Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَابَ: अपने पापों और कुकर्मों से पलटकर अल्लाह की ओर लौटना, सच्ची तौबा करना।
- آمَنَ: अल्लाह पर, उसके रसूल पर और उसकी लाई हुई हर चीज़ पर ईमान लाना।
- عَمِلَ صَالِحًا: नेक और अच्छे काम करना, जो अल्लाह और उसके रसूल को पसंद हों।
- اهْتَدَىٰ: हिदायत पर क़ायम रहना, सीधे रास्ते पर स्थिर रहना और सुन्नत को अपनाना।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने बंदों पर बेइंतिहा रहमत और मेहरबानी करने वाला है। वह फ़रमाता है कि मैं बहुत बड़ा क्षमा करने वाला हूँ, मगर यह क्षमा हर किसी के लिए नहीं है, बल्कि उन लोगों के लिए है जो चार शर्तें पूरी करें:
पहली शर्त: तौबा — यानी इंसान अपने गुनाहों पर पछताए, उन्हें तुरंत छोड़ दे, और आगे कभी न करने का पक्का इरादा करे। यह तौबा दिल से होनी चाहिए, सिर्फ ज़ुबान से नहीं।
दूसरी शर्त: ईमान — यानी अल्लाह पर, उसके फ़रिश्तों पर, उसकी किताबों पर, उसके रसूलों पर, क़यामत के दिन पर और तक़दीर के अच्छे-बुरे पर सच्चा विश्वास हो।
तीसरी शर्त: नेक अमल — यानी ईमान के बाद इंसान अपने अमल को सुधारे, फ़र्ज़ निबाहे, और अच्छे काम करे। सिर्फ ईमान का दावा काफी नहीं, बल्कि अमल से उसे साबित करे।
चौथी शर्त: हिदायत पर स्थिर रहना — यानी तौबा और ईमान के बाद इंसान सीधे रास्ते पर क़ायम रहे, सुन्नत को अपनाए, और अल्लाह की राह पर चलता रहे। यहाँ "फिर हिदायत पाई" का मतलब यह है कि वह अपनी ज़िंदगी के आखिरी लम्हे तक इसी राह पर डटा रहे।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत अल्लाह की रहमत का सबसे खूबसूरत पैगाम है! यह हमें बताती है कि चाहे इंसान कितना ही गुनाहगार क्यों न हो, अल्लाह का दरवाज़ा हमेशा खुला है। वह क्षमा करने वाला है, मगर शर्त यह है कि हम सच्चे दिल से उसकी तरफ लौटें। यह आयत हमें उम्मीद देती है कि अल्लाह की रहमत से कोई निराश न हो। अगर आज आप गलत रास्ते पर हैं, तो निराश न हों — बस सच्चे दिल से तौबा करें, ईमान लाएं, नेक काम शुरू करें, और हिदायत पर जमे रहें। अल्लाह की मगफिरत (क्षमा) इतनी विशाल है कि वह हर गुनाह को मिटा सकती है। यही वह रास्ता है जो हमें जहन्नुम से बचाकर जन्नत तक पहुँचाता है।
📜 आयत 80-84 — सूरा ताहा
अनुवाद — ताहा 82
सूरा ताहा आयत 82 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो शख्स तौबा करे और ईमान लाए और अच्छे…सूरा आयत 82/135 — सूरा ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ताहा सुनें, सूरा ताहा अनुवाद, सूरा ताहा mp3, सूरा ताहा pdf. आयत 80–84. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा ताहा
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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