अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- سَخَّرَ (सख़्ख़रा): वश में करना, अधीन करना
- الْفُلْكَ (अल-फुल्क): जहाज़
- يُمْسِكُ (युम्सिकु): थामे रखना, रोके रखना
- لَرَءُوفٌ رَّحِيمٌ (लरऊफ़ुन रहीम): अत्यंत दयालु और कृपाशील
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! क्या तुमने नहीं देखा कि अल्लाह ने धरती की हर चीज़ को तुम्हारे लिए वश में कर दिया है? चाहे वो जानवर हों, पेड़-पौधे, फल, या पहाड़ और खनिज पदार्थ — सब कुछ तुम्हारी सेवा में लगा दिया गया है। तुम बैलों और ऊँटों पर सवारी करते हो, ज़मीन जोतते हो, फसलें उगाते हो, और धरती के खज़ानों से फ़ायदा उठाते हो। यह सब अल्लाह की महान दया है।
और उसी अल्लाह ने समुद्र में जहाज़ों को भी तुम्हारे लिए वश में कर दिया है। वे उसके आदेश से पानी की लहरों पर चलते हैं और तुम्हें तुम्हारा सामान और माल लेकर एक शहर से दूसरे शहर, एक देश से दूसरे देश पहुँचाते हैं। यह उसकी कुदरत का अद्भुत नज़ारा है कि लोहे का वह विशाल जहाज़, जो पहाड़ जितना बड़ा होता है, पानी पर तैरता हुआ चलता है।
फिर देखो उसकी और भी बड़ी क़ुदरत — वह आसमान को थामे हुए है कि वह धरती पर न गिर पड़े। यह विशाल आकाश, जिसमें अरबों तारे, चाँद-सूरज और ग्रह हैं, बिना किसी खंभे के खड़ा है। अगर अल्लाह चाहे तो उसे गिरा दे, लेकिन वह अपनी दया से उसे थामे हुए है। हाँ, क़यामत के दिन वह उसकी इजाज़त से टूट कर बिखर जाएगा, और यही उसकी क़ुदरत का इशारा है।
यह सब कुछ देखने के बाद क्या कोई शक रह जाता है कि अल्लाह अपने बंदों पर अत्यंत दयालु और कृपाशील है? वह जानता है कि इंसान कमज़ोर है, उसे बहुत सी चीज़ों की ज़रूरत है, इसलिए उसने यह सब कुछ उसके लिए मुहैया कर दिया। इंसान गुनाह करता है, नाफ़रमानी करता है, फिर भी अल्लाह उस पर रहम करता है और उसकी ज़रूरतें पूरी करता रहता है।
दावत और नसीहत:
भाईयों! ज़रा सोचो — जिस रब ने हमारे लिए धरती को बिछौना बनाया, आसमान को छत बनाया, समुद्र को रास्ता बनाया और जहाज़ों को सवारी बनाया, क्या वह हमारी परवाह नहीं करता? जब वह इतना कुछ हमारे लिए करता है, तो क्या हमें उसका शुक्रिया अदा नहीं करना चाहिए? क्या हमें उसकी इबादत नहीं करनी चाहिए? क्या हमें उसके हुक्मों को नहीं मानना चाहिए?
यह सब नेमतें हमें इसलिए दी गई हैं ताकि हम अपने रब को पहचानें, उसका शुक्र अदा करें और उसकी राह में जिएँ। अल्लाह की दया का दामन थाम लो, उसकी नेमतों का शुक्रिया अदा करो, और उसकी इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारो। यही उसकी दया का सही तरीक़े से एहसान मानना है। और जो लोग अल्लाह की इबादत करते हैं, उनके लिए उसके पास और भी बड़ी नेमतें हैं — इस दुनिया में भी और आख़िरत में भी।
📜 आयत 63-67 — अल-हज
अनुवाद — अल-हज 65
सूरा अल-हज आयत 65 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या तूने उस पर भी नज़र न डाली कि जो…सूरा आयत 65/78 — अल-हज الحج (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हज सुनें, अल-हज अनुवाद, अल-हज mp3, अल-हज pdf. आयत 63–67. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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