अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- طَيِّبَات – पवित्र, अच्छी और हलाल चीज़ें
- تَطْغَوْا – सीमा से आगे बढ़ना, अत्याचार करना, उल्लंघन करना
- فَيَحِلَّ – तो अनिवार्य हो जाए, नाज़िल हो जाए
- غَضَبِي – मेरा क्रोध (अल्लाह का प्रकोप)
- هَوَى – विनष्ट हो गया, बर्बाद हो गया, गिर पड़ा
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने बंदों पर अपनी असीम रहमत और करम का ज़िक्र करते हुए फ़रमाता है कि हमने तुम्हें जो कुछ भी दिया है—चाहे वह खाने-पीने की चीज़ें हों, या अन्य नेमतें—उनमें से पवित्र और हलाल चीज़ें खाओ। यानी अल्लाह ने जो कुछ हलाल और पाक किया है, उसे शुक्र के साथ इस्तेमाल करो। लेकिन साथ ही वह सख़्त तनबीह (चेतावनी) भी देता है: "और उसमें सीमा से आगे न बढ़ो।"
इसका मतलब यह है कि अल्लाह की दी हुई नेमतों में किसी तरह का अतिक्रमण न करो—न हलाल को हराम समझकर उसे छोड़ने का रास्ता अपनाओ, न हराम को हलाल ठहराकर उसकी तरफ बढ़ो, न फिज़ूलखर्ची और इसराफ़ करो, और न ही दूसरों के हक़ को मारकर अपने लिए हलाल चीज़ें हड़प करो। यह भी शामिल है कि अल्लाह की नेमतों का इस्तेमाल करते हुए उसकी नाफ़रमानी में मदद न लो, और न ही नेमत पाकर इतराओ और घमंड करो।
फिर अल्लाह फ़रमाता है: "तो तुम पर मेरा क्रोध अनिवार्य हो जाएगा।" यानी जो लोग इस हद से आगे बढ़ जाते हैं, वे अल्लाह के ग़ज़ब के हक़दार बन जाते हैं। और फिर वह बड़ी ही सख़्त और डरावनी बात कहता है: "और जिस पर मेरा क्रोध नाज़िल हो गया, वह निश्चित रूप से विनष्ट हो गया।" यानी ऐसा व्यक्ति दुनिया में भी राहत नहीं पा सकता और आख़िरत में भी उसका ठिकाना जहन्नम है। वह भटककर हलाकत के गड्ढे में गिर गया, उसका कोई उद्धार नहीं।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की नेमतें उसकी रहमत का इनाम हैं, और उनका सही इस्तेमाल ही शुक्रगुज़ारी है। जो बंदा अल्लाह की दी हुई चीज़ों में संयम और अदल को अपनाता है, वह अल्लाह की मुहब्बत और उसकी हिफ़ाज़त का हक़दार बनता है। दूसरी तरफ जो लोग नेमतों को देखकर सरकश हो जाते हैं, वे अल्लाह के क्रोध को दावत देते हैं। यह आयत हमें यह भी बताती है कि इस्लाम में खाने-पीने और जीने का तरीक़ा सिर्फ़ पेट भरना नहीं, बल्कि अल्लाह की रज़ा का तलबगार होना है। हलाल कमाओ, पाक खाओ, और अल्लाह के बताए हुए तरीक़े पर चलो—यही वह रास्ता है जो दुनिया में सुकून और आख़िरत में कामयाबी देता है। अल्लाह तआला हम सबको इस रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 79-83 — ताहा
अनुवाद — ताहा 81
सूरा ताहा आयत 81 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (फ़रमाया) कि हमने जो पाक व पाक़ीज़ा रोज़ी तुम्हें…सूरा आयत 81/135 — ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ताहा सुनें, ताहा अनुवाद, ताहा mp3, ताहा pdf. आयत 79–83. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








