अन-नूर · 26/64
अनुवाद उच्चारण — अन-नूर
الْخَبِيثَاتُ لِلْخَبِيثِينَ وَالْخَبِيثُونَ لِلْخَبِيثَاتِ ۖ وَالطَّيِّبَاتُ لِلطَّيِّبِينَ وَالطَّيِّبُونَ لِلطَّيِّبَاتِ ۚ أُولَٰئِكَ مُبَرَّءُونَ مِمَّا يَقُولُونَ ۖ لَهُم مَّغْفِرَةٌ وَرِزْقٌ كَرِيمٌ ۝٢٦
Alkhabeesaatu lilkha beeseena walkhabeesoona lilkhabeesaati wattaiyibaatu littaiyibeena wattaiyiboona littaiyibaat; ulaaa`ika mubar ra`oona maimma yaqooloona lahum maghfiratunw wa rizqun kareem
📖 हिंदी अर्थ
गन्दी औरते गन्दें मर्दों के लिए (मुनासिब) हैं और गन्दे मर्द गन्दी औरतो के लिए और पाक औरतें पाक मर्दों के लिए (मौज़ूँ) हैं और पाक मर्द पाक औरतों के लिए लोग जो कुछ उनकी निस्बत बका करते हैं उससे ये लोग बुरी उल ज़िम्मा हैं उन ही (पाक लोगों) के लिए (आख़िरत में) बख़्शिस है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْخَبِيثَاتُ: ख़बीस (बुरी) औरतें, या बुरे कथन और कर्म।
  • الْخَبِيثِينَ: ख़बीस (बुरे) मर्द, या बुरे लोग।
  • الطَّيِّبَاتُ: पाक और अच्छी औरतें, या पाक कथन और कर्म।
  • الطَّيِّبِينَ: पाक और अच्छे मर्द, या पाक लोग।
  • مُبَرَّءُونَ: पवित्र और निर्दोष ठहराए गए।
  • مَغْفِرَةٌ: क्षमा, गुनाहों की माफ़ी।
  • رِزْقٌ كَرِيمٌ: सम्मानजनक और उदार आजीविका (जन्नत)।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत एक महान सच्चाई को स्पष्ट करती है कि अल्लाह तआला की दुनिया में हर चीज़ अपनी जैसी से मेल खाती है। बुरी औरतें बुरे मर्दों के लिए होती हैं, और बुरे मर्द बुरी औरतों के लिए। इसी तरह, पाक और अच्छी औरतें पाक और अच्छे मर्दों के लिए होती हैं, और पाक मर्द पाक औरतों के लिए। यही नियम कथनों और कर्मों पर भी लागू होता है — बुरा कथन और बुरा कर्म केवल बुरे लोगों से ही निकलता है, और पाक कथन तथा पाक कर्म केवल पाक लोगों से ही प्रकट होते हैं।

इस आयत का विशेष संदर्भ नबी ﷺ की पाक बीवी हज़रत आइशा सिद्दीक़ा (रज़ियल्लाहु अन्हा) से जुड़ी घटना है, जब मुनाफ़िक़ों ने उन पर झूठा इल्ज़ाम लगाया था। अल्लाह ने इस आयत के माध्यम से उनकी पाकी और बराअत (निर्दोषता) का ऐलान किया। अल्लाह फ़रमाता है कि ये पाक लोग (नबी ﷺ और उनकी पाक बीवियाँ) उन बुरी बातों से बिल्कुल पाक और मुबर्रा हैं जो बुरे लोग उनके बारे में कहते हैं।

इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि इंसान की फ़ितरत और उसके कर्मों का गहरा ताल्लुक़ होता है। जो लोग पाक दिल और पाक आचरण वाले होते हैं, अल्लाह उन्हें पाक साथी और पाक ज़िंदगी अता करता है। और जो लोग ख़बीस होते हैं, वे ख़बीस लोगों और ख़बीस चीज़ों की तरफ़ खिंचते हैं।

इसके बाद अल्लाह तआला उन पाक लोगों के लिए दो बड़ी ख़ुशख़बरियाँ सुनाता है: पहली, उनके लिए मग़फ़िरत (क्षमा) है — यानी उनके छोटे गुनाह माफ़ कर दिए जाएँगे, और दूसरी, उनके लिए करीम रिज़्क़ है — जो जन्नत है, जहाँ हर तरह की नेमतें और खुशियाँ होंगी।

