अल-हज · 63/78
अनुवाद उच्चारण — अल-हज
أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ أَنزَلَ مِنَ السَّمَاءِ مَاءً فَتُصْبِحُ الْأَرْضُ مُخْضَرَّةً ۗ إِنَّ اللَّهَ لَطِيفٌ خَبِيرٌ ۝٦٣
Alam tara annal laaha anzala minas samaaa`i maaa`an fatusbihul ardu mukhdarrah; innal laaha Lateefun Khabeer
📖 हिंदी अर्थ
अरे क्या तूने इतना भी नहीं देखा कि खुदा ही आसमान से पानी बरसाता है तो ज़मीन सर सब्ज़ (व शादाब) हो जाती है बेशक खुदा (बन्दों के हाल पर) बड़ा मेहरबान वाक़िफ़कार है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • مُخْضَرَّةً: हरी-भरी, जिसमें हरियाली हो।
  • لَطِيفٌ: बहुत दयालु, सूक्ष्म दृष्टि वाला, जो अपने बंदों के साथ नर्मी और कृपा से पेश आता है।
  • خَبِيرٌ: सब कुछ जानने वाला, जिसे हर चीज़ की पूरी खबर हो, खुले और छिपे हर हाल से वाकिफ।

तफसीर:

ऐ नबी! क्या तुमने नहीं देखा कि अल्लाह ने आसमान से पानी बरसाया, और फिर वह ज़मीन जो पहले सूखी और बेजान थी, वह हरी-भरी हो जाती है, उसमें तरह-तरह के पौधे उग आते हैं, और यह सब उसी पानी के ज़रिए होता है? यह अल्लाह की कुदरत का एक ज़िंदा सबूत है। जो अल्लाह मुर्दा ज़मीन को इस तरह ज़िंदा कर देता है, वही क़यामत के दिन मुर्दों को भी ज़िंदा करके उठाएगा।

यहाँ अल्लाह तआला अपने बंदों पर अपनी लुत्फ़ और मेहरबानी का ज़िक्र कर रहा है। वह लतीफ़ है, यानी वह अपने बंदों के साथ नर्मी और कृपा से पेश आता है, उनकी ज़रूरतों को समझता है और उन्हें पूरा करता है। जब ज़मीन को पानी की सख्त ज़रूरत होती है, तो वह आसमान से बारिश भेजता है, और जब पौधों को उगने के लिए मदद चाहिए होती है, तो वह उन्हें उगाता है। यह सब उसकी लुत्फ़ और कृपा का नतीजा है।

और वह ख़बीर है, यानी वह हर चीज़ से पूरी तरह वाकिफ है। उसे मालूम है कि कौन सी ज़मीन किस क़िस्म की फसल के लिए मुनासिब है, कौन सा पानी किस चीज़ के लिए फायदेमंद है, और उसके बंदों के लिए किस चीज़ में भलाई है। उसकी नज़र से कोई चीज़ छिपी नहीं है, न ज़मीन के अंदर की, न आसमान के ऊपर की, न दिलों के राज़ की।

इस आयत में अल्लाह तआला हमें अपनी कुदरत पर ग़ौर करने की तरग़ीब दे रहा है। जब हम देखते हैं कि एक बेजान ज़मीन पानी पड़ते ही हरी-भरी हो जाती है, तो हमें यक़ीन करना चाहिए कि अल्लाह की रहमत और कृपा का कोई अंत नहीं। वही अल्लाह जो ज़मीन को ज़िंदा करता है, वह हमारी दुआओं को सुनता है, हमारी मुश्किलों को आसान करता है, और हमें राहत देता है।

इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह पर भरोसा रखें, उसकी रहमत से कभी निराश न हों, और उसके दिए हुए इन नेमतों पर शुक्र अदा करें। जब अल्लाह इतना लतीफ़ और ख़बीर है, तो हमें अपने हर मामले में उसी की तरफ रुजू करना चाहिए, क्योंकि वही हमारी असली मददगार है। यही ईमान की निशानी है कि इंसान अल्लाह की कुदरत पर ग़ौर करे और उसकी बड़ाई को दिल से माने।



📜 आयत 61-65 — अल-हज

61ذَٰلِكَ بِأَنَّ اللَّهَ يُولِجُ اللَّيْلَ فِي النَّهَارِ وَيُولِجُ النَّهَارَ فِي اللَّيْلِ وَأَنَّ اللَّهَ سَمِيعٌ بَصِيرٌ
बेशक खुदा बड़ा माफ करने वाला बख़शने वाला है ये (मदद) इस वजह से दी जाएगी कि खुदा (बड़ा क़ादिर है वही) तो रात को दिन में दाख़िल करता है और दिन को रात में दाख़िल करता है और इसमें भी शक नहीं कि खुदा सब कुछ जानता है
62ذَٰلِكَ بِأَنَّ اللَّهَ هُوَ الْحَقُّ وَأَنَّ مَا يَدْعُونَ مِن دُونِهِ هُوَ الْبَاطِلُ وَأَنَّ اللَّهَ هُوَ الْعَلِيُّ الْكَبِيرُ
(और) इस वजह से (भी) कि यक़ीनन खुदा ही बरहक़ है और उसके सिवा जिनको लोग (वक्ते मुसीबत) पुकारा करते हैं (सबके सब) बातिल हैं और (ये भी) यक़ीनी (है कि) खुदा ही (सबसे) बुलन्द मर्तबा बुर्जुग़ है
63أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ أَنزَلَ مِنَ السَّمَاءِ مَاءً فَتُصْبِحُ الْأَرْضُ مُخْضَرَّةً ۗ إِنَّ اللَّهَ لَطِيفٌ خَبِيرٌ
अरे क्या तूने इतना भी नहीं देखा कि खुदा ही आसमान से पानी बरसाता है तो ज़मीन सर सब्ज़ (व शादाब) हो जाती है बेशक खुदा (बन्दों के हाल पर) बड़ा मेहरबान वाक़िफ़कार है
64لَّهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۗ وَإِنَّ اللَّهَ لَهُوَ الْغَنِيُّ الْحَمِيدُ
जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) उसी का है और इसमें तो शक ही नहीं कि खुदा (सबसे) बेपरवाह (और) सज़ावार हम्द है
65أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ سَخَّرَ لَكُم مَّا فِي الْأَرْضِ وَالْفُلْكَ تَجْرِي فِي الْبَحْرِ بِأَمْرِهِ وَيُمْسِكُ السَّمَاءَ أَن تَقَعَ عَلَى الْأَرْضِ إِلَّا بِإِذْنِهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ بِالنَّاسِ لَرَءُوفٌ رَّحِيمٌ
क्या तूने उस पर भी नज़र न डाली कि जो कुछ रूए ज़मीन में है सबको खुदा ही ने तुम्हारे क़ाबू में कर दिया है और कश्ती को (भी) जो उसके हुक्म से दरिया में चलती है और वही तो आसमान को रोके हुए है कि ज़मीन पर न गिर पड़े मगर (जब) उसका हुक्म होगा (तो गिर पडेग़ा) इसमें शक नहीं कि खुदा लोगों पर बड़ा मेहरबान व रहमवाला है
अल-हजकुरान सूची
78आयत
मदनीRevelation
63आयत

अनुवाद — अल-हज 63

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Tuesday, August 18, 2026

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