अन-नूर · 47/64
अनुवाद उच्चारण — अन-नूर
وَيَقُولُونَ آمَنَّا بِاللَّهِ وَبِالرَّسُولِ وَأَطَعْنَا ثُمَّ يَتَوَلَّىٰ فَرِيقٌ مِّنْهُم مِّن بَعْدِ ذَٰلِكَ ۚ وَمَا أُولَٰئِكَ بِالْمُؤْمِنِينَ ۝٤٧
Wa yaqooloona aamannaa billaahi wa bir Rasooli wa ata`naa summa yatawallaa fareequm minhum mim ba`di zaalik; wa maaa ulaaa`ika bilmu`mineen
📖 हिंदी अर्थ
और (जो लोग ऐसे भी है जो) कहते हैं कि ख़ुदा पर और रसूल पर ईमान लाए और हमने इताअत क़ुबूल की- फिर उसके बाद उन में से कुछ लोग (ख़ुदा के हुक्म से) मुँह फेर लेते हैं और (सच यूँ है कि) ये लोग ईमानदार थे ही नहीं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • آمَنَّا — हम ईमान लाए।
  • أَطَعْنَا — हमने आज्ञा का पालन किया।
  • يَتَوَلَّى — मुँह मोड़ लेता है, विमुख हो जाता है।
  • فَرِيقٌ — एक समूह, एक गिरोह।

तफ़सीर:

यह आयत उन लोगों के बारे में बताती है जो मुँह से ईमान का दावा करते हैं, लेकिन उनके कर्म उनके दावे की पुष्टि नहीं करते। ये वे लोग हैं जो कहते हैं: "हम अल्लाह पर ईमान लाए और रसूल पर ईमान लाए और हमने आज्ञा का पालन किया।" यानी वे ज़ुबान से यह सब कहते हैं, लेकिन जब बात आती है अल्लाह और उसके रसूल के फ़ैसले को मानने की, तो उनमें से एक गिरोह मुँह मोड़ लेता है। वे उस हुक्म को क़बूल करने से इनकार कर देते हैं जो उनकी अपनी इच्छाओं और मनमर्ज़ी के ख़िलाफ़ होता है।

यहाँ अल्लाह तआला साफ़ फ़रमा रहे हैं कि ऐसे लोग हरगिज़ मोमिन नहीं हैं। ईमान सिर्फ़ ज़ुबान का दावा नहीं है, बल्कि ईमान दिल की पुष्टि और अमल से साबित होता है। जो व्यक्ति अल्लाह और उसके रसूल के हुक्म को नहीं मानता, उसका ईमान का दावा झूठा है। यह आयत उन लोगों के बारे में है जो दिखावे के लिए ईमान का इज़हार करते हैं, लेकिन जब उन्हें जिहाद या किसी और कठिन आज्ञा का पालन करने के लिए कहा जाता है, तो वे पीछे हट जाते हैं।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि ईमान सिर्फ़ ज़ुबानी कलिमा नहीं है। ईमान का तक़ाज़ा है कि हम अल्लाह और उसके रसूल ﷺ के हर हुक्म को खुशी से क़बूल करें, चाहे वह हमारी इच्छाओं के ख़िलाफ़ ही क्यों न हो। जो व्यक्ति अल्लाह के दीन को पूरी तरह अपनाता है, उसकी ज़िंदगी में अल्लाह की रज़ा ही सबसे बड़ी मंज़िल होती है। वह किसी भी हुक्म से मुँह नहीं मोड़ता, क्योंकि वह जानता है कि अल्लाह का हर फ़ैसला उसके भले के लिए है।

याद रखिए, अल्लाह तआला दिलों के राज़ जानता है। वह देखता है कि कौन सच्चे दिल से ईमान लाया है और कौन सिर्फ़ दिखावा कर रहा है। हमें चाहिए कि हम अपने ईमान को सिर्फ़ ज़ुबान तक सीमित न रखें, बल्कि उसे अपने अमल, अपने चाल-चलन और अपनी पूरी ज़िंदगी में उतारें। जब हम अल्लाह और उसके रसूल ﷺ के हुक्म के आगे सर झुकाते हैं, तो हमारा ईमान पूरा होता है और हमें अल्लाह की रहमत और उसकी मग़फ़िरत के हक़दार बनते हैं। अल्लाह हमें सच्चे ईमान की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 45-49 — अन-नूर

45وَاللَّهُ خَلَقَ كُلَّ دَابَّةٍ مِّن مَّاءٍ ۖ فَمِنْهُم مَّن يَمْشِي عَلَىٰ بَطْنِهِ وَمِنْهُم مَّن يَمْشِي عَلَىٰ رِجْلَيْنِ وَمِنْهُم مَّن يَمْشِي عَلَىٰ أَرْبَعٍ ۚ يَخْلُقُ اللَّهُ مَا يَشَاءُ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
और ख़ुदा ही ने तमाम ज़मीन पर चलने वाले (जानवरों) को पानी से पैदा किया उनमें से बाज़ तो ऐसे हैं जो अपने पेट के बल चलते हैं और बाज़ उनमें से ऐसे हैं जो दो पाँव पर चलते हैं और बाज़ उनमें से ऐसे हैं जो चार पावों पर चलते हैं- ख़ुदा जो चाहता है पैदा करता है इसमें शक नहीं कि खुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
46لَّقَدْ أَنزَلْنَا آيَاتٍ مُّبَيِّنَاتٍ ۚ وَاللَّهُ يَهْدِي مَن يَشَاءُ إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ
हम ही ने यक़ीनन वाजेए व रौशन आयतें नाज़िल की और खुदा ही जिसको चाहता है सीधी राह की हिदायत करता है
47وَيَقُولُونَ آمَنَّا بِاللَّهِ وَبِالرَّسُولِ وَأَطَعْنَا ثُمَّ يَتَوَلَّىٰ فَرِيقٌ مِّنْهُم مِّن بَعْدِ ذَٰلِكَ ۚ وَمَا أُولَٰئِكَ بِالْمُؤْمِنِينَ
और (जो लोग ऐसे भी है जो) कहते हैं कि ख़ुदा पर और रसूल पर ईमान लाए और हमने इताअत क़ुबूल की- फिर उसके बाद उन में से कुछ लोग (ख़ुदा के हुक्म से) मुँह फेर लेते हैं और (सच यूँ है कि) ये लोग ईमानदार थे ही नहीं
48وَإِذَا دُعُوا إِلَى اللَّهِ وَرَسُولِهِ لِيَحْكُمَ بَيْنَهُمْ إِذَا فَرِيقٌ مِّنْهُم مُّعْرِضُونَ
और जब वह लोग ख़ुदा और उसके रसूल की तरफ बुलाए जाते हैं ताकि रसूल उनके आपस के झगड़े का फैसला कर दें तो उनमें का एक फरीक रदगिरदानी करता है
49وَإِن يَكُن لَّهُمُ الْحَقُّ يَأْتُوا إِلَيْهِ مُذْعِنِينَ
और (असल ये है कि) अगर हक़ उनकी तरफ होता तो गर्दन झुकाए (चुपके) रसूल के पास दौड़े हुए आते
अन-नूरकुरान सूची
64आयत
मदनीRevelation
47आयत

अनुवाद — अन-नूर 47

सूरा अन-नूर आयत 47 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (जो लोग ऐसे भी है जो) कहते हैं कि…

सूरा आयत 47/64 — अन-नूर النور (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नूर सुनें, अन-नूर अनुवाद, अन-नूर mp3, अन-नूर pdf. आयत 45–49. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए