अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- الْغَنِيُّ (अल-ग़नी): वह जो किसी भी चीज़ का मोहताज न हो, स्वयं में पूर्ण और आत्मनिर्भर।
- الْحَمِيدُ (अल-हमीद): वह जो अपने गुणों और कर्मों के कारण प्रशंसा का पात्र हो, हर हाल में स्तुति किया जाने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
आसमानों और ज़मीन में जो कुछ भी है—चाहे वह मख़लूक़ (प्राणी) हो, माल हो या बंदगी—सब कुछ अकेले अल्लाह ही का है। वही इन सबका मालिक, पालनहार और प्रबंधक है। हर चीज़ उसी की मोहताज है, और वह किसी का मोहताज नहीं। यही कारण है कि वह अल-ग़नी है—अपनी ज़ात में हर चीज़ से बेनियाज़, और अल-हमीद है—अपनी सिफ़ात (गुणों) और अफ़आल (कर्मों) की वजह से हर तारीफ़ का हक़दार।
जब हम यह समझ लें कि सारा जहान उसी की मिल्कियत है, तो हमारे दिल में उसकी अज़मत और क़ुदरत का एहसास पैदा होता है। यह एहसास हमें उसकी इबादत की तरफ़ खींचता है और हमें सिखाता है कि जिस मालिक के पास सब कुछ है, उससे ही हमें अपनी हाजतें माँगनी चाहिए। वह न तो कभी थकता है और न ही उसे किसी की मदद की ज़रूरत होती है।
इस आयत में एक बड़ी खुशखबरी भी है: अल्लाह हमीद है, यानी वह अपने बंदों के अच्छे कामों की क़द्र करता है और उन्हें इनाम देता है। वह ऐसा मालिक है जो अपने बंदों की तारीफ़ करता है, उनकी दुआएँ सुनता है और उन्हें अपनी रहमत से नवाज़ता है। इसलिए हमें चाहिए कि हम उसी पर भरोसा रखें, उसी से मदद माँगें और उसी की बंदगी में अपनी ज़िंदगी गुज़ारें। यही सच्ची कामयाबी है—कि हम उस मालिक को पहचानें जो सब कुछ रखता है, और उसकी रज़ा (खुशी) को अपनी ज़िंदगी का निशाना बनाएँ।
याद रखिए! जब हमारा दिल इस हक़ीक़त पर यक़ीन कर लेता है कि अल्लाह ही सब कुछ का मालिक है और वही बेनियाज़ है, तो हमारे अंदर से दुनिया की मुहब्बत का ग़ुलामी वाला पहलू कमज़ोर पड़ता है और हमारा रिश्ता अल्लाह से मज़बूत होता है। यही वह रिश्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में सुकून और कामयाबी देता है।
📜 आयत 62-66 — सूरा अल-हज
अनुवाद — अल-हज 64
सूरा अल-हज आयत 64 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में…सूरा आयत 64/78 — सूरा अल-हज الحج (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हज सुनें, सूरा अल-हज अनुवाद, सूरा अल-हज mp3, सूरा अल-हज pdf. आयत 62–66. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 8, 2026
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