Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- صَيِّبٍ (सैयिब): मूसलाधार बारिश।
- ظُلُمَاتٌ (ज़ुलुमात): अंधेरे, घने बादलों के कारण फैला हुआ अंधकार।
- رَعْدٌ (रअद): बादलों की गड़गड़ाहट।
- بَرْقٌ (बर्क़): बिजली की चमक।
- صَوَاعِق (सवाइक़): बिजली की कड़क जो विनाशकारी होती है।
- مُحِيطٌ (मुहीत): घेरने वाला, सब तरफ से काबू में रखने वाला।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने मुनाफ़िक़ों (दिखावटी मुसलमानों) की एक और हालत का ज़िक्र किया है। उनकी मिसाल ऐसे लोगों जैसी है जो खुले मैदान में चल रहे हों और अचानक आसमान से मूसलाधार बारिश शुरू हो जाए, जिसके साथ घने अंधेरे हों, बादलों की गड़गड़ाहट हो और बिजली की चमक हो। यह बारिश उनके लिए भय और परेशानी का कारण बन जाए। वे डर के मारे, मौत के खौफ से अपनी उंगलियाँ अपने कानों में डाल लें ताकि बिजली की कड़क की आवाज़ न सुननी पड़े। यह उनकी कमज़ोरी और बेबसी की निशानी है।
यह मिसाल मुनाफ़िक़ों की उस हालत को बयान करती है कि जब कभी सच्चाई और हक़ का कोई पहलू सामने आता है, तो वे घबरा जाते हैं। कभी उन्हें डर होता है कि कहीं सच्चाई उनके राज़ को उजागर न कर दे, तो कभी उन्हें इस्लाम के दुश्मनों का खौफ होता है। वे अपनी आँखें और कान बंद करना चाहते हैं ताकि सच्चाई की आवाज़ उन तक न पहुँचे। लेकिन अल्लाह तआला उन्हें पूरी तरह से अपनी घेरे में लिए हुए है — वे उसकी पकड़ से भाग नहीं सकते, न उसकी क़ुदरत को हरा सकते हैं। जिस तरह बारिश और बिजली की कड़क से भागना मुमकिन नहीं, उसी तरह अल्लाह की पकड़ से बचना भी नामुमकिन है।
फ़ायदे (सबक):
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की क़ुदरत और उसकी पकड़ से कोई नहीं बच सकता। चाहे इंसान कितना भी ताकतवर या चालाक क्यों न हो, अल्लाह उसे हर तरफ से घेरे हुए है।
- मुनाफ़िक़ी (दिखावा) एक गंभीर बीमारी है जो इंसान को सच्चाई से दूर कर देती है और उसे हमेशा बेचैन और भयभीत रखती है। सच्चा मोमिन वह है जो अल्लाह पर पूरा भरोसा रखे और हर हाल में उसकी राह पर चले।
- यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि कुरआन की मिसालें हमारे लिए रहनुमाई हैं — जो लोग सच्चाई से मुँह मोड़ते हैं, वे हमेशा बेचैन और परेशान रहते हैं, जबकि ईमान वालों को अल्लाह की तरफ से सुकून और इत्मिनान मिलता है।
- अल्लाह की याद और उसकी किताब पर अमल करने से इंसान के दिल से खौफ और घबराहट दूर होती है, और उसे यक़ीन होता है कि अल्लाह उसके साथ है।
📜 आयत 17-21 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 19
सूरा अल-बकरा आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : या उनकी मिसाल ऐसी है जैसे आसमानी बारिश जिसमें तारिकियाँ…सूरा आयत 19/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 17–21. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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