यह आयत हर उस मोमिन के लिए तसल्ली और उम्मीद का पैग़ाम है जो बुरे इल्ज़ामात और झूठे आरोपों का शिकार होता है। अल्लाह उसे यक़ीन दिलाता है कि अगर तू पाक है, तो तेरी पाकी अल्लाह के यहाँ मालूम है, और वह तुझे दुनिया और आख़िरत दोनों में इज़्ज़त देगा।

इस आयत को पढ़कर हमें अपनी ज़िंदगी को पाक बनाने की कोशिश करनी चाहिए — पाक कथन, पाक कर्म, पाक सोच और पाक साथी। क्योंकि जो आदमी पाक रास्ते पर चलता है, अल्लाह उसे पाक ज़िंदगी, पाक साथी और आख़िरत में करीम रिज़्क़ (जन्नत) अता करेगा। यह अल्लाह का वादा है, और अल्लाह का वादा कभी नहीं टूटता।

🎧 सुनें

📜 आयत 24-28 — अन-नूर

24يَوْمَ تَشْهَدُ عَلَيْهِمْ أَلْسِنَتُهُمْ وَأَيْدِيهِمْ وَأَرْجُلُهُم بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
जिस दिन उनके ख़िलाफ उनकी ज़बानें और उनके हाथ उनके पावँ उनकी कारस्तानियों की गवाही देगें
25يَوْمَئِذٍ يُوَفِّيهِمُ اللَّهُ دِينَهُمُ الْحَقَّ وَيَعْلَمُونَ أَنَّ اللَّهَ هُوَ الْحَقُّ الْمُبِينُ
उस दिन ख़ुदा उनको ठीक उनका पूरा पूरा बदला देगा और जान जाएँगें कि ख़ुदा बिल्कुल बरहक़ और (हक़ का) ज़ाहिर करने वाला है
26الْخَبِيثَاتُ لِلْخَبِيثِينَ وَالْخَبِيثُونَ لِلْخَبِيثَاتِ ۖ وَالطَّيِّبَاتُ لِلطَّيِّبِينَ وَالطَّيِّبُونَ لِلطَّيِّبَاتِ ۚ أُولَٰئِكَ مُبَرَّءُونَ مِمَّا يَقُولُونَ ۖ لَهُم مَّغْفِرَةٌ وَرِزْقٌ كَرِيمٌ
गन्दी औरते गन्दें मर्दों के लिए (मुनासिब) हैं और गन्दे मर्द गन्दी औरतो के लिए और पाक औरतें पाक मर्दों के लिए (मौज़ूँ) हैं और पाक मर्द पाक औरतों के लिए लोग जो कुछ उनकी निस्बत बका करते हैं उससे ये लोग बुरी उल ज़िम्मा हैं उन ही (पाक लोगों) के लिए (आख़िरत में) बख़्शिस है
27يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَدْخُلُوا بُيُوتًا غَيْرَ بُيُوتِكُمْ حَتَّىٰ تَسْتَأْنِسُوا وَتُسَلِّمُوا عَلَىٰ أَهْلِهَا ۚ ذَٰلِكُمْ خَيْرٌ لَّكُمْ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ
और इज्ज़त की रोज़ी ऐ ईमानदारों अपने घरों के सिवा दूसरे घरों में (दर्राना) न चले जाओ यहाँ तक कि उनसे इजाज़त ले लो और उन घरों के रहने वालों से साहब सलामत कर लो यही तुम्हारे हक़ में बेहतर है
28فَإِن لَّمْ تَجِدُوا فِيهَا أَحَدًا فَلَا تَدْخُلُوهَا حَتَّىٰ يُؤْذَنَ لَكُمْ ۖ وَإِن قِيلَ لَكُمُ ارْجِعُوا فَارْجِعُوا ۖ هُوَ أَزْكَىٰ لَكُمْ ۚ وَاللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ عَلِيمٌ
(ये नसीहत इसलिए है) ताकि तुम याद रखो पस अगर तुम उन घरों में किसी को न पाओ तो तावाक़फियत कि तुम को (ख़ास तौर पर) इजाज़त न हासिल हो जाए उन में न जाओ और अगर तुम से कहा जाए कि फिर जाओ तो तुम (बे ताम्मुल) फिर जाओ यही तुम्हारे वास्ते ज्यादा सफाई की बात है और तुम जो कुछ भी करते हो ख़ुदा उससे खूब वाकिफ़ है
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अनुवाद — अन-नूर 26

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Tuesday, August 18, 2026

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