ताहा · 126/135
अनुवाद उच्चारण — सूरा ताहा
قَالَ كَذَٰلِكَ أَتَتْكَ آيَاتُنَا فَنَسِيتَهَا ۖ وَكَذَٰلِكَ الْيَوْمَ تُنسَىٰ ۝١٢٦
Qaala kazaalika atatka Aayaatunaa fanaseetahaa wa kazaalikal Yawma tunsaa
📖 हिंदी अर्थ
खुदा फरमाएगा ऐसा ही (होना चाहिए) हमारी आयतें भी तो तेरे पास आई तो तू उन्हें भुला बैठा और इसी तरह आज तू भी भूला दिया जाएगा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَنَسِيتَهَا (तो तूने उन्हें भुला दिया): यहाँ 'भुलाने' का अर्थ केवल याददाश्त से भूलना नहीं है, बल्कि जानबूझकर उन्हें अनदेखा करना, उन पर अमल न करना और उनसे मुँह मोड़ लेना है।
  • تُنسَى (तुझे भुला दिया जाएगा): अर्थात तुझे रहमत से दूर करके आज़ाब में छोड़ दिया जाएगा, जैसे कोई चीज़ भुला दी जाती है।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला उस इंसान को जवाब देते हुए फ़रमाता है जो आख़िरत में अंधा उठाया जाने पर हैरान होकर पूछेगा: "ऐ मेरे रब! मुझे अंधा क्यों उठाया? मैं तो पहले देखता था?" तो अल्लाह फ़रमाएगा: "ठीक इसी तरह जैसा तूने दुनिया में किया था। तेरे पास मेरी आयतें (निशानियाँ, क़ुरआन, रसूल और साफ़ सबूत) आईं, लेकिन तूने उन्हें भुला दिया — यानी उन पर ध्यान नहीं दिया, उनसे मुँह मोड़ लिया, और उन पर अमल करना छोड़ दिया। आज के दिन हम भी तुझे भुला देंगे — यानी तुझे रहमत से महरूम करके जहन्नुम की आग में ऐसे छोड़ देंगे जैसे कोई भूली हुई चीज़ हो।"

यह अल्लाह का बिल्कुल सटीक और न्यायपूर्ण बदला है। जिस तरह तूने दुनिया में अल्लाह की आयतों को अनदेखा किया और उन्हें छोड़ दिया, उसी तरह आज अल्लाह तुझे अपनी रहमत से अनदेखा कर देगा। यह कोई ज़ुल्म नहीं, बल्कि तेरे अपने किए का फल है।

दावत और नसीहत:

यह आयत हमारे लिए बहुत बड़ी नसीहत और चेतावनी है। अल्लाह तआला ने हमें क़ुरआन, रसूल ﷺ और हर तरफ़ फैली हुई अपनी निशानियाँ देकर रास्ता दिखाया है। यह अल्लाह की बड़ी मेहरबानी है कि उसने हमें अंधेरे में नहीं छोड़ा, बल्कि रोशनी दी। अगर हम इन आयतों को पढ़कर भी उन पर अमल न करें, उन्हें अनदेखा कर दें, तो यह हमारी नाइंशाफी है। अल्लाह रहीम और करीम है — वह चाहता है कि हम उसकी तरफ़ लौटें, तौबा करें और अपनी ज़िंदगी को उसकी राह पर चलाएँ। आज अगर हम क़ुरआन को अपना रहनुमा बना लें, तो क़यामत के दिन हमें रोशनी मिलेगी, अंधापन नहीं। यह मौक़ा हमारे पास है — आओ, हम अपने रब की आयतों को ग़ौर से पढ़ें, समझें और उन पर अमल करें, ताकि आख़िरत में हमारा हाल उस बदनसीब इंसान जैसा न हो। अल्लाह हमें अमल की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 124-128 — सूरा ताहा

124وَمَنْ أَعْرَضَ عَن ذِكْرِي فَإِنَّ لَهُ مَعِيشَةً ضَنكًا وَنَحْشُرُهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ أَعْمَىٰ
और जिस शख्स ने मेरी याद से मुँह फेरा तो उसकी ज़िन्दगी बहुत तंगी में बसर होगी और हम उसको क़यामत के दिन अंधा बना के उठाएँगे
125قَالَ رَبِّ لِمَ حَشَرْتَنِي أَعْمَىٰ وَقَدْ كُنتُ بَصِيرًا
वह कहेगा इलाही मैं तो (दुनिया में) ऑंख वाला था तूने मुझे अन्धा करके क्यों उठाया
126قَالَ كَذَٰلِكَ أَتَتْكَ آيَاتُنَا فَنَسِيتَهَا ۖ وَكَذَٰلِكَ الْيَوْمَ تُنسَىٰ
खुदा फरमाएगा ऐसा ही (होना चाहिए) हमारी आयतें भी तो तेरे पास आई तो तू उन्हें भुला बैठा और इसी तरह आज तू भी भूला दिया जाएगा
127وَكَذَٰلِكَ نَجْزِي مَنْ أَسْرَفَ وَلَمْ يُؤْمِن بِآيَاتِ رَبِّهِ ۚ وَلَعَذَابُ الْآخِرَةِ أَشَدُّ وَأَبْقَىٰ
और जिसने (हद से) तजाविज़ किया और अपने परवरदिगार की आयतों पर ईमान न लाया उसको ऐसी ही बदला देगें और आख़िरत का अज़ाब तो यक़ीनी बहुत सख्त और बहुत देर पा है
128أَفَلَمْ يَهْدِ لَهُمْ كَمْ أَهْلَكْنَا قَبْلَهُم مِّنَ الْقُرُونِ يَمْشُونَ فِي مَسَاكِنِهِمْ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّأُولِي النُّهَىٰ
तो क्या उन (अहले मक्का) को उस (खुदा) ने ये नहीं बता दिया था कि हमने उनके पहले कितने लोगों को हलाक कर डाला जिनके घरों में ये लोग चलते फिरते हैं इसमें शक नहीं कि उसमें अक्लमंदों के लिए (कुदरते खुदा की) यक़ीनी बहुत सी निशानियाँ हैं
ताहाकुरान सूची
135आयत
मक्कीअवतरण स्थान
126आयत

अनुवाद — ताहा 126

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Sunday, October 4, 2026

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