ताहा · 99/135
अनुवाद उच्चारण — सूरा ताहा
كَذَٰلِكَ نَقُصُّ عَلَيْكَ مِنْ أَنبَاءِ مَا قَدْ سَبَقَ ۚ وَقَدْ آتَيْنَاكَ مِن لَّدُنَّا ذِكْرًا ۝٩٩
Kazaalika naqussu `alaika min ambaaa`i maa qad sabaq; wa qad aatainaaka mil ladunnaa Zikraa
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) हम तुम्हारे सामने यूँ वाक़ेयात बयान करते हैं जो गुज़र चुके और हमने ही तुम्हारे पास अपनी बारगाह से कुरान अता किया

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • نَقُصُّ – हम सुनाते हैं / वर्णन करते हैं
  • أَنبَاء – समाचार / ख़बरें
  • مَا قَدْ سَبَقَ – जो पहले गुज़र चुका है (पिछली उम्मतों के हालात)
  • مِن لَّدُنَّا – अपनी ओर से / अपने पास से
  • ذِكْرًا – याद दिलाने वाली चीज़ (यानी क़ुरआन)

तफ़सीर:

ऐ नबी! जिस तरह हमने आपको मूसा (अलैहिस्सलाम) और फ़िरऔन तथा उनकी क़ौम के हालात सुनाए, उसी तरह हम आपको उन सब उम्मतों और पैग़म्बरों की ख़बरें सुनाते हैं जो आपसे पहले गुज़र चुकी हैं। यह सब कुछ आपके लिए सबक़ और नसीहत है, और आपके दिल को तसल्ली देने का ज़रिया है, ताकि आपको मालूम हो कि अल्लाह अपने नबियों की हमेशा मदद करता आया है और सच्चाई पर क़ायम रहने वालों को कभी अकेला नहीं छोड़ता।

और साथ ही, हमने आपको अपनी ओर से यह ज़िक्र (क़ुरआन) अता किया है — यह एक ऐसी अज़ीमुश्शान किताब है जो हर उस शख़्स के लिए रौशनी और हिदायत है जो दिल से सीखना चाहता है, जो अपनी ग़लतियों से बाज़ आना चाहता है, और जो अल्लाह की रहमत और मग़फ़िरत का तालिब है। यह क़ुरआन कोई आम किताब नहीं, बल्कि अल्लाह की तरफ़ से एक ख़ज़ाना है जिसमें दुनिया और आख़िरत की भलाईयाँ मौजूद हैं।


दावती पहलू:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला ने हमें कितनी बड़ी नेमत दी है — क़ुरआन की शक्ल में। यह किताब सिर्फ़ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि उस पर अमल करने के लिए उतारी गई है। जो शख्स इसे पढ़ता है, समझता है और उस पर चलता है, अल्लाह उसे दुनिया में इज़्ज़त देता है और आख़िरत में जन्नत अता करता है। आइए, हम इस ज़िक्र को सिर्फ़ तिलावत तक ही महदूद न रखें, बल्कि इसे अपनी ज़िंदगी का नक्शा बनाएँ। यही वह रास्ता है जो हमें कामयाबी की मंज़िल तक पहुँचाएगा — दुनिया में भी और आख़िरत में भी। अल्लाह हम सबको क़ुरआन को समझने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 97-101 — सूरा ताहा

97قَالَ فَاذْهَبْ فَإِنَّ لَكَ فِي الْحَيَاةِ أَن تَقُولَ لَا مِسَاسَ ۖ وَإِنَّ لَكَ مَوْعِدًا لَّن تُخْلَفَهُ ۖ وَانظُرْ إِلَىٰ إِلَٰهِكَ الَّذِي ظَلْتَ عَلَيْهِ عَاكِفًا ۖ لَّنُحَرِّقَنَّهُ ثُمَّ لَنَنسِفَنَّهُ فِي الْيَمِّ نَسْفًا
और उस वक्त मुझे मेरे नफ्स ने यही सुझाया मूसा ने कहा चल (दूर हो) तेरे लिए (इस दुनिया की) ज़िन्दगी में तो (ये सज़ा है) तू कहता फ़िरेगा कि मुझे न छूना (वरना बुख़ार चढ़ जाएगा) और (आख़िरत में भी) यक़ीनी तेरे लिए (अज़ाब का) वायदा है कि हरगिज़ तुझसे ख़िलाफ़ न किया जाएगा और तू अपने माबूद को तो देख जिस (की इबादत) पर तू डट बैठा था कि हम उसे यक़ीनन जलाकर (राख) कर डालेंगे फिर हम उसे तितिर बितिर करके दरिया में उड़ा देगें
98إِنَّمَا إِلَٰهُكُمُ اللَّهُ الَّذِي لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۚ وَسِعَ كُلَّ شَيْءٍ عِلْمًا
तुम्हारा माबूद तो बस वही ख़ुदा है जिसके सिवा कोई और माबूद बरहक़ नहीं कि उसका इल्म हर चीज़ पर छा गया है
99كَذَٰلِكَ نَقُصُّ عَلَيْكَ مِنْ أَنبَاءِ مَا قَدْ سَبَقَ ۚ وَقَدْ آتَيْنَاكَ مِن لَّدُنَّا ذِكْرًا
(ऐ रसूल) हम तुम्हारे सामने यूँ वाक़ेयात बयान करते हैं जो गुज़र चुके और हमने ही तुम्हारे पास अपनी बारगाह से कुरान अता किया
100مَّنْ أَعْرَضَ عَنْهُ فَإِنَّهُ يَحْمِلُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وِزْرًا
जिसने उससे मुँह फेरा वह क़यामत के दिन यक़ीनन (अपने बुरे आमाल का) बोझ उठाएगा
101خَالِدِينَ فِيهِ ۖ وَسَاءَ لَهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ حِمْلًا
और उसी हाल में हमेशा रहेंगे और क्या ही बुरा बोझ है क़यामत के दिन ये लोग उठाए होंगे
ताहाकुरान सूची
135आयत
मक्कीअवतरण स्थान
99आयत

अनुवाद — ताहा 99

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Monday, September 28, 2026

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