अल-बकरा · 252/286
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-बकरा
تِلْكَ آيَاتُ اللَّهِ نَتْلُوهَا عَلَيْكَ بِالْحَقِّ ۚ وَإِنَّكَ لَمِنَ الْمُرْسَلِينَ ۝٢٥٢
Tilka Aayaatul laahi natloohaa `alaika bilhaqq; wa innaka laminal mursaleen
📖 हिंदी अर्थ
ऐ रसूल ये ख़ुदा की सच्ची आयतें हैं जो हम तुम को ठीक ठीक पढ़के सुनाते हैं और बेशक तुम ज़रुर रसूलों में से हो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • तिल्क (تِلْكَ): ये, वो (पहले से बताई गई बातों की ओर इशारा)
  • आयातुल्लाह (آيَاتُ اللَّهِ): अल्लाह की निशानियाँ, उसकी स्पष्ट दलीलें और प्रमाण
  • नत्लूहा (نَتْلُوهَا): हम पढ़कर सुनाते हैं, हम व्यक्त करते हैं
  • बिलहक़्क़ (بِالْحَقِّ): सच्चाई के साथ, पूरी सच्चाई पर आधारित
  • लमिनल मुरसलीन (لَمِنَ الْمُرْسَلِينَ): निश्चित रूप से भेजे गए रसूलों में से

विस्तृत तफ़सीर:

यह आयत उन सारी घटनाओं और किस्सों की ओर संकेत करती है जो इससे पहले सूरह अल-बक़रह में बयान की गईं — जैसे हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) और बनी इसराईल के क़िस्से, तालूत और जालूत की घटना, हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) की फ़ज़ीलत, और अन्य ऐतिहासिक सबक़। ये सब "आयातुल्लाह" हैं — अल्लाह की निशानियाँ और उसकी स्पष्ट दलीलें, जो अकेले उसी की तरफ़ से हैं।

अल्लाह तआला फ़रमाता है: "ये अल्लाह की आयतें हैं जिन्हें हम तुम्हें सच्चाई के साथ सुनाते हैं।" यानी ये महज़ कहानियाँ या क़िस्से नहीं हैं, बल्कि हर एक घटना में सच्चाई की रोशनी है, हर एक वाक़िया में हिदायत का पैग़ाम है। इनमें कोई झूठ नहीं, कोई मिलावट नहीं — ये सब सच्चाई पर आधारित हैं, क्योंकि ये उस अल्लाह की तरफ़ से हैं जो सब कुछ जानता है और जिसका बयान हक़ से भरपूर है।

फिर अल्लाह तआला अपने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को दिलासा देते हुए फ़रमाता है: "और निश्चय ही आप अल्लाह के भेजे हुए रसूलों में से हैं।" यह एक ऐसी तसल्ली है जो दिल को सुकून देती है — कि ऐ नबी! आप सच्चे रसूल हैं, आपका दावा सच्चा है, आपकी रिसालत अल्लाह की तरफ़ से है। यह सिर्फ़ तसल्ली ही नहीं, बल्कि उम्मत के लिए भी सबूत है कि मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) सच्चे नबी हैं, और उन पर जो कुछ नाज़िल हुआ वह अल्लाह ही की तरफ़ से है।

दावती पहलू:

इस आयत में हमारे लिए बड़ी नसीहत और खुशख़बरी है। जिस तरह अल्लाह ने अपने नबी को तसल्ली दी कि "आप रसूलों में से हैं", उसी तरह हर मोमिन को यक़ीन होना चाहिए कि क़ुरआन अल्लाह की सच्ची किताब है, और इसमें बताई गई हर बात हक़ है। जो शख्स इस किताब को पकड़ लेता है, वह कभी गुमराह नहीं हो सकता। यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह का कलाम कितना पाक और सच्चा है — इसमें न तो कोई कमी है और न ही कोई झूठ। इसलिए हमें चाहिए कि हम इस किताब को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें, ताकि हम भी उन लोगों में शामिल हों जिन्हें अल्लाह की रहमत और हिदायत हासिल होती है। यही सच्ची कामयाबी है — दुनिया में भी और आख़िरत में भी।



