अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- मन्सकन (مَنسَكًا): अर्थात इबादत का तरीका, क़ुर्बानी का नियम, या शरीयत और दीन का वह नियम जो अल्लाह ने निर्धारित किया।
- नासिकूहु (نَاسِكُوهُ): यानी वे उस पर अमल करने वाले हैं, उसे मानने वाले हैं।
- युनाज़ि'अन्नका (يُنَازِعُنَّكَ): यानी झगड़ा न करें, विवाद न करें।
- हुदन मुस्तक़ीम (هُدًى مُّسْتَقِيمٌ): सीधा और सत्य मार्ग, जिसमें कोई टेढ़ापन न हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में अपने नबी ﷺ को और उनके ज़रिए पूरी उम्मत को एक बड़ी हक़ीक़त बता रहे हैं कि हर उम्मत के लिए हमने एक इबादत का तरीका और एक शरीयत निर्धारित की है, और वे सब अपने-अपने ज़माने में उसी पर अमल करते थे। यानी इबादत के तरीके और क़ुर्बानी के नियम अलग-अलग उम्मतों में अलग-अलग रहे, लेकिन असल मक़सद हमेशा एक ही रहा — अल्लाह की इबादत और उसकी रज़ा का तलबगार होना।
जब मक्का के मुशरिकों ने नबी ﷺ से कहा कि "तुम लोग वह जानवर खाते हो जिसे तुमने ख़ुद ज़बह किया, लेकिन वह नहीं खाते जिसे अल्लाह ने मारा (यानी मुरदार)?" — तो अल्लाह ने यह आयत उतारी। अल्लाह फ़रमाता है: ऐ नबी! हर उम्मत के लिए हमने एक तरीका बनाया है, और तुम्हारे लिए भी हमने एक शरीयत और इबादत का नियम बनाया है। इसलिए ये मुशरिक और दूसरे दीन वाले तुमसे तुम्हारे दीन और तुम्हारी शरीयत के बारे में झगड़ा न करें। तुम्हारा रास्ता हक़ है, और उनका रास्ता बातिल। वे जो कहते हैं वह सिर्फ़ जहालत और हठधर्मी है।
फिर अल्लाह तआला नबी ﷺ को हिदायत देता है: "और तुम अपने रब की तरफ बुलाते रहो, उसके दीन की दावत देते रहो, लोगों को तौहीद और इख़लास की तरफ बुलाओ।" यानी झगड़े और मुनाज़रे में मत पड़ो, बल्कि अपना काम करते रहो — दावत देना तुम्हारा काम है, और हिदायत देना अल्लाह के हाथ में है।
आख़िर में अल्लाह तआला नबी ﷺ को तसल्ली देता है: "बेशक तुम सीधे रास्ते पर हो।" यानी तुम जिस दीन पर हो, वही सच्चा दीन है, उसमें कोई कमी नहीं, कोई टेढ़ापन नहीं। यह रास्ता सीधा है, और यही अल्लाह तक पहुँचाने वाला रास्ता है।
दावती पहलू (इस्लाम की तरफ बुलाने वाला पहलू):
यह आयत हमें सिखाती है कि हर ज़माने में अल्लाह ने अपने बंदों के लिए एक रास्ता भेजा, और आख़िरी रास्ता इस्लाम है। जिस तरह पिछली उम्मतों के लिए उनके नबी का तरीका हक़ था, उसी तरह आज हमारे लिए हमारे नबी ﷺ का तरीका ही हक़ है। हमें चाहिए कि हम अपने दीन पर मज़बूती से क़ायम रहें, किसी की बातों से विचलित न हों, और अपने रब की तरफ बुलाते रहें। दावत का काम जारी रखें, क्योंकि हम सीधे रास्ते पर हैं — यह अल्लाह का वादा है, और अल्लाह का वादा कभी झूठा नहीं होता। जो लोग इस रास्ते पर चलेंगे, वे दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होंगे।
📜 आयत 65-69 — अल-हज
अनुवाद — अल-हज 67
सूरा अल-हज आयत 67 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इसमें शक नहीं कि इन्सान बड़ा ही नाशुक्रा है (ऐ…सूरा आयत 67/78 — अल-हज الحج (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हज सुनें, अल-हज अनुवाद, अल-हज mp3, अल-हज pdf. आयत 65–69. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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