Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- مُخْضَرَّةً: हरी-भरी, जिसमें हरियाली हो।
- لَطِيفٌ: बहुत दयालु, सूक्ष्म दृष्टि वाला, जो अपने बंदों के साथ नर्मी और कृपा से पेश आता है।
- خَبِيرٌ: सब कुछ जानने वाला, जिसे हर चीज़ की पूरी खबर हो, खुले और छिपे हर हाल से वाकिफ।
तफसीर:
ऐ नबी! क्या तुमने नहीं देखा कि अल्लाह ने आसमान से पानी बरसाया, और फिर वह ज़मीन जो पहले सूखी और बेजान थी, वह हरी-भरी हो जाती है, उसमें तरह-तरह के पौधे उग आते हैं, और यह सब उसी पानी के ज़रिए होता है? यह अल्लाह की कुदरत का एक ज़िंदा सबूत है। जो अल्लाह मुर्दा ज़मीन को इस तरह ज़िंदा कर देता है, वही क़यामत के दिन मुर्दों को भी ज़िंदा करके उठाएगा।
यहाँ अल्लाह तआला अपने बंदों पर अपनी लुत्फ़ और मेहरबानी का ज़िक्र कर रहा है। वह लतीफ़ है, यानी वह अपने बंदों के साथ नर्मी और कृपा से पेश आता है, उनकी ज़रूरतों को समझता है और उन्हें पूरा करता है। जब ज़मीन को पानी की सख्त ज़रूरत होती है, तो वह आसमान से बारिश भेजता है, और जब पौधों को उगने के लिए मदद चाहिए होती है, तो वह उन्हें उगाता है। यह सब उसकी लुत्फ़ और कृपा का नतीजा है।
और वह ख़बीर है, यानी वह हर चीज़ से पूरी तरह वाकिफ है। उसे मालूम है कि कौन सी ज़मीन किस क़िस्म की फसल के लिए मुनासिब है, कौन सा पानी किस चीज़ के लिए फायदेमंद है, और उसके बंदों के लिए किस चीज़ में भलाई है। उसकी नज़र से कोई चीज़ छिपी नहीं है, न ज़मीन के अंदर की, न आसमान के ऊपर की, न दिलों के राज़ की।
इस आयत में अल्लाह तआला हमें अपनी कुदरत पर ग़ौर करने की तरग़ीब दे रहा है। जब हम देखते हैं कि एक बेजान ज़मीन पानी पड़ते ही हरी-भरी हो जाती है, तो हमें यक़ीन करना चाहिए कि अल्लाह की रहमत और कृपा का कोई अंत नहीं। वही अल्लाह जो ज़मीन को ज़िंदा करता है, वह हमारी दुआओं को सुनता है, हमारी मुश्किलों को आसान करता है, और हमें राहत देता है।
इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह पर भरोसा रखें, उसकी रहमत से कभी निराश न हों, और उसके दिए हुए इन नेमतों पर शुक्र अदा करें। जब अल्लाह इतना लतीफ़ और ख़बीर है, तो हमें अपने हर मामले में उसी की तरफ रुजू करना चाहिए, क्योंकि वही हमारी असली मददगार है। यही ईमान की निशानी है कि इंसान अल्लाह की कुदरत पर ग़ौर करे और उसकी बड़ाई को दिल से माने।
📜 आयत 61-65 — सूरा अल-हज
अनुवाद — अल-हज 63
सूरा अल-हज आयत 63 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अरे क्या तूने इतना भी नहीं देखा कि खुदा ही…सूरा आयत 63/78 — सूरा अल-हज الحج (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हज सुनें, सूरा अल-हज अनुवाद, सूरा अल-हज mp3, सूरा अल-हज pdf. आयत 61–65. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


