिया।
फायदे और सबक:
- सिर्फ किताब पढ़ना काफी नहीं है, बल्कि उसे सही तरीके से पढ़ना और उस पर अमल करना जरूरी है। सही तिलावत का मतलब है कि किताब को समझना, उसके आदेशों का पालन करना, और उसकी हिदायतों को अपनी जिंदगी में लागू करना।
- जो लोग अपनी किताबों को सही तरीके से पढ़ते और उन पर अमल करते हैं, वे सच्चाई को पहचान लेते हैं और अल्लाह के आखिरी रसूल ﷺ पर ईमान ले आते हैं। यह दिखाता है कि सच्चाई की तलाश और उस पर अमल करने से इंसान सही रास्ते पर आ जाता है।
- किताबों में बदलाव करना, शब्दों को तोड़ना-मरोड़ना, और सच्चाई को छिपाना बहुत बड़ा गुनाह है, जो इंसान को अल्लाह की रहमत से दूर कर देता है।
- कुफ्र और सच्चाई से मुंह मोड़ने का अंजाम सबसे बड़ा नुकसान है — यह दुनिया और आखिरत दोनों में इंसान को बर्बाद कर देता है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की किताब के साथ हमारा रिश्ता सिर्फ पढ़ने का नहीं, बल्कि समझने, उस पर अमल करने, और उसके जरिए सच्चाई को अपनाने का होना चाहिए। यही वह रास्ता है जो हमें सच्ची कामयाबी और अल्लाह की रहमत तक पहुंचाता है।
📜 आयत 119-123 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 121
सूरा अल-बकरा आयत 121 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिन लोगों को हमने किताब (कुरान) दी है वह लोग…सूरा आयत 121/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 119–123. हिंदी अर्थ: اردو.
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Wednesday, August 19, 2026
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