अल-बकरा · 19/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
أَوْ كَصَيِّبٍ مِّنَ السَّمَاءِ فِيهِ ظُلُمَاتٌ وَرَعْدٌ وَبَرْقٌ يَجْعَلُونَ أَصَابِعَهُمْ فِي آذَانِهِم مِّنَ الصَّوَاعِقِ حَذَرَ الْمَوْتِ ۚ وَاللَّهُ مُحِيطٌ بِالْكَافِرِينَ ۝١٩
Aw kasaiyibim minas samaaa`i feehi zulumaatunw wa ra`dunw wa barq, yaj`aloona asaabi`ahum feee aazaanihim minas sawaa`iqi hazaral mawt` wallaahu muheetum bilkaafireen
📖 हिंदी अर्थ
या उनकी मिसाल ऐसी है जैसे आसमानी बारिश जिसमें तारिकियाँ ग़र्ज़ बिजली हो मौत के खौफ से कड़क के मारे अपने कानों में ऊँगलियाँ दे लेते हैं हालाँकि खुदा काफ़िरों को (इस तरह) घेरे हुए है (कि उसक हिल नहीं सकते)
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • صَيِّبٍ (सैयिब): मूसलाधार बारिश।
  • ظُلُمَاتٌ (ज़ुलुमात): अंधेरे, घने बादलों के कारण फैला हुआ अंधकार।
  • رَعْدٌ (रअद): बादलों की गड़गड़ाहट।
  • بَرْقٌ (बर्क़): बिजली की चमक।
  • صَوَاعِق (सवाइक़): बिजली की कड़क जो विनाशकारी होती है।
  • مُحِيطٌ (मुहीत): घेरने वाला, सब तरफ से काबू में रखने वाला।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने मुनाफ़िक़ों (दिखावटी मुसलमानों) की एक और हालत का ज़िक्र किया है। उनकी मिसाल ऐसे लोगों जैसी है जो खुले मैदान में चल रहे हों और अचानक आसमान से मूसलाधार बारिश शुरू हो जाए, जिसके साथ घने अंधेरे हों, बादलों की गड़गड़ाहट हो और बिजली की चमक हो। यह बारिश उनके लिए भय और परेशानी का कारण बन जाए। वे डर के मारे, मौत के खौफ से अपनी उंगलियाँ अपने कानों में डाल लें ताकि बिजली की कड़क की आवाज़ न सुननी पड़े। यह उनकी कमज़ोरी और बेबसी की निशानी है।

यह मिसाल मुनाफ़िक़ों की उस हालत को बयान करती है कि जब कभी सच्चाई और हक़ का कोई पहलू सामने आता है, तो वे घबरा जाते हैं। कभी उन्हें डर होता है कि कहीं सच्चाई उनके राज़ को उजागर न कर दे, तो कभी उन्हें इस्लाम के दुश्मनों का खौफ होता है। वे अपनी आँखें और कान बंद करना चाहते हैं ताकि सच्चाई की आवाज़ उन तक न पहुँचे। लेकिन अल्लाह तआला उन्हें पूरी तरह से अपनी घेरे में लिए हुए है — वे उसकी पकड़ से भाग नहीं सकते, न उसकी क़ुदरत को हरा सकते हैं। जिस तरह बारिश और बिजली की कड़क से भागना मुमकिन नहीं, उसी तरह अल्लाह की पकड़ से बचना भी नामुमकिन है।

