ताहा · 98/135
अनुवाद उच्चारण — ताहा
إِنَّمَا إِلَٰهُكُمُ اللَّهُ الَّذِي لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۚ وَسِعَ كُلَّ شَيْءٍ عِلْمًا ۝٩٨
Innamaaa ilaahukkumul laahul lazee laa ilaaha illaa Hoo; wasi`a kulla shai`in ilmaa
📖 हिंदी अर्थ
तुम्हारा माबूद तो बस वही ख़ुदा है जिसके सिवा कोई और माबूद बरहक़ नहीं कि उसका इल्म हर चीज़ पर छा गया है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • إِلَٰهُكُمُ: तुम्हारा पूज्य (माबूद)
  • وَسِعَ كُلَّ شَيْءٍ عِلْمًا: उसका ज्ञान हर चीज़ को घेरे हुए है, यानी उसके ज्ञान से कोई चीज़ बाहर नहीं।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ लोगों! तुम्हारा सच्चा पूज्य और माबूद सिर्फ़ अल्लाह ही है। उसके अलावा कोई भी सच्चा माबूद नहीं, जो इबादत के लायक़ हो। चाहे लोगों ने सोने का बछड़ा बनाकर उसे पूजा हो या किसी और चीज़ को अपना माबूद बना लिया हो, ये सब बातिल है। सिर्फ़ अल्लाह ही वो हस्ती है जो सच्चा माबूद है, क्योंकि वही पैदा करने वाला, पालने वाला और सब कुछ जानने वाला है।

उसका ज्ञान हर चीज़ को घेरे हुए है। आसमानों और ज़मीन की हर छोटी-बड़ी चीज़, पत्तों का गिरना, समुद्र की गहराइयों में छिपे राज़, दिलों के भेद, सब कुछ उसके इल्म में है। उसके ज्ञान से कोई चीज़ छिपी नहीं है, न ज़मीन में और न आसमान में। यही वो सिफ़त है जो उसे इबादत के लायक़ बनाती है — वो सब कुछ जानता है, सब कुछ सुनता है, और सब कुछ देखता है।

ये आयत हमें सिखाती है कि जब हम किसी को अपना माबूद बनाते हैं, तो हमें ये देखना चाहिए कि क्या वो हमारी हर ज़रूरत को जानता है? क्या वो हमारी हर दुआ को सुन सकता है? क्या वो हमारी हर परेशानी को दूर कर सकता है? सिर्फ़ अल्लाह ही है जो इन सब पर क़ादिर है। उसका इल्म हर चीज़ पर हावी है, इसलिए वही हमारी इबादत का हक़दार है।

ये आयत हमारे दिलों को उस अज़ीम हस्ती की तरफ़ मोड़ती है जो हमसे बेहद करीब है, हमारी हर बात जानती है, और हमारी हर ज़रूरत से वाक़िफ़ है। जब हम ये यक़ीन कर लें कि अल्लाह का इल्म हर चीज़ को घेरे हुए है, तो हमारा दिल उसकी तरफ़ पूरी तरह मुड़ जाता है, और हम उसी से मदद माँगते हैं, उसी से डरते हैं, और उसी से उम्मीद रखते हैं। यही सच्ची तौहीद है — यही इंसान को दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाती है।



📜 आयत 96-100 — ताहा

96قَالَ بَصُرْتُ بِمَا لَمْ يَبْصُرُوا بِهِ فَقَبَضْتُ قَبْضَةً مِّنْ أَثَرِ الرَّسُولِ فَنَبَذْتُهَا وَكَذَٰلِكَ سَوَّلَتْ لِي نَفْسِي
उसने (जवाब में) कहा मुझे वह चीज़ दिखाई दी जो औरों को न सूझी (जिबरील घोड़े पर सवार जा रहे थे) तो मैंने जिबरील फरिश्ते (के घोड़े) के निशाने क़दम की एक मुट्ठी (ख़ाक) की उठा ली फिर मैंने (बछड़ों के क़ालिब में) डाल दी (तो वह बोलेने लगा
97قَالَ فَاذْهَبْ فَإِنَّ لَكَ فِي الْحَيَاةِ أَن تَقُولَ لَا مِسَاسَ ۖ وَإِنَّ لَكَ مَوْعِدًا لَّن تُخْلَفَهُ ۖ وَانظُرْ إِلَىٰ إِلَٰهِكَ الَّذِي ظَلْتَ عَلَيْهِ عَاكِفًا ۖ لَّنُحَرِّقَنَّهُ ثُمَّ لَنَنسِفَنَّهُ فِي الْيَمِّ نَسْفًا
और उस वक्त मुझे मेरे नफ्स ने यही सुझाया मूसा ने कहा चल (दूर हो) तेरे लिए (इस दुनिया की) ज़िन्दगी में तो (ये सज़ा है) तू कहता फ़िरेगा कि मुझे न छूना (वरना बुख़ार चढ़ जाएगा) और (आख़िरत में भी) यक़ीनी तेरे लिए (अज़ाब का) वायदा है कि हरगिज़ तुझसे ख़िलाफ़ न किया जाएगा और तू अपने माबूद को तो देख जिस (की इबादत) पर तू डट बैठा था कि हम उसे यक़ीनन जलाकर (राख) कर डालेंगे फिर हम उसे तितिर बितिर करके दरिया में उड़ा देगें
98إِنَّمَا إِلَٰهُكُمُ اللَّهُ الَّذِي لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۚ وَسِعَ كُلَّ شَيْءٍ عِلْمًا
तुम्हारा माबूद तो बस वही ख़ुदा है जिसके सिवा कोई और माबूद बरहक़ नहीं कि उसका इल्म हर चीज़ पर छा गया है
99كَذَٰلِكَ نَقُصُّ عَلَيْكَ مِنْ أَنبَاءِ مَا قَدْ سَبَقَ ۚ وَقَدْ آتَيْنَاكَ مِن لَّدُنَّا ذِكْرًا
(ऐ रसूल) हम तुम्हारे सामने यूँ वाक़ेयात बयान करते हैं जो गुज़र चुके और हमने ही तुम्हारे पास अपनी बारगाह से कुरान अता किया
100مَّنْ أَعْرَضَ عَنْهُ فَإِنَّهُ يَحْمِلُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وِزْرًا
जिसने उससे मुँह फेरा वह क़यामत के दिन यक़ीनन (अपने बुरे आमाल का) बोझ उठाएगा
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अनुवाद — ताहा 98

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Tuesday, August 18, 2026

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