Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الْخَامِسَةَ: पाँचवीं गवाही
- غَضَبَ اللَّهِ: अल्लाह का क्रोध और प्रकोप
- إِن كَانَ مِنَ الصَّادِقِينَ: यदि वह (पति) सच्चों में से हो (अपने आरोप में सच्चा हो)
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उस स्थिति की व्याख्या करती है जब एक पति अपनी पत्नी पर व्यभिचार का आरोप लगाए और उसके पास चार गवाह न हों। इस्लामी कानून के अनुसार, पति को चार बार अल्लाह की क़सम खाकर गवाही देनी होती है कि वह अपने आरोप में सच्चा है। इसके बाद पत्नी को यह अधिकार दिया जाता है कि वह इस आरोप से बचने के लिए चार बार अल्लाह की क़सम खाकर गवाही दे कि उसका पति झूठा है।
अब इस आयत में बताया गया है कि पत्नी की पाँचवीं गवाही यह होगी कि वह कहे: "मुझ पर अल्लाह का क्रोध हो, यदि मेरा पति (अपने आरोप में) सच्चा है।" यानी वह अपने ऊपर अल्लाह के ग़ज़ब की दुआ माँगती है, अगर वह झूठी हो और उसका पति सच्चा हो। यह एक बहुत बड़ी और गंभीर बात है, क्योंकि कोई भी इंसान अपने ऊपर अल्लाह का क्रोध नहीं माँगता जब तक कि वह सच्चाई पर दृढ़ न हो।
इस पाँचवीं गवाही के बाद पति और पत्नी के बीच अलगाव (तलाक़) कर दिया जाता है, और उनके बीच हमेशा के लिए अलगाव हो जाता है। यह इस्लामी न्याय प्रणाली की एक अद्भुत व्यवस्था है, जो दोनों पक्षों को न्याय दिलाती है और सच्चाई को सामने लाती है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम ने परिवार की इज़्ज़त और पवित्रता की कितनी बड़ी रक्षा की है। एक तरफ जहाँ पति को अपनी पत्नी पर आरोप लगाने का अधिकार दिया गया है, वहीं पत्नी को भी अपनी बेगुनाही साबित करने का पूरा अवसर दिया गया है। यह व्यवस्था न्याय और समानता पर आधारित है, जो हमें बताती है कि अल्लाह का दीन कितना निर्दोष और संतुलित है।
इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि हमें अपने जीवन में सच्चाई को हमेशा अपनाना चाहिए, क्योंकि अल्लाह सच्चों के साथ है और झूठे लोगों पर उसका क्रोध नाज़िल होता है। यह हमारे लिए एक चेतावनी भी है कि हम कभी झूठी गवाही न दें और न ही किसी पर बिना सबूत के आरोप लगाएँ। अल्लाह हमें सच्चाई पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 7-11 — सूरा अन-नूर
अनुवाद — अन-नूर 9
सूरा अन-नूर आयत 9 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और पाँचवी मरतबा यूँ करेगी कि अगर ये शख्स (अपने…सूरा आयत 9/64 — सूरा अन-नूर النور (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नूर सुनें, सूरा अन-नूर अनुवाद, सूरा अन-नूर mp3, सूरा अन-नूर pdf. आयत 7–11. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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