ताहा · 100/135
अनुवाद उच्चारण — ताहा
مَّنْ أَعْرَضَ عَنْهُ فَإِنَّهُ يَحْمِلُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وِزْرًا ۝١٠٠
Man a`rada `anhu, fa innahoo yahmilu Yawmal Qiyaamati wizraa
📖 हिंदी अर्थ
जिसने उससे मुँह फेरा वह क़यामत के दिन यक़ीनन (अपने बुरे आमाल का) बोझ उठाएगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَعْرَضَ عَنْهُ: उससे मुँह मोड़ा, उसे छोड़ दिया, उस पर ध्यान नहीं दिया।
  • وِزْرًا: भारी बोझ, बड़ा गुनाह, भारी पाप।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बारे में बताती है जो क़ुरआन से मुँह मोड़ लेते हैं। यानी जो इस किताब को नहीं मानते, इस पर ईमान नहीं लाते, और इसके हुक्मों पर अमल नहीं करते। ऐसे लोगों के लिए बड़ी भयानक खबर है।

जो शख्स क़ुरआन से किनारा कर लेता है, उसकी ज़िंदगी में इस किताब की रोशनी नहीं होती। वह अंधेरों में भटकता रहता है। लेकिन असली अफ़सोस तो क़यामत के दिन होगा, जब वह अपने गुनाहों का भारी बोझ उठाकर अपने रब के सामने हाज़िर होगा। यह बोझ इतना भारी होगा कि उसे ढोना उसके लिए बहुत मुश्किल होगा।

सोचिए! जो इंसान दुनिया में किसी भारी चीज़ को उठाकर थक जाता है, वह उसे नीचे रख सकता है। लेकिन क़यामत के दिन गुनाहों का बोझ ऐसा नहीं होगा कि उतारा जा सके। यह बोझ उसके साथ ही रहेगा और उसे लेकर वह हमेशा के लिए अज़ाब में डाल दिया जाएगा।

यह आयत हमें बड़ी सीख देती है। अल्लाह ने क़ुरआन को हमारी हिदायत के लिए उतारा है। यह कोई आम किताब नहीं, बल्कि ज़िंदगी का पूरा नक्शा है। जो इसे पकड़ लेता है, वह कभी गुमराह नहीं हो सकता। और जो इसे छोड़ देता है, वह खुद अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारता है।

प्यारे भाइयों और बहनों! हमें क़ुरआन से अपना रिश्ता मज़बूत करना चाहिए। इसे पढ़ना चाहिए, समझना चाहिए और इस पर अमल करना चाहिए। यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत तक पहुँचाएगा। क़ुरआन को छोड़ने वालों का अंजाम बहुत बुरा है, लेकिन जो इसे अपनाएगा, उसके लिए हर मुश्किल आसान हो जाएगी और क़यामत के दिन वह हल्का और खुशहाल होगा। अल्लाह हम सबको क़ुरआन पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 98-102 — ताहा

98إِنَّمَا إِلَٰهُكُمُ اللَّهُ الَّذِي لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۚ وَسِعَ كُلَّ شَيْءٍ عِلْمًا
तुम्हारा माबूद तो बस वही ख़ुदा है जिसके सिवा कोई और माबूद बरहक़ नहीं कि उसका इल्म हर चीज़ पर छा गया है
99كَذَٰلِكَ نَقُصُّ عَلَيْكَ مِنْ أَنبَاءِ مَا قَدْ سَبَقَ ۚ وَقَدْ آتَيْنَاكَ مِن لَّدُنَّا ذِكْرًا
(ऐ रसूल) हम तुम्हारे सामने यूँ वाक़ेयात बयान करते हैं जो गुज़र चुके और हमने ही तुम्हारे पास अपनी बारगाह से कुरान अता किया
100مَّنْ أَعْرَضَ عَنْهُ فَإِنَّهُ يَحْمِلُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وِزْرًا
जिसने उससे मुँह फेरा वह क़यामत के दिन यक़ीनन (अपने बुरे आमाल का) बोझ उठाएगा
101خَالِدِينَ فِيهِ ۖ وَسَاءَ لَهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ حِمْلًا
और उसी हाल में हमेशा रहेंगे और क्या ही बुरा बोझ है क़यामत के दिन ये लोग उठाए होंगे
102يَوْمَ يُنفَخُ فِي الصُّورِ ۚ وَنَحْشُرُ الْمُجْرِمِينَ يَوْمَئِذٍ زُرْقًا
जिस दिन सूर फूँका जाएगा और हम उस दिन गुनाहगारों को (उनकी) ऑंखें पुतली (अन्धी) करके (आमने-सामने) जमा करेंगे
ताहाकुरान सूची
135आयत
मक्कीRevelation
100आयत

अनुवाद — ताहा 100

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Tuesday, August 18, 2026

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