Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- तिल्क (تِلْكَ): ये, वो (पहले से बताई गई बातों की ओर इशारा)
- आयातुल्लाह (آيَاتُ اللَّهِ): अल्लाह की निशानियाँ, उसकी स्पष्ट दलीलें और प्रमाण
- नत्लूहा (نَتْلُوهَا): हम पढ़कर सुनाते हैं, हम व्यक्त करते हैं
- बिलहक़्क़ (بِالْحَقِّ): सच्चाई के साथ, पूरी सच्चाई पर आधारित
- लमिनल मुरसलीन (لَمِنَ الْمُرْسَلِينَ): निश्चित रूप से भेजे गए रसूलों में से
विस्तृत तफ़सीर:
यह आयत उन सारी घटनाओं और किस्सों की ओर संकेत करती है जो इससे पहले सूरह अल-बक़रह में बयान की गईं — जैसे हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) और बनी इसराईल के क़िस्से, तालूत और जालूत की घटना, हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) की फ़ज़ीलत, और अन्य ऐतिहासिक सबक़। ये सब "आयातुल्लाह" हैं — अल्लाह की निशानियाँ और उसकी स्पष्ट दलीलें, जो अकेले उसी की तरफ़ से हैं।
अल्लाह तआला फ़रमाता है: "ये अल्लाह की आयतें हैं जिन्हें हम तुम्हें सच्चाई के साथ सुनाते हैं।" यानी ये महज़ कहानियाँ या क़िस्से नहीं हैं, बल्कि हर एक घटना में सच्चाई की रोशनी है, हर एक वाक़िया में हिदायत का पैग़ाम है। इनमें कोई झूठ नहीं, कोई मिलावट नहीं — ये सब सच्चाई पर आधारित हैं, क्योंकि ये उस अल्लाह की तरफ़ से हैं जो सब कुछ जानता है और जिसका बयान हक़ से भरपूर है।
फिर अल्लाह तआला अपने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को दिलासा देते हुए फ़रमाता है: "और निश्चय ही आप अल्लाह के भेजे हुए रसूलों में से हैं।" यह एक ऐसी तसल्ली है जो दिल को सुकून देती है — कि ऐ नबी! आप सच्चे रसूल हैं, आपका दावा सच्चा है, आपकी रिसालत अल्लाह की तरफ़ से है। यह सिर्फ़ तसल्ली ही नहीं, बल्कि उम्मत के लिए भी सबूत है कि मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) सच्चे नबी हैं, और उन पर जो कुछ नाज़िल हुआ वह अल्लाह ही की तरफ़ से है।
दावती पहलू:
इस आयत में हमारे लिए बड़ी नसीहत और खुशख़बरी है। जिस तरह अल्लाह ने अपने नबी को तसल्ली दी कि "आप रसूलों में से हैं", उसी तरह हर मोमिन को यक़ीन होना चाहिए कि क़ुरआन अल्लाह की सच्ची किताब है, और इसमें बताई गई हर बात हक़ है। जो शख्स इस किताब को पकड़ लेता है, वह कभी गुमराह नहीं हो सकता। यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह का कलाम कितना पाक और सच्चा है — इसमें न तो कोई कमी है और न ही कोई झूठ। इसलिए हमें चाहिए कि हम इस किताब को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें, ताकि हम भी उन लोगों में शामिल हों जिन्हें अल्लाह की रहमत और हिदायत हासिल होती है। यही सच्ची कामयाबी है — दुनिया में भी और आख़िरत में भी।
📜 आयत 250-254 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 252
सूरा अल-बकरा आयत 252 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ रसूल ये ख़ुदा की सच्ची आयतें हैं जो हम…सूरा आयत 252/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 250–254. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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