ताहा · 82/135
अनुवाद उच्चारण — ताहा
وَإِنِّي لَغَفَّارٌ لِّمَن تَابَ وَآمَنَ وَعَمِلَ صَالِحًا ثُمَّ اهْتَدَىٰ ۝٨٢
Wa innee la Ghaffaarul liman taaba wa aamana wa `amila saalihan summah tadaa
📖 हिंदी अर्थ
और जो शख्स तौबा करे और ईमान लाए और अच्छे काम करे फिर साबित क़दम रहे तो हम उसको ज़रूर बख्शने वाले हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَابَ: अपने पापों और कुकर्मों से पलटकर अल्लाह की ओर लौटना, सच्ची तौबा करना।
  • آمَنَ: अल्लाह पर, उसके रसूल पर और उसकी लाई हुई हर चीज़ पर ईमान लाना।
  • عَمِلَ صَالِحًا: नेक और अच्छे काम करना, जो अल्लाह और उसके रसूल को पसंद हों।
  • اهْتَدَىٰ: हिदायत पर क़ायम रहना, सीधे रास्ते पर स्थिर रहना और सुन्नत को अपनाना।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपने बंदों पर बेइंतिहा रहमत और मेहरबानी करने वाला है। वह फ़रमाता है कि मैं बहुत बड़ा क्षमा करने वाला हूँ, मगर यह क्षमा हर किसी के लिए नहीं है, बल्कि उन लोगों के लिए है जो चार शर्तें पूरी करें:

पहली शर्त: तौबा — यानी इंसान अपने गुनाहों पर पछताए, उन्हें तुरंत छोड़ दे, और आगे कभी न करने का पक्का इरादा करे। यह तौबा दिल से होनी चाहिए, सिर्फ ज़ुबान से नहीं।

दूसरी शर्त: ईमान — यानी अल्लाह पर, उसके फ़रिश्तों पर, उसकी किताबों पर, उसके रसूलों पर, क़यामत के दिन पर और तक़दीर के अच्छे-बुरे पर सच्चा विश्वास हो।

तीसरी शर्त: नेक अमल — यानी ईमान के बाद इंसान अपने अमल को सुधारे, फ़र्ज़ निबाहे, और अच्छे काम करे। सिर्फ ईमान का दावा काफी नहीं, बल्कि अमल से उसे साबित करे।

चौथी शर्त: हिदायत पर स्थिर रहना — यानी तौबा और ईमान के बाद इंसान सीधे रास्ते पर क़ायम रहे, सुन्नत को अपनाए, और अल्लाह की राह पर चलता रहे। यहाँ "फिर हिदायत पाई" का मतलब यह है कि वह अपनी ज़िंदगी के आखिरी लम्हे तक इसी राह पर डटा रहे।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत अल्लाह की रहमत का सबसे खूबसूरत पैगाम है! यह हमें बताती है कि चाहे इंसान कितना ही गुनाहगार क्यों न हो, अल्लाह का दरवाज़ा हमेशा खुला है। वह क्षमा करने वाला है, मगर शर्त यह है कि हम सच्चे दिल से उसकी तरफ लौटें। यह आयत हमें उम्मीद देती है कि अल्लाह की रहमत से कोई निराश न हो। अगर आज आप गलत रास्ते पर हैं, तो निराश न हों — बस सच्चे दिल से तौबा करें, ईमान लाएं, नेक काम शुरू करें, और हिदायत पर जमे रहें। अल्लाह की मगफिरत (क्षमा) इतनी विशाल है कि वह हर गुनाह को मिटा सकती है। यही वह रास्ता है जो हमें जहन्नुम से बचाकर जन्नत तक पहुँचाता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 80-84 — ताहा

80يَا بَنِي إِسْرَائِيلَ قَدْ أَنجَيْنَاكُم مِّنْ عَدُوِّكُمْ وَوَاعَدْنَاكُمْ جَانِبَ الطُّورِ الْأَيْمَنَ وَنَزَّلْنَا عَلَيْكُمُ الْمَنَّ وَالسَّلْوَىٰ
ऐ बनी इसराइल हमने तुमको तुम्हारे दुश्मन (के पंजे) से छुड़ाया और तुम से (कोहेतूर) के दाहिने तरफ का वायदा किया और हम ही ने तुम पर मन व सलवा नाज़िल किया
81كُلُوا مِن طَيِّبَاتِ مَا رَزَقْنَاكُمْ وَلَا تَطْغَوْا فِيهِ فَيَحِلَّ عَلَيْكُمْ غَضَبِي ۖ وَمَن يَحْلِلْ عَلَيْهِ غَضَبِي فَقَدْ هَوَىٰ
और (फ़रमाया) कि हमने जो पाक व पाक़ीज़ा रोज़ी तुम्हें दे रखी है उसमें से खाओ (पियो) और उसमें (किसी क़िस्म की) शरारत न करो वरना तुम पर मेरा अज़ाब नाज़िल हो जाएगा और (याद रखो कि) जिस पर मेरा ग़ज़ब नाज़िल हुआ तो वह यक़ीनन गुमराह (हलाक) हुआ
82وَإِنِّي لَغَفَّارٌ لِّمَن تَابَ وَآمَنَ وَعَمِلَ صَالِحًا ثُمَّ اهْتَدَىٰ
और जो शख्स तौबा करे और ईमान लाए और अच्छे काम करे फिर साबित क़दम रहे तो हम उसको ज़रूर बख्शने वाले हैं
83۞ وَمَا أَعْجَلَكَ عَن قَوْمِكَ يَا مُوسَىٰ
फिर जब मूसा सत्तर आदमियों को लेकर चले और खुद बढ़ आए तो हमने कहा कि (ऐ मूसा तुमने अपनी क़ौम से आगे चलने में क्यों जल्दी की)
84قَالَ هُمْ أُولَاءِ عَلَىٰ أَثَرِي وَعَجِلْتُ إِلَيْكَ رَبِّ لِتَرْضَىٰ
ग़रज़ की वह भी तो मेरे ही पीछे चले आ रहे हैं और इसी लिए मैं जल्दी करके तेरे पास इसलिए आगे बढ़ आया हूँ ताकि तू (मुझसे) खुश रहे
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अनुवाद — ताहा 82

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Tuesday, August 18, 2026

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