अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- دُعُوا – बुलाए जाएँ
- لِيَحْكُمَ بَيْنَهُمْ – ताकि वह उनके बीच फैसला करे
- مُعْرِضُونَ – मुँह मोड़ने वाले, किनारा करने वाले
तफसीर:
जब ये मुनाफ़िक़ीन (दिखावटी मुसलमान) अपने झगड़ों और विवादों में किसी फैसले के लिए बुलाए जाते हैं कि अल्लाह की किताब (क़ुरआन) और उसके रसूल (ﷺ) की सुन्नत के अनुसार फैसला हो, तो उनमें से एक गिरोह साफ़ इनकार करते हुए मुँह मोड़ लेता है। वे इसलिए किनारा करते हैं क्योंकि उन्हें डर होता है कि अल्लाह और उसके रसूल का फैसला उनके खिलाफ़ जाएगा, और वे अपनी मनमानी और स्वार्थ को सच्चाई पर तरजीह देते हैं। यह उनके निफ़ाक़ (दोहरेपन) की साफ़ निशानी है—जब हक़ उनके मतलब के खिलाफ़ होता है, तो वे उससे भागते हैं, हालाँकि यही हक़ उनके लिए बेहतर और सच्चाई है।
दावती पहलू:
यह आयत हर उस इंसान के लिए एक आईना है जो दावा करता है कि वह अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान रखता है। सच्चा ईमान सिर्फ़ ज़ुबान से नहीं, बल्कि दिल और अमल से होता है। जब हमें किसी मामले में अल्लाह की किताब और रसूल (ﷺ) की सुन्नत की ओर बुलाया जाए, तो हमें बिना किसी हिचकिचाहट के उसे क़बूल करना चाहिए, चाहे वह हमारी इच्छाओं के खिलाफ़ ही क्यों न हो। याद रखिए—अल्लाह और उसके रसूल का फैसला ही सबसे बेहतर, सबसे न्यायपूर्ण और हमारे लिए सबसे फ़ायदेमंद होता है। जो इसे क़बूल करता है, वही सच्चा मोमिन है, और जो मुँह मोड़ता है, वह अपने नुक़सान का सामना खुद करता है। आइए, हम अपने जीवन के हर मामले—चाहे वह छोटा हो या बड़ा—को अल्लाह और उसके रसूल (ﷺ) के फैसले के सुपुर्द करें, क्योंकि इसी में हमारी दुनिया और आख़िरत की भलाई है।
📜 आयत 46-50 — अन-नूर
अनुवाद — अन-नूर 48
सूरा अन-नूर आयत 48 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जब वह लोग ख़ुदा और उसके रसूल की तरफ…सूरा आयत 48/64 — अन-नूर النور (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नूर सुनें, अन-नूर अनुवाद, अन-नूर mp3, अन-नूर pdf. आयत 46–50. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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