अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَا مِسَاسَ: मतलब "मुझे मत छुओ" या "मैं तुम्हें नहीं छूऊँगा और न तुम मुझे छुओ" — यानी अलग-थलग रहने की स्थिति।
- مَوْعِدًا: एक निश्चित समय या वादे का दिन (यहाँ आख़िरत का दिन)।
- لَّن تُخْلَفَهُ: तुम उस वादे से नहीं बच सकते, वह पूरा होकर रहेगा।
- ظَلْتَ عَلَيْهِ عَاكِفًا: तुम उसकी पूजा में लगातार जुड़े रहे, उसी पर टिके रहे।
- لَنُحَرِّقَنَّهُ: हम उसे (बछड़े को) आग में जला देंगे।
- لَنَنسِفَنَّهُ: हम उसे राख बनाकर समुद्र में उड़ा देंगे।
- الْيَمِّ: समुद्र (यहाँ नील नदी या समुद्र का पानी)।
विस्तृत तफ़सीर (व्याख्या):
हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने सामरी से कहा — जिसने बनी इसराईल को गुमराह करके बछड़े की पूजा पर उभारा था — "जा, तू हमारे पास से निकल जा। तेरी सज़ा यह है कि तू ज़िंदगी भर अकेला और बदनाम रहेगा। तेरी हालत यह होगी कि तू किसी से मिल नहीं सकेगा, लोग तुझसे दूर भागेंगे, और तू खुद भी किसी को छू नहीं पाएगा। तू हमेशा कहता रहेगा: 'मुझे मत छुओ, मैं तुम्हें नहीं छूऊँगा।' यह तेरी दुनियावी सज़ा है।
"और तेरे लिए एक और वादा है — क़ियामत के दिन तुझे हिसाब के लिए खड़ा किया जाएगा और तुझे अपनी सज़ा ज़रूर मिलेगी। तू उस दिन से बच नहीं सकता, क्योंकि अल्लाह का वादा कभी टलता नहीं। तू उस वादे को झुठला नहीं सकता, वह ज़रूर पूरा होगा।
"और अब उस 'पूजनीय' बछड़े को देख, जिसे तूने अपना माबूद बना रखा था और जिसकी इबादत पर तू जमा रहा। हम इसे अभी आग में जलाकर राख कर देंगे, फिर उस राख को समुद्र में उड़ा देंगे, ताकि उसका कोई निशान भी न बचे। तेरा वह माबूद कितना बेबस है कि वह अपनी रक्षा भी नहीं कर सकता!"
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि अल्लाह के सिवा किसी और को पूजना — चाहे वह सोने का बछड़ा हो या दुनिया की कोई और चीज़ — सिर्फ़ बर्बादी और रुसवाई लाता है। जो इंसान अल्लाह को छोड़कर किसी और चीज़ से उम्मीदें बाँधता है, वह आख़िरकार अकेला, बेसहारा और शर्मिंदा होता है। लेकिन जो अल्लाह से जुड़ता है, अल्लाह उसे इज़्ज़त, सुकून और कामयाबी देता है। याद रखिए — अल्लाह का वादा सच्चा है, उसका हिसाब ज़रूर आएगा। इसलिए अपनी ज़िंदगी को सीधे रास्ते पर लगाएँ, और हर उस चीज़ से बचें जो हमें अल्लाह से दूर करे। तौबा का दरवाज़ा हमेशा खुला है — सामरी जैसा गुमराह भी अगर सच्चे दिल से तौबा करता, तो अल्लाह उसे माफ़ कर सकता था, लेकिन उसने हठ किया, इसलिए वह रुसवा हुआ। आप खुशक़िस्मत हैं कि आपको हिदायत मिली है — इस नेमत की क़द्र करें और अल्लाह के फ़रमानों पर चलें।
📜 आयत 95-99 — ताहा
अनुवाद — ताहा 97
सूरा ताहा आयत 97 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उस वक्त मुझे मेरे नफ्स ने यही सुझाया मूसा…सूरा आयत 97/135 — ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ताहा सुनें, ताहा अनुवाद, ताहा mp3, ताहा pdf. आयत 95–99. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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