अल-बकरा · 92/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
۞ وَلَقَدۡ جَآءَكُم مُّوسَىٰ بِٱلۡبَيِّنَٰتِ ثُمَّ ٱتَّخَذۡتُمُ ٱلۡعِجۡلَ مِنۢ بَعۡدِهِۦ وَأَنتُمۡ ظَٰلِمُونَ  ۝٩٢
Wa laqad jaaa`akum Moosa bilbaiyinaati summat takhaztunmul `ijla mim ba`dihee wa antum zaalimoon
📖 हिंदी अर्थ
और तुम्हारे पास मूसा तो वाज़ेए व रौशन मौजिज़े लेकर आ ही चुके थे फिर भी तुमने उनके बाद बछड़े को खुदा बना ही लिया और उससे तुम अपने ही ऊपर ज़ुल्म करने वाले थे
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بِالْبَيِّنَاتِ: स्पष्ट प्रमाण और चमत्कार जो सत्य को प्रकट करते हैं।
  • اتَّخَذْتُمُ: तुमने बना लिया / अपना लिया।
  • الْعِجْلَ: बछड़ा (सोने का बछड़ा जिसे बनी इसराइल ने पूजा बनाया था)।
  • مِن بَعْدِهِ: उसके (मूसा अलैहिस्सलाम के जाने के) बाद।
  • ظَالِمُونَ: अत्याचारी / सीमा से आगे बढ़ने वाले (क्योंकि उन्होंने अल्लाह के साथ शिर्क किया)।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला बनी इसराइल को उनके पूर्वजों के कृत्यों की याद दिलाते हुए फरमाता है कि तुम्हारे पास मूसा अलैहिस्सलाम स्पष्ट चमत्कार और प्रमाण लेकर आए, जो उनके सच्चे नबी होने का सबूत थे। इन चमत्कारों में तूफान, टिड्डियाँ, जूँ, मेंढक, खून, लाठी का साँप बनना, हाथ का चमकना, और समुद्र का चीरा जाना जैसी निशानियाँ शामिल थीं। ये सब इसलिए थे कि वे अल्लाह की एकता और मूसा अलैहिस्सलाम की सच्चाई को समझ लें।

इसके बावजूद, जब मूसा अलैहिस्सलाम अल्लाह से मिलने के लिए तूर पर्वत पर गए (मीक़ात के लिए), तो तुमने उनके जाने के बाद सोने का एक बछड़ा बनाकर उसे अपना पूज्य बना लिया। यह कृत्य अत्यंत घोर अत्याचार और अज्ञानता थी, क्योंकि तुमने उस अल्लाह को छोड़ दिया जिसने तुम्हें नेमतें दीं और तुम्हें फ़िरऔन की गुलामी से छुड़ाया, और एक बेजान मूर्ति की पूजा करने लगे। यह सिर्फ़ गलती नहीं थी, बल्कि जानबूझकर किया गया अत्याचार था, क्योंकि तुम्हारे पास सच्चाई के स्पष्ट प्रमाण पहले से मौजूद थे।


फ़ायदे (सबक और शिक्षाएँ):

  1. अल्लाह की नेमतों की याद: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की दी हुई नेमतों और भेजे गए रसूलों के प्रमाणों को कभी नहीं भूलना चाहिए। कृतघ्नता अल्लाह के क्रोध का कारण बनती है।
  2. सच्चाई के सामने हठधर्मिता विनाशकारी है: बनी इसराइल के पास स्पष्ट चमत्कार थे, फिर भी उन्होंने बछड़े की पूजा की। यह दर्शाता है कि ज्ञान और प्रमाण के बाद भी अगर इंसान अपनी इच्छाओं का पालन करे, तो वह कितनी बड़ी गुमराही में गिर सकता है।
  3. शिर्क सबसे बड़ा अत्याचार है: अल्लाह ने इस आयत में बछड़े की पूजा को "ज़ुल्म" (अत्याचार) कहा। यह हमें सिखाता है कि अल्लाह के साथ किसी को साझी ठहराना सबसे बड़ा अन्याय है, और मुसलमान को चाहिए कि वह अपने ईमान को शिर्क से बचाए।
  4. रसूलों की सुन्नत का अनुसरण: जिस तरह बनी इसराइल ने मूसा अलैहिस्सलाम की अनुपस्थिति में गलती की, उसी तरह आज हमें चाहिए कि नबी ﷺ की शिक्षाओं को थामे रहें और उनके बताए रास्ते से न भटकें।
  5. तौबा का दरवाज़ा खुला है: इस घटना के बाद बनी इसराइल ने तौबा की और अल्लाह ने उन्हें माफ़ किया। यह हमें सिखाता है कि चाहे कितनी ही बड़ी गलती हो, अल्लाह की रहमत से निराश नहीं होना चाहिए और सच्चे दिल से तौबा करनी चाहिए।
🎧 सुनें

📜 आयत 90-94 — अल-बकरा

90بِئۡسَمَا ٱشۡتَرَوۡاْ بِهِۦٓ أَنفُسَهُمۡ أَن يَكۡفُرُواْ بِمَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ بَغۡيًا أَن يُنَزِّلَ ٱللَّهُ مِن فَضۡلِهِۦ عَلَىٰ مَن يَشَآءُ مِنۡ عِبَادِهِۦۖ فَبَآءُو بِغَضَبٍ عَلَىٰ غَضَبٍۚ وَلِلۡكَٰفِرِينَ عَذَابٌ مُّهِينٌ 
क्या ही बुरा है वह काम जिसके मुक़ाबले में (इतनी बात पर) वह लोग अपनी जानें बेच बैठे हैं कि खुदा अपने बन्दों से जिस पर चाहे अपनी इनायत से किताब नाज़िल किया करे इस रश्क से जो कुछ खुदा ने नाज़िल किया है सबका इन्कार कर बैठे पस उन पर ग़ज़ब पर ग़ज़ब टूट पड़ा और काफ़िरों के लिए (बड़ी) रूसवाई का अज़ाब है
91وَإِذَا قِيلَ لَهُمۡ ءَامِنُواْ بِمَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ قَالُواْ نُؤۡمِنُ بِمَآ أُنزِلَ عَلَيۡنَا وَيَكۡفُرُونَ بِمَا وَرَآءَهُۥ وَهُوَ ٱلۡحَقُّ مُصَدِّقًا لِّمَا مَعَهُمۡۗ قُلۡ فَلِمَ تَقۡتُلُونَ أَنۢبِيَآءَ ٱللَّهِ مِن قَبۡلُ إِن كُنتُم مُّؤۡمِنِينَ 
और जब उनसे कहा गया कि (जो क़ुरान) खुदा ने नाज़िल किया है उस पर ईमान लाओ तो कहने लगे कि हम तो उसी किताब (तौरेत) पर ईमान लाए हैं जो हम पर नाज़िल की गई थी और उस किताब (कुरान) को जो उसके बाद आई है नहीं मानते हैं हालाँकि वह (क़ुरान) हक़ है और उस किताब (तौरेत) की जो उनके पास है तसदीक़ भी करती है मगर उस किताब कुरान का जो उसके बाद आई है इन्कार करते हैं (ऐ रसूल) उनसे ये तो पूछो कि तुम (तुम्हारे बुर्जुग़) अगर ईमानदार थे तो फिर क्यों खुदा के पैग़म्बरों का साबिक़ क़त्ल करते थे
92۞ وَلَقَدۡ جَآءَكُم مُّوسَىٰ بِٱلۡبَيِّنَٰتِ ثُمَّ ٱتَّخَذۡتُمُ ٱلۡعِجۡلَ مِنۢ بَعۡدِهِۦ وَأَنتُمۡ ظَٰلِمُونَ 
और तुम्हारे पास मूसा तो वाज़ेए व रौशन मौजिज़े लेकर आ ही चुके थे फिर भी तुमने उनके बाद बछड़े को खुदा बना ही लिया और उससे तुम अपने ही ऊपर ज़ुल्म करने वाले थे
93وَإِذۡ أَخَذۡنَا مِيثَٰقَكُمۡ وَرَفَعۡنَا فَوۡقَكُمُ ٱلطُّورَ خُذُواْ مَآ ءَاتَيۡنَٰكُم بِقُوَّةٍ وَٱسۡمَعُواْۖ قَالُواْ سَمِعۡنَا وَعَصَيۡنَا وَأُشۡرِبُواْ فِي قُلُوبِهِمُ ٱلۡعِجۡلَ بِكُفۡرِهِمۡۚ قُلۡ بِئۡسَمَا يَأۡمُرُكُم بِهِۦٓ إِيمَٰنُكُمۡ إِن كُنتُم مُّؤۡمِنِينَ 
और (वह वक्त याद करो) जब हमने तुमसे अहद लिया और (क़ोहे) तूर को (तुम्हारी उदूले हुक्मी से) तुम्हारे सर पर लटकाया और (हमने कहा कि ये किताब तौरेत) जो हमने दी है मज़बूती से लिए रहो और (जो कुछ उसमें है) सुनो तो कहने लगे सुना तो (सही लेकिन) हम इसको मानते नहीं और उनकी बेईमानी की वजह से (गोया) बछड़े की उलफ़त घोल के उनके दिलों में पिला दी गई (ऐ रसूल) उन लोगों से कह दो कि अगर तुम ईमानदार थे तो तुमको तुम्हारा ईमान क्या ही बुरा हुक्म करता था
94قُلۡ إِن كَانَتۡ لَكُمُ ٱلدَّارُ ٱلۡأٓخِرَةُ عِندَ ٱللَّهِ خَالِصَةً مِّن دُونِ ٱلنَّاسِ فَتَمَنَّوُاْ ٱلۡمَوۡتَ إِن كُنتُمۡ صَٰدِقِينَ 
(ऐ रसूल) इन लोगों से कह दो कि अगर खुदा के नज़दीक आख़ेरत का घर (बेहिश्त) ख़ास तुम्हारे वास्ते है और लोगों के वासते नहीं है पस अगर तुम सच्चे हो तो मौत की आरजू क़रो
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीRevelation
92आयत

अनुवाद — अल-बकरा 92

सूरा आयत 92/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 90–94. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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