अल-बकरा · 243/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
۞ أَلَمْ تَرَ إِلَى الَّذِينَ خَرَجُوا مِن دِيَارِهِمْ وَهُمْ أُلُوفٌ حَذَرَ الْمَوْتِ فَقَالَ لَهُمُ اللَّهُ مُوتُوا ثُمَّ أَحْيَاهُمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ لَذُو فَضْلٍ عَلَى النَّاسِ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَشْكُرُونَ ۝٢٤٣
Alam tara ilal lazeena kharajoo min diyaarihim wa hum uloofun hazaral mawti faqaaala lahumul laahu mootoo summa ahyaahum; innal laaha lazoo fadlin `alannaasi wa laakinna aksarannaasi laa yashkuroon
📖 हिंदी अर्थ
ताकि तुम समझो (ऐ रसूल) क्या तुम ने उन लोगों के हाल पर नज़र नही की जो मौत के डर के मारे अपने घरों से निकल भागे और वह हज़ारो आदमी थे तो ख़ुदा ने उन से फरमाया कि सब के सब मर जाओ (और वह मर गए) फिर ख़ुदा न उन्हें जिन्दा किया बेशक ख़ुदा लोगों पर बड़ा मेहरबान है मगर अक्सर लोग उसका शुक्र नहीं करते
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَلُوفٌ: हज़ारों की संख्या में, अत्यधिक बड़ी जमात।
  • حَذَرَ الْمَوْتِ: मृत्यु के डर से।
  • فَقَالَ لَهُمُ اللَّهُ مُوتُوا: अल्लाह ने उन्हें मरने का आदेश दिया, और वे मर गए।
  • ثُمَّ أَحْيَاهُمْ: फिर अल्लाह ने उन्हें दोबारा जीवित किया।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! क्या तुमने उन लोगों के हाल पर ग़ौर नहीं किया जो मौत के डर से अपने घरों से निकल खड़े हुए थे? वे हज़ारों की तादाद में थे—इतनी बड़ी जमात कि उनकी गिनती अल्लाह के सिवा कोई नहीं जानता। वे किसी वबा (महामारी) या जंग के ख़ौफ़ से अपनी जान बचाने के लिए अपने वतन छोड़कर भाग निकले। उन्होंने समझा कि इस तरह वे मौत से बच जाएँगे, लेकिन वे भूल गए कि मौत और ज़िंदगी का मालिक सिर्फ़ अल्लाह है। अल्लाह ने उन्हें आदेश दिया: "मर जाओ!" और वे उसी वक़्त मर गए—एक साथ, मानो उनकी जानें एक ही पल में निकल गईं। यह उनकी नादानी की सज़ा थी कि उन्होंने अल्लाह के फ़ैसले से भागने की कोशिश की।

फिर अल्लाह ने अपनी क़ुदरत से उन्हें दोबारा ज़िंदा किया, ताकि वे अपनी ग़लती पर पछताएँ, सबक़ सीखें और जान लें कि अल्लाह की मर्ज़ी के बिना न तो कोई मरता है और न जीता है। यह घटना बनी इसराईल के एक गिरोह की है, और अल्लाह ने इसे इसलिए बयान किया ताकि लोग समझें कि उसकी क़ुदरत के आगे सारी तदबीरें बेकार हैं।

अल्लाह लोगों पर बहुत बड़ा फज़ल (कृपा) करने वाला है—उसने उन्हें यह ज़िंदगी दी, उन्हें मौत के बाद दोबारा उठाया, और उन्हें तौबा का मौक़ा दिया। लेकिन अफ़सोस! अधिकतर लोग इस एहसान का शुक्र अदा नहीं करते। वे अल्लाह की नेमतों को भूल जाते हैं और अपनी ज़िंदगी में उसकी तरफ़ ध्यान नहीं देते।

यह क़िस्सा हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है—हमें चाहिए कि अल्लाह के फ़ैसलों पर भरोसा रखें, उसकी रहमत से कभी मायूस न हों, और हर हाल में उसका शुक्र अदा करें। क्योंकि जो शख्स अल्लाह के सामने झुक जाता है, अल्लाह उसे अपनी पनाह में ले लेता है और उसके लिए हर मुश्किल में राह निकालता है। याद रखिए! मौत से भागना नामुमकिन है, लेकिन अल्लाह की रहमत से जुड़ा हुआ इंसान हर हाल में कामयाब है।

🎧 सुनें

📜 आयत 241-245 — अल-बकरा

241وَلِلْمُطَلَّقَاتِ مَتَاعٌ بِالْمَعْرُوفِ ۖ حَقًّا عَلَى الْمُتَّقِينَ
और जिन औरतों को ताअय्युन मेहर और हाथ लगाए बगैर तलाक़ दे दी जाए उनके साथ जोड़े रुपए वगैरह से सुलूक करना लाज़िम है
242كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُمْ آيَاتِهِ لَعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَ
(ये भी) परहेज़गारों पर एक हक़ है उसी तरह ख़ुदा तुम लोगों की हिदायत के वास्ते अपने एहक़ाम साफ़ साफ़ बयान फरमाता है
243۞ أَلَمْ تَرَ إِلَى الَّذِينَ خَرَجُوا مِن دِيَارِهِمْ وَهُمْ أُلُوفٌ حَذَرَ الْمَوْتِ فَقَالَ لَهُمُ اللَّهُ مُوتُوا ثُمَّ أَحْيَاهُمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ لَذُو فَضْلٍ عَلَى النَّاسِ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَشْكُرُونَ
ताकि तुम समझो (ऐ रसूल) क्या तुम ने उन लोगों के हाल पर नज़र नही की जो मौत के डर के मारे अपने घरों से निकल भागे और वह हज़ारो आदमी थे तो ख़ुदा ने उन से फरमाया कि सब के सब मर जाओ (और वह मर गए) फिर ख़ुदा न उन्हें जिन्दा किया बेशक ख़ुदा लोगों पर बड़ा मेहरबान है मगर अक्सर लोग उसका शुक्र नहीं करते
244وَقَاتِلُوا فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَاعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ سَمِيعٌ عَلِيمٌ
और मुसलमानों ख़ुदा की राह मे जिहाद करो और जान रखो कि ख़ुदा ज़रुर सब कुछ सुनता (और) जानता है
245مَّن ذَا الَّذِي يُقْرِضُ اللَّهَ قَرْضًا حَسَنًا فَيُضَاعِفَهُ لَهُ أَضْعَافًا كَثِيرَةً ۚ وَاللَّهُ يَقْبِضُ وَيَبْسُطُ وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ
है कोई जो ख़ुदा को क़र्ज़ ए हुस्ना दे ताकि ख़ुदा उसके माल को इस के लिए कई गुना बढ़ा दे और ख़ुदा ही तंगदस्त करता है और वही कशायश देता है और उसकी तरफ सब के सब लौटा दिये जाओगे
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अनुवाद — अल-बकरा 243

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Tuesday, August 18, 2026

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