📜 आयत 250-254 — सूरा अल-बकरा

250وَلَمَّا بَرَزُوا لِجَالُوتَ وَجُنُودِهِ قَالُوا رَبَّنَا أَفْرِغْ عَلَيْنَا صَبْرًا وَثَبِّتْ أَقْدَامَنَا وَانصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ
(ग़रज़) जब ये लोग जालूत और उसकी फौज के मुक़ाबले को निकले तो दुआ की ऐ मेरे परवरदिगार हमें कामिल सब्र अता फरमा और मैदाने जंग में हमारे क़दम जमाए रख और हमें काफिरों पर फतेह इनायत कर
251فَهَزَمُوهُم بِإِذْنِ اللَّهِ وَقَتَلَ دَاوُودُ جَالُوتَ وَآتَاهُ اللَّهُ الْمُلْكَ وَالْحِكْمَةَ وَعَلَّمَهُ مِمَّا يَشَاءُ ۗ وَلَوْلَا دَفْعُ اللَّهِ النَّاسَ بَعْضَهُم بِبَعْضٍ لَّفَسَدَتِ الْأَرْضُ وَلَٰكِنَّ اللَّهَ ذُو فَضْلٍ عَلَى الْعَالَمِينَ
फिर तो उन लोगों ने ख़ुदा के हुक्म से दुशमनों को शिकस्त दी और दाऊद ने जालूत को क़त्ल किया और ख़ुदा ने उनको सल्तनत व तदबीर तम्द्दुन अता की और इल्म व हुनर जो चाहा उन्हें गोया घोल के पिला दिया और अगर ख़ुदा बाज़ लोगों के ज़रिए से बाज़ का दफाए (शर) न करता तो तमाम रुए ज़मीन पर फ़साद फैल जाता मगर ख़ुदा तो सारे जहाँन के लोगों पर फज़ल व रहम करता है
252تِلْكَ آيَاتُ اللَّهِ نَتْلُوهَا عَلَيْكَ بِالْحَقِّ ۚ وَإِنَّكَ لَمِنَ الْمُرْسَلِينَ
ऐ रसूल ये ख़ुदा की सच्ची आयतें हैं जो हम तुम को ठीक ठीक पढ़के सुनाते हैं और बेशक तुम ज़रुर रसूलों में से हो
253۞ تِلْكَ الرُّسُلُ فَضَّلْنَا بَعْضَهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ ۘ مِّنْهُم مَّن كَلَّمَ اللَّهُ ۖ وَرَفَعَ بَعْضَهُمْ دَرَجَاتٍ ۚ وَآتَيْنَا عِيسَى ابْنَ مَرْيَمَ الْبَيِّنَاتِ وَأَيَّدْنَاهُ بِرُوحِ الْقُدُسِ ۗ وَلَوْ شَاءَ اللَّهُ مَا اقْتَتَلَ الَّذِينَ مِن بَعْدِهِم مِّن بَعْدِ مَا جَاءَتْهُمُ الْبَيِّنَاتُ وَلَٰكِنِ اخْتَلَفُوا فَمِنْهُم مَّنْ آمَنَ وَمِنْهُم مَّن كَفَرَ ۚ وَلَوْ شَاءَ اللَّهُ مَا اقْتَتَلُوا وَلَٰكِنَّ اللَّهَ يَفْعَلُ مَا يُرِيدُ
यह सब रसूल (जो हमने भेजे) उनमें से बाज़ को बाज़ पर फज़ीलत दी उनमें से बाज़ तो ऐसे हैं जिनसे ख़ुद ख़ुदा ने बात की उनमें से बाज़ के (और तरह पर) दर्जे बुलन्द किये और मरियम के बेटे ईसा को (कैसे कैसे रौशन मौजिज़े अता किये) और रूहुलकुदस (जिबरईल) के ज़रिये से उनकी मदद की और अगर ख़ुदा चाहता तो लोग इन (पैग़म्बरों) के बाद हुये वह अपने पास रौशन मौजिज़े आ चुकने पर आपस में न लड़ मरते मगर उनमें फूट पड़ गई पस उनमें से बाज़ तो ईमान लाये और बाज़ काफ़िर हो गये और अगर ख़ुदा चाहता तो यह लोग आपस में लड़ते मगर ख़ुदा वही करता है जो चाहता है
254يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا أَنفِقُوا مِمَّا رَزَقْنَاكُم مِّن قَبْلِ أَن يَأْتِيَ يَوْمٌ لَّا بَيْعٌ فِيهِ وَلَا خُلَّةٌ وَلَا شَفَاعَةٌ ۗ وَالْكَافِرُونَ هُمُ الظَّالِمُونَ
ऐ ईमानदारों जो कुछ हमने तुमको दिया है उस दिन के आने से पहले (ख़ुदा की राह में) ख़र्च करो जिसमें न तो ख़रीदो फरोख्त होगी और न यारी (और न आशनाई) और न सिफ़ारिश (ही काम आयेगी) और कुफ़्र करने वाले ही तो जुल्म ढाते हैं
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीअवतरण स्थान
252आयत

अनुवाद — अल-बकरा 252

सूरा अल-बकरा आयत 252 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ रसूल ये ख़ुदा की सच्ची आयतें हैं जो हम…

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Monday, September 28, 2026

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