अल-बकरा · 18/286
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-बकरा
صُمٌّ بُكْمٌ عُمْيٌ فَهُمْ لَا يَرْجِعُونَ ۝١٨
Summum bukmun `umyun fahum laa yarji`oon
📖 हिंदी अर्थ
कि अब उन्हें कुछ सुझाई नहीं देता ये लोग बहरे गूँगे अन्धे हैं कि फिर अपनी गुमराही से बाज़ नहीं आ सकते

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • صُمٌّ (सुम्मुन): बहरे, जो सत्य की बात सुनकर भी उसे स्वीकार न करें।
  • بُكْمٌ (बुक्मुन): गूँगे, जो सत्य बोल न सकें।
  • عُمْيٌ (उम्युन): अंधे, जिन्हें हिदायत का नूर (प्रकाश) न दिखाई दे।
  • لَا يَرْجِعُونَ (ला यर्जिऊन): वे (अपनी गलती से) बाज़ नहीं आते, सत्य की ओर लौटते नहीं।

तफ़सीर (व्याख्या):

ये मुनाफ़िक़ (कपटी) लोग सत्य की बात सुनते तो हैं, लेकिन उसे समझने और क़बूल करने की नीयत से नहीं सुनते, इसलिए वे बहरों की तरह हैं। वे सत्य को अपनी ज़ुबान पर नहीं लाते, न ही उसका प्रचार करते हैं, इसलिए वे गूँगों की तरह हैं। और वे हिदायत के रास्ते को देखकर भी उसे पहचान नहीं पाते, क्योंकि उनके दिलों की आँखें बंद हैं, इसलिए वे अंधों की तरह हैं। इन तीनों विशेषताओं के कारण वे अपनी गुमराही से बाज़ नहीं आते और सत्य की ओर कभी लौटते नहीं। उन्होंने हक़ को छोड़कर बातिल (झूठ) को अपना लिया है, और यही उनकी सबसे बड़ी भूल है।


फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि सिर्फ़ कानों से सुनना काफ़ी नहीं, बल्कि दिल से सुनना और समझना ज़रूरी है। अल्लाह का कलाम सुनकर उस पर अमल करना चाहिए।
  2. सत्य को छिपाना और न बोलना गूँगेपन की मिसाल है। एक मुसलमान को चाहिए कि वह हक़ की गवाही दे और उसे फैलाए।
  3. अंधापन सिर्फ़ आँखों का नहीं, बल्कि दिल का अंधापन भी होता है। जो दिल हिदायत के नूर से रोशन न हो, वह सबसे बड़ा अंधा है।
  4. यह आयत हमें आगाह करती है कि अगर इंसान जानबूझकर सत्य को न माने, तो उसका दिल धीरे-धीरे सख्त हो जाता है और वह सत्य की ओर लौटने की तौफ़ीक़ (ताक़त) खो देता है। इसलिए हमें हमेशा दुआ करनी चाहिए कि अल्लाह हमें सुनने, बोलने और देखने की सही तौफ़ीक़ दे।
  5. इस आयत से हमें यह भी सबक मिलता है कि हम अपने दिल को साफ़ रखें, क्योंकि साफ़ दिल ही सत्य को क़बूल करता है और उस पर अमल करता है।


📜 आयत 16-20 — सूरा अल-बकरा

16أُولَٰئِكَ الَّذِينَ اشْتَرَوُا الضَّلَالَةَ بِالْهُدَىٰ فَمَا رَبِحَت تِّجَارَتُهُمْ وَمَا كَانُوا مُهْتَدِينَ
यही वह लोग हैं जिन्होंने हिदायत के बदले गुमराही ख़रीद ली, फिर न उनकी तिजारत ही ने कुछ नफ़ा दिया और न उन लोगों ने हिदायत ही पाई
17مَثَلُهُمْ كَمَثَلِ الَّذِي اسْتَوْقَدَ نَارًا فَلَمَّا أَضَاءَتْ مَا حَوْلَهُ ذَهَبَ اللَّهُ بِنُورِهِمْ وَتَرَكَهُمْ فِي ظُلُمَاتٍ لَّا يُبْصِرُونَ
उन लोगों की मिसाल (तो) उस शख्स की सी है जिसने (रात के वक्त मजमे में) भड़कती हुईआग रौशन की फिर जब आग (के शोले) ने उसके गिर्दों पेश (चारों ओर) खूब उजाला कर दिया तो खुदा ने उनकी रौशनी ले ली और उनको घटाटोप अंधेरे में छोड़ दिया
18صُمٌّ بُكْمٌ عُمْيٌ فَهُمْ لَا يَرْجِعُونَ
कि अब उन्हें कुछ सुझाई नहीं देता ये लोग बहरे गूँगे अन्धे हैं कि फिर अपनी गुमराही से बाज़ नहीं आ सकते
19أَوْ كَصَيِّبٍ مِّنَ السَّمَاءِ فِيهِ ظُلُمَاتٌ وَرَعْدٌ وَبَرْقٌ يَجْعَلُونَ أَصَابِعَهُمْ فِي آذَانِهِم مِّنَ الصَّوَاعِقِ حَذَرَ الْمَوْتِ ۚ وَاللَّهُ مُحِيطٌ بِالْكَافِرِينَ
या उनकी मिसाल ऐसी है जैसे आसमानी बारिश जिसमें तारिकियाँ ग़र्ज़ बिजली हो मौत के खौफ से कड़क के मारे अपने कानों में ऊँगलियाँ दे लेते हैं हालाँकि खुदा काफ़िरों को (इस तरह) घेरे हुए है (कि उसक हिल नहीं सकते)
20يَكَادُ الْبَرْقُ يَخْطَفُ أَبْصَارَهُمْ ۖ كُلَّمَا أَضَاءَ لَهُم مَّشَوْا فِيهِ وَإِذَا أَظْلَمَ عَلَيْهِمْ قَامُوا ۚ وَلَوْ شَاءَ اللَّهُ لَذَهَبَ بِسَمْعِهِمْ وَأَبْصَارِهِمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
क़रीब है कि बिजली उनकी ऑंखों को चौन्धिया दे जब उनके आगे बिजली चमकी तो उस रौशनी में चल खड़े हुए और जब उन पर अंधेरा छा गया तो (ठिठके के) खड़े हो गए और खुदा चाहता तो यूँ भी उनके देखने और सुनने की कूवतें छीन लेता बेशक खुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीअवतरण स्थान
18आयत

अनुवाद — अल-बकरा 18

सूरा अल-बकरा आयत 18 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कि अब उन्हें कुछ सुझाई नहीं देता ये लोग बहरे…

सूरा आयत 18/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 16–20. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Wednesday, September 30, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए