अल-हज · 66/78
अनुवाद उच्चारण — अल-हज
وَهُوَ الَّذِي أَحْيَاكُمْ ثُمَّ يُمِيتُكُمْ ثُمَّ يُحْيِيكُمْ ۗ إِنَّ الْإِنسَانَ لَكَفُورٌ ۝٦٦
Wa Huwal lazee ahyaakum summa yumeetukum summma yuheekum; innal insaana lakafoor
📖 हिंदी अर्थ
और वही तो क़ादिर मुत्तलिक़ है जिसने तुमको (पहली बार माँ के पेट में) जिला उठाया फिर वही तुमको मार डालेगा फिर वही तुमको दोबारा ज़िन्दगी देगा
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَحْيَاكُمْ (अह्याकुम): तुम्हें जीवन दिया।
  • يُمِيتُكُمْ (युमीतुकुम): तुम्हें मृत्यु देता है।
  • يُحْيِيكُمْ (युह्यीकुम): तुम्हें दोबारा जीवित करेगा।
  • لَكَفُورٌ (लकफूर): बहुत अधिक कृतघ्न, नेमतों का इनकार करने वाला।

तफसीर:

अल्लाह तआला ही वह (एकमात्र) है जिसने तुम्हें पहले जीवन दिया—जब तुम कुछ भी नहीं थे, उसने तुम्हें पैदा किया, तुम्हारी माँ के पेट में तुम्हारी रचना की, और तुम्हें इस दुनिया में जीवित किया। फिर जब तुम्हारी नियत (अवधि) पूरी हो जाती है, तो वही तुम्हें मृत्यु देता है। और फिर क़यामत के दिन वही तुम्हें दोबारा जीवित करेगा, ताकि तुम्हारे अच्छे और बुरे कर्मों का हिसाब लिया जाए और हर किसी को उसके कर्मों का पूरा बदला दिया जाए।

यह एक स्पष्ट और बड़ी निशानी है—जीवन, मृत्यु, और फिर दोबारा जीवन—जो अल्लाह की पूर्ण शक्ति और उसकी एकता पर दलील देती है। इसके बावजूद, इंसान बड़ा कृतघ्न और नाशुक्रा है। वह अल्लाह की इन स्पष्ट नेमतों को देखते हुए भी उसका इनकार करता है, और उसके साथ दूसरों को पूजता है, अपने रब की नेमतों का अहसान भूल जाता है।


दावत और नसीहत:

प्यारे भाइयों और बहनों! ज़रा सोचिए—जिस अल्लाह ने हमें माँ के पेट में पाला, जन्म दिया, हमें तंदुरुस्ती, खाना, पानी, माँ-बाप, और हर ज़रूरी चीज़ दी, क्या हम उसका शुक्र अदा करते हैं? जब हम बीमार होते हैं, तो वही शिफ़ा देता है; जब हम मुसीबत में होते हैं, तो वही राहत देता है। फिर भी हम उसे भूल जाते हैं और अपनी ज़िंदगी में उसके हुक्मों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं।

याद रखिए! यह ज़िंदगी खत्म होने वाली है, मौत हर हाल में आएगी, और फिर हम सब दोबारा ज़िंदा होकर अपने रब के सामने खड़े होंगे। उस दिन हमसे पूछा जाएगा कि हमने अपनी ज़िंदगी कैसे बिताई, अपनी जवानी किस काम में लगाई, और अपने रब की नेमतों का शुक्र कैसे अदा किया। इसलिए आज ही उठें, अपने रब की तरफ रुजू करें, उसकी इबादत करें, और उसके दिए हुए हर अहसान का शुक्र अदा करें। अल्लाह हमें सबको सच्ची शुक्रगुज़ारी की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 64-68 — अल-हज

64لَّهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۗ وَإِنَّ اللَّهَ لَهُوَ الْغَنِيُّ الْحَمِيدُ
जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) उसी का है और इसमें तो शक ही नहीं कि खुदा (सबसे) बेपरवाह (और) सज़ावार हम्द है
65أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ سَخَّرَ لَكُم مَّا فِي الْأَرْضِ وَالْفُلْكَ تَجْرِي فِي الْبَحْرِ بِأَمْرِهِ وَيُمْسِكُ السَّمَاءَ أَن تَقَعَ عَلَى الْأَرْضِ إِلَّا بِإِذْنِهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ بِالنَّاسِ لَرَءُوفٌ رَّحِيمٌ
क्या तूने उस पर भी नज़र न डाली कि जो कुछ रूए ज़मीन में है सबको खुदा ही ने तुम्हारे क़ाबू में कर दिया है और कश्ती को (भी) जो उसके हुक्म से दरिया में चलती है और वही तो आसमान को रोके हुए है कि ज़मीन पर न गिर पड़े मगर (जब) उसका हुक्म होगा (तो गिर पडेग़ा) इसमें शक नहीं कि खुदा लोगों पर बड़ा मेहरबान व रहमवाला है
66وَهُوَ الَّذِي أَحْيَاكُمْ ثُمَّ يُمِيتُكُمْ ثُمَّ يُحْيِيكُمْ ۗ إِنَّ الْإِنسَانَ لَكَفُورٌ
और वही तो क़ादिर मुत्तलिक़ है जिसने तुमको (पहली बार माँ के पेट में) जिला उठाया फिर वही तुमको मार डालेगा फिर वही तुमको दोबारा ज़िन्दगी देगा
67لِّكُلِّ أُمَّةٍ جَعَلْنَا مَنسَكًا هُمْ نَاسِكُوهُ ۖ فَلَا يُنَازِعُنَّكَ فِي الْأَمْرِ ۚ وَادْعُ إِلَىٰ رَبِّكَ ۖ إِنَّكَ لَعَلَىٰ هُدًى مُّسْتَقِيمٍ
इसमें शक नहीं कि इन्सान बड़ा ही नाशुक्रा है (ऐ रसूल) हमने हर उम्मत के वास्ते एक तरीक़ा मुक़र्रर कर दिया कि वह इस पर चलते हैं फिर तो उन्हें इस दीन (इस्लाम) में तुम से झगड़ा न करना चाहिए और तुम (लोगों को) अपने परवरदिगार की तरफ बुलाए जाओ
68وَإِن جَادَلُوكَ فَقُلِ اللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا تَعْمَلُونَ
बेशक तुम सीधे रास्ते पर हो और अगर (इस पर भी) लोग तुमसे झगड़ा करें तो तुक कह दो कि जो कुछ तुम कर रहे हो खुदा उससे खूब वाक़िफ़ है
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अनुवाद — अल-हज 66

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Tuesday, August 18, 2026

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