फ़ायदे (सबक):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की क़ुदरत और उसकी पकड़ से कोई नहीं बच सकता। चाहे इंसान कितना भी ताकतवर या चालाक क्यों न हो, अल्लाह उसे हर तरफ से घेरे हुए है।
  2. मुनाफ़िक़ी (दिखावा) एक गंभीर बीमारी है जो इंसान को सच्चाई से दूर कर देती है और उसे हमेशा बेचैन और भयभीत रखती है। सच्चा मोमिन वह है जो अल्लाह पर पूरा भरोसा रखे और हर हाल में उसकी राह पर चले।
  3. यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि कुरआन की मिसालें हमारे लिए रहनुमाई हैं — जो लोग सच्चाई से मुँह मोड़ते हैं, वे हमेशा बेचैन और परेशान रहते हैं, जबकि ईमान वालों को अल्लाह की तरफ से सुकून और इत्मिनान मिलता है।
  4. अल्लाह की याद और उसकी किताब पर अमल करने से इंसान के दिल से खौफ और घबराहट दूर होती है, और उसे यक़ीन होता है कि अल्लाह उसके साथ है।
🎧 सुनें

📜 आयत 17-21 — अल-बकरा

17مَثَلُهُمْ كَمَثَلِ الَّذِي اسْتَوْقَدَ نَارًا فَلَمَّا أَضَاءَتْ مَا حَوْلَهُ ذَهَبَ اللَّهُ بِنُورِهِمْ وَتَرَكَهُمْ فِي ظُلُمَاتٍ لَّا يُبْصِرُونَ
उन लोगों की मिसाल (तो) उस शख्स की सी है जिसने (रात के वक्त मजमे में) भड़कती हुईआग रौशन की फिर जब आग (के शोले) ने उसके गिर्दों पेश (चारों ओर) खूब उजाला कर दिया तो खुदा ने उनकी रौशनी ले ली और उनको घटाटोप अंधेरे में छोड़ दिया
18صُمٌّ بُكْمٌ عُمْيٌ فَهُمْ لَا يَرْجِعُونَ
कि अब उन्हें कुछ सुझाई नहीं देता ये लोग बहरे गूँगे अन्धे हैं कि फिर अपनी गुमराही से बाज़ नहीं आ सकते
19أَوْ كَصَيِّبٍ مِّنَ السَّمَاءِ فِيهِ ظُلُمَاتٌ وَرَعْدٌ وَبَرْقٌ يَجْعَلُونَ أَصَابِعَهُمْ فِي آذَانِهِم مِّنَ الصَّوَاعِقِ حَذَرَ الْمَوْتِ ۚ وَاللَّهُ مُحِيطٌ بِالْكَافِرِينَ
या उनकी मिसाल ऐसी है जैसे आसमानी बारिश जिसमें तारिकियाँ ग़र्ज़ बिजली हो मौत के खौफ से कड़क के मारे अपने कानों में ऊँगलियाँ दे लेते हैं हालाँकि खुदा काफ़िरों को (इस तरह) घेरे हुए है (कि उसक हिल नहीं सकते)
20يَكَادُ الْبَرْقُ يَخْطَفُ أَبْصَارَهُمْ ۖ كُلَّمَا أَضَاءَ لَهُم مَّشَوْا فِيهِ وَإِذَا أَظْلَمَ عَلَيْهِمْ قَامُوا ۚ وَلَوْ شَاءَ اللَّهُ لَذَهَبَ بِسَمْعِهِمْ وَأَبْصَارِهِمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
क़रीब है कि बिजली उनकी ऑंखों को चौन्धिया दे जब उनके आगे बिजली चमकी तो उस रौशनी में चल खड़े हुए और जब उन पर अंधेरा छा गया तो (ठिठके के) खड़े हो गए और खुदा चाहता तो यूँ भी उनके देखने और सुनने की कूवतें छीन लेता बेशक खुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
21يَا أَيُّهَا النَّاسُ اعْبُدُوا رَبَّكُمُ الَّذِي خَلَقَكُمْ وَالَّذِينَ مِن قَبْلِكُمْ لَعَلَّكُمْ تَتَّقُونَ
ऐ लोगों अपने परवरदिगार की इबादत करो जिसने तुमको और उन लोगों को जो तुम से पहले थे पैदा किया है अजब नहीं तुम परहेज़गार बन जाओ
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अनुवाद — अल-बकरा 19

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Tuesday, August 18, 2026

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