अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الْمَنَّ (मन्न): एक मीठा पेय या भोजन जो शहद जैसा मीठा होता था, जिसे अल्लाह ने बनी इसराइल पर उनके रेगिस्तानी सफर (तीह) में उतारा।
- السَّلْوَى (सल्वा): एक छोटा पक्षी जिसका मांस स्वादिष्ट होता था, जो बटेर (सुमानी) जैसा दिखता था।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने बंदों पर अपनी महान नेमतों (कृपाओं) का जिक्र करते हुए फरमाता है: "ऐ बनी इसराइल (इस्राईल की संतान)!" यानी ऐ उन लोगों जो हज़रत याकूब (अलैहिस्सलाम) की औलाद से हैं! अल्लाह उन्हें याद दिलाता है कि हमने तुम्हें तुम्हारे दुश्मन फिरौन से नजात (मुक्ति) दिलाई, जो तुम्हें गुलाम बनाए हुए था, तुम्हारे बेटों को ज़िब्ह करता था और तुम्हारी औरतों को ज़िंदा रखता था। हमने तुम्हें उसके चंगुल से छुड़ाया और समंदर को चीरकर तुम्हारे लिए रास्ता बनाया, जबकि फिरौन और उसकी फौज को हमने डुबो दिया।
फिर अल्लाह फरमाता है: "और हमने तुमसे वादा किया तूर (पहाड़) के दाईं तरफ का किनारा" — यानी हमने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को तूर पहाड़ के दाईं ओर बुलाया, ताकि उन्हें तौरात (टोरा) की किताब दी जाए और उनसे कलाम (बातचीत) की जाए। यह एक बहुत बड़ी इज़्ज़त और शरफ थी जो अल्लाह ने उन्हें अता की।
और फिर अल्लाह फरमाता है: "और हमने तुम पर मन्न और सल्वा उतारा" — जब बनी इसराइल मिस्र से निकलकर रेगिस्तान (तीह) में भटक रहे थे, और वहाँ उनके लिए खाने-पीने का कोई सामान नहीं था, तो अल्लाह ने अपनी रहमत से उन पर मन्न (एक मीठा पदार्थ) और सल्वा (बटेर पक्षी) उतारा। यह उनके लिए रोज़ी का सामान बना, जिसे वे खाते थे और उन्हें कोई मेहनत नहीं करनी पड़ती थी। यह अल्लाह की उन पर एक और बड़ी नेमत थी।
दावती पहलू (प्रचारात्मक पहलू):
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने बंदों पर कितना मेहरबान है। जब बंदे मुसीबत में होते हैं, तो अल्लाह उन्हें रास्ता दिखाता है और उनकी मदद करता है। बनी इसराइल को जब वे कमज़ोर और गुलाम थे, अल्लाह ने आज़ादी दी, और जब वे रेगिस्तान में भूखे-प्यासे थे, तो अल्लाह ने उन्हें आसमान से खाना उतारा। यह हमारे लिए सबक है कि हम हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखें। अल्लाह की रहमत और मदद का कोई अंत नहीं है। जब हम अल्लाह के हुक्मों पर चलते हैं और उसकी नेमतों का शुक्र अदा करते हैं, तो अल्लाह हमें और नेमतें देता है। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आखिरत दोनों में कामयाबी देता है। आइए, हम अल्लाह की नेमतों को याद करें और उसके शुक्रगुज़ार बनें, क्योंकि अल्लाह ने हमें भी इस्लाम की नेमत दी है, जो सबसे बड़ी नेमत है।
📜 आयत 78-82 — ताहा
अनुवाद — ताहा 80
सूरा ताहा आयत 80 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ बनी इसराइल हमने तुमको तुम्हारे दुश्मन (के पंजे) से…सूरा आयत 80/135 — ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ताहा सुनें, ताहा अनुवाद, ताहा mp3, ताहा pdf. आयत 78–82